किसान अब नहीं खाएंगे धोखा, यूरिया, डीएपी और सल्फेट खाद की पहचान करें घर बैठे और जाने कौन से किसान अपने खेतों में असली और नकली खाद लगा रहे हैं ! पढ़ें पूरी जानकारी

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प्रदेश के सभी क्षेत्रों में लगभग नवंबर में गेहूं की बुवाई शुरू हो जाती है लेकिन कहीं-कहीं पिछड़े क्षेत्रों में किसान दिसंबर में भी गेहूं की बुआई करते हैं ज्यादातर किसान भाई गेहूं बोते समय यूरिया और डीएपी का भरपूर इस्तेमाल करते हैं। और कुछ किसान जैविक खाद का भी इस्तेमाल करते हैं। इसी के साथ आसमान छूती खाद की कीमतों के बीच किसान को नुकसान तब होता है। जब ज्यादा से ज्यादा खाद डालने के बाद भी अच्छी पैदावार नहीं होती है।

आज हम आपको बता रहे हैं, उर्वरक की पहचान के तरीके

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किसानों के इस नुकसान से नकली खाद ही जिम्मेदार होता है, कई बार किसानों ने देखा है कि डीएपी खाद में पत्थर मिलते हैं, और यूरिया भी काफी मिलावटी आती हैं, जिससे किसानों को इसका खामियाजा भुगतना होता है। इन खादों में सबसे ज्यादा मिलावटी डीएपी, अमोनियम और फास्फेट खादें होतीं हैं, लेकिन कई बार इनकी पहचान करना आसान नहीं होता है। ऐसे में किसान अगर थोड़ी सी सतर्कता बरते तो यह नुकसान सहना न पड़े।

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इसलिए आज हम बताने जा रहे हैं, कि किसान खाद कि उर्वरक शक्ति को कैसे पहचान सकता है, और यह खाद नकली है या असली।

डीएपी की पहचान कैसे करें
डीएपी असली है या नकली इसकी पहचान के लिए किसान डीएपी के कुछ दानों को हाथ में लेकर तम्बाकू की तरह उसमें चूना मिलाकर मसलने पर यदि उसमें से तेज गंध निकले, जिसे सूंघना मुश्किल हो जाये तो आप समझ लें कि यह खाद असली है। किसान भाइयो डीएपी खाद को पहचानने के लिए एक सरल विधि और भी है। यदि हम डीएपी के कुछ दानें धीमी आंच पर तवे पर गर्म करें और इस प्रक्रिया में ये दानें फूल जाते हैं, तो समझ ले कि यही असली डीएपी हैं। किसान भाइयो यह डीएपी कि असली पहचान है। इसके कठोर दानें भूरे, काले, सफ़ेद और बादामी रंग के होते हैं। और नाख़ून से आसानी से नहीं टूटते हैं।

पानी में पूरी तरह घुल जाती है, यूरिया
यूरिया के दानें सफ़ेद चमकदार,एक सामान और कड़े दानें होते हैं। और ये दानें पानी में पूरी तरह घुल जाते हैं, तथा इसके घोल को चुने पर ठंढा महसूस होता है। दूसरा तरीका है कि इस खाद को तवे पर गर्म करने पर इसके दानें पिघल जाते हैं और कोई भी अवशेष नहीं बचता है। तो प्रक्रिया से समझ ले कि यह खाद एक दम सही है।

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आपस में नहीं चिपकते हैं, पोटास के दानें
पोटास की असली पहचान है, इसका सफ़ेद नमक तथा लाल मिर्च जैसा मिश्रण होता है। पोटास के कुछ दानों पर पानी की कुछ बूंदें डालें और अगर ये आपसे में नहीं चिपकते हैं, तो समझ लें कि यह असली पोटास है। एक बात और इस पोटास को पानी में डालने पर इसका लाल भाग पानी में ऊपर तैरता रहता है।

सुपर फास्फेट
सुपर फास्फेट की असली पहचान है, कि इसके सख्त दानें तथा इसका भूरा, काला, बादामी रंग होता है। इसके कुछ दानों को गर्म करें और इस प्रक्रिया में ये दानें नहीं फूलते हैं, तो समझ लें कि यही सुपर फास्फेट खाद असली होती है। आप ध्यान रखें कि गर्म करने पर डीएपी के दानें फूल जाते हैं, जबकि सुपर फास्फेट के दानें गर्म करने पर नहीं फूलते हैं। इस प्रकार इसकी मिलावट की पहचान आसानी से की जा सकती है।सुपर फास्फेट के दानें नाखूनों से आसानी से नहीं टूटते हैं। इस दानेदार उर्वरक में मिलावट बहुधा डीएपी व एनपीके मिक्सचर उर्वरकों के साथ जानने की आशंका रहती है।

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जिंक सल्फेट :
जिंक सल्फेट की असली पहचान ये है, कि इसके दाने हल्के, सफ़ेद, पीले तथा भूरे बारीक़ कण के आकर के होते हैं। किसान भाइयो जिंक सल्फेट में प्रमुख रूप से मैग्नीशियम सल्फेट की मिलावट की जाती है। भौतिक रूप से सामान्य होने के कारण इसके असली व नकली की पहचान करना बहुत कठिन होता है।

किसान भाइयो एक बात और डीएपी के घोल में जिंक सल्फेट का घोल मिलाने पर थक्केदार घना अवशेष बनाया जा सकता है, जबकि डीएपी के घोल में मैग्निशयम सल्फेट का घोल मिलाने पर ऐसा नहीं होता है। किसान भाइयो अगर हम जिंक सल्फेट के घोल में पलती कास्टिक का घोल मिलाएं तो सफ़ेद मटमैला माड़ जैसा अवशेष बनता है। यदि इसमें गाड़ा कास्टिक का घोल मिला दें तो ये अवशेष पूर्णतः घुल जाता है। किसान भाइयो इसी प्रकार यदि जिंक सल्फेट की जगह मैग्नीशियम सल्फेट का प्रयोग किया जाये तो अवशेष नहीं घुलता है।

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