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दो बर्ष पहले अपनाया था मुर्गी पालने का यह तरीका और अब कमा रहे हैं लाखों रुपये

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गोंडा। मुर्गियों के बाड़े का उचित प्रबंधन और नियमित टीकाकरण कराकर आज अनूप सिंह मुर्गी पालन व्यवसाय में अच्छी कमाई कर रहे हैं। इस व्यवसाय से आज पुरे गांव में उनकी अलग पहचान बनीं हुई है। अनूप को देखकर गांव के आस-पास के लोगों ने भी मुर्गी पालन की शुरुआत की है।

गोंडा जिले के केशवपुर पहाड़वा गांव में दो बर्ष पहले अनूप ने ब्रायलर मुर्गी पालन शुरू किया था। अनूप बताते हैं,” कि 2500 स्क्वार फीट में हमारा फार्म बना हुआ है। और इसमें करीब 2200 पक्षी हैं। इनको बीमारी न हो इसलिए काफी ध्यान रखते हैं, अगर एक पक्षी बीमार है तो सभी मुर्गियां का बीमार होकर मर जाने का डर है।” भारत में पोल्ट्री व्यवसाय बहुत तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश में कुक्कुट पालन व्यवसाय की विकास की दर लगभग 30 प्रतिशत है। बहुत कम लागत से शुरू होने वाला व्यवसाय लाखों करोड़ों का मुनाफा देता है।

अपने फार्म में रोगों को फैलने से रोकने के लिए उचित प्रबंधन टीकाकरण के साथ-साथ अनूप सिंह बायोसिक्योरिटी को भी अपना रखे हैं। बायोसिक्योरिटी यानि जैव सुरक्षा। बायोसिक्योरिटी का इस्तेमाल ज्यादातर संगठित पोल्ट्री करती है। लेकिन धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रो के पशु पालकों में भी इसकी जागरूकता बढ़ रही है।

बायोसिक्योरिटी के बारे में अनूप बताते हैं,” बाहर से आने वाले लोगों को फार्म में जाने नहीं देते हैं, जिससे बीमारी नहीं फैले। इसके आलावा फार्म का वैक्सीनेशन रिकॉर्ड, और सुबह शाम बाड़े की साफ सफाई, मुर्गियों के फीडर को भी दिन में एक बार साफ किया जाता है।

मुर्गियों के टीकाकरण के बारे में अनूप बताते हैं, ” कि मुर्गियों में टीकाकरण होना बहुत जरुरी है, इसलिए चूजों को फार्म में लाने के चार से छह दिन पर रानीखेत का टीका लगवाते है। और 12 से 14 दिन पर गंबोरो का टीका लगवाते हैं। इसमें हेस्टर के सहयोगी हमारी मदद भी करते हैं।” सही प्रबंधन से अनूप ने अपनी पोल्ट्री व्यवसाय को नया रूप दे दिया है, साथ ही अन्य लोगों के लिए उदाहरण भी है।

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