किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने की सबसे बड़ी चुनौती होगी मोदी के सामने

ताजा ख़बर

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जिन किसानों के बूते केंद्र में सरकार दोबारा लौटी है, उसके समक्ष कृषि क्षेत्र की विकास दर को रफ्तार बढ़ाना एक गंभीर चुनौती होगी। किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुना करने को लेकर कृषि क्षेत्र में पर्याप्त सुधार की सख्त जरूरत है। इसके बगैर किसानों की आमदनी में लक्षित वृद्धि संभव नहीं होगी। खेती में सार्वजनिक निवेश के साथ निजी निवेश की तत्काल जरूरत पड़ेगी।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डाक्टर मंगला राय का कहना है कि कृषि राज्यका विषय होने के नाते केंद्र कानून बनाकर राज्यों पर थोप नहीं सकता है। राज्यों के सहयोग और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जीएसटी काउंसिल की तर्ज पर सरकार कृषि विपणन सुधार परिषद का गठन पर विचार किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें :  फलों के राजा आम ने बना दिया 1 आम किसान को सचमुच का राजा, अब कमा रहे है लाखों

खेती से जुड़े रोचक वीडियो देखने और नई चीजें सीखने के लिए Kisan Khabar के Youtube Channel के नीचे दिए गए लाल रंग के बटन पर जरूर क्लिक करें।



कृप्या फेसबुक लाइक बटन पर क्लिक जरूर करें ताकि आपको खेती की अच्छी और काम आने वाली ख़बरें आसानी से फ्री में मिल सकें।

मंडी सुधार को उच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। सरकार ने इसके लिए वर्ष 2017 में कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम का मॉडल सभी राज्यों को भेजा था, जिसका कोई बहुत उत्साहजनक नतीजा नहीं मिला।

टेलीग्राम (Telegram) एप पर खेती-बाड़ी की अच्छी और काम आने वाली ख़बरें रोज फ्री में पाने के लिए ग्रुप को ज्वाइन करें।

ये भी पढ़ें :  अगर गाय-भैंस को अजोला खिलाओगे तो 15 से 20 प्रतिशत ज्यादा दूध मिलेगा, अजोला बनाने की पूरी विधि का वीडियो देखें।

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कृषि सुधारों की दिशा में वर्ष 1995 में लागू किये गये आवश्यक वस्तु अधिनियम में आमूल संशोधन की जरूरत है। इस बाबत नई सरकार संसद में विधेयक पेश करने की तैयार है। मंडी सुधार परिषद इसकी निगरानी कर सकती है। कृषि क्षेत्र में सुधार के मार्फत किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राज्यों का सहयोग आवश्यक होगा।

तथ्य यह है कि कृषि सुधार में राज्यों की उदासीनता के चलते ही वर्ष 2003 में भेजे गये मॉडल कानूनों को लागू करने में ज्यादातर राज्यों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की आमदनी को दुगुना करने का लक्ष्य वर्ष 2016 में निर्धारित किया था, जिसके तीन साल पहले ही बीत चुके हैं। इस अवधि में कृषि क्षेत्र की विकास दर अपेक्षित लगभग साढे़ दस फीसद को नहीं छू पाई है।

ये भी पढ़ें :  भारतीय पालेकर के शून्य लागत वाले खेती के फॉर्मूले से आई विदेशों में क्रांति, 40 लाख किसानों का उत्पादन दोगुना हुआ

किसान नेता डाक्टर सुधीर पंवार के मुताबिक किसानों की लक्षित आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार के पास केवल चार साल बचे हैं, जिसमें कृषि क्षेत्र की रफ्तार को बहुत अधिक बढ़ाना है। इसके लिए कृषि सुधारों के साथ भारी निवेश की तत्काल जरूरत है।

कृषि क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता देनी होगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना का असर खेती पर जल्दी दिखाई पड़ सकता है। सुधारों में कृषि उपज की उचित कीमत दिलाने के प्रयासों में मंडी कानून में सुधार को उच्च प्राथमिकता देना जरूरी होगा।

स्टोरी पर कृप्या कॉमेंट करें

Hits: 93



खेती से जुड़े रोचक वीडियो देखने और नई सीखने के लिए Kisan Khabar के Youtube Channel के नीचे दिए गए लाल रंग के बटन पर जरूर क्लिक करें।



कृप्या फेसबुक लाइक बटन पर क्लिक जरूर करें ताकि आपको खेती की अच्छी और काम आने वाली ख़बरें आसानी से फ्री में मिल सकें।



टेलीग्राम (Telegram) एप पर खेती-बाड़ी की अच्छी और काम आने वाली ख़बरें रोज फ्री में पाने के लिए ग्रुप को ज्वाइन करें।