Press "Enter" to skip to content

मथुरा के किसान आलू की खेती को पाले से बचाने के लिए कर रहे हैं यह काम, लेकिन कृषि विषेशज्ञ की नहीं है सहमति

Hits: 312

मथुरा। अभी तक किसान आलू की फसल को इस पाले से बचाने के लिए धुआं करते हैं, और सिचाई व दवाई का भी छिड़काव भी करते हैं।

उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले के किसान शराब छिड़ककर आलू की फसल को पाले से बचा रहे हैं। इन किसानों का दावा है कि शराब के छिड़काव से न तो आलू की फसल को पाला मारता है और न ही कोई कीड़ा लगने की शिकायत होती है। मथुरा के यमुना पार वाले आलू की बेल्ट माने जाने वाले इलाके में आलू की फसल पर छिड़काव किया जा रहा है। जिले में इस बार 16 हजार एकड़ से भी ज्यादा बुवाई की गई है।
इसमें बलदेव, महावन, मांट और राया, सुरीर इलाके प्रमुख हैं।

इन दिनों इस क्षेत्र में तापमान बेहद नीचे चला गया है और सुबह को खेतों की फसलों पर पाला जमना शुरू हो गया है। सुबह 8 बजे तक फसल पर इसका जमाव देखा जा रहा है। इस पाले से फसल को बचाने के लिए कुछ किसान जिब्रेलिक एसिड के साथ शराब का प्रयोग कर रहे हैं

राया इलाके के भैंसरा गांव के किसान जितेश रावत बताते हैं,” जिब्रेलिक एसिड एल्कोहल में ही घुलता है। यह एक हार्मोनिक दवा है। जिससे आलू की बढ़वार काफी तेज गति से होती है।”

भोलागढ़ के किसान सुरेश ने बताया कि शराब के छिड़काव से फसल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है, बल्कि uski उपज और अच्छी हो जाती है

कृषि विज्ञानं केंद्र, मथुरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसके मिश्रा बताते हैं,” कि आलू कि फसल पर अभी तक शराब के प्रभाव अथवा दुष्प्रभाव से संबंधित कोई भी अध्यन सामने नहीं आया है। इसलिए कहा नहीं जा सकता है। कि किसान किस आधार पर इस प्रक्रिया को आजमा रहे हैं। और बहुत फायदेमंद बता रहे हैं।

इस मामले में कोई भी ठोस बात तो अनुसंधान के बाद ही कही जा सकती है।”
वो आगे कहते हैं, “राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद अथवा कृषि विभाग आलू या किसी भी अन्य फसल को पाले या किसी अन्य समस्या से बचाने के लिए शराब के छिड़काव की कोई भी सलाह नहीं देते। बल्कि उनके अनुसार तो यदि आलू को पीले से बचाना है तो सल्फर के घोल का छिड़काव करना चाहिए और फसल में पानी लगाकर खेतों के चारो और धुआं करना चाहिए।

स्टोरी पर कृप्या कॉमेंट करें

Comments are closed.

WhatsApp chat