किसानों को मिलेगी निजात नीलगाय और छुट्टा पशुओं से फसलों को बचाएगा यह सुरक्षा कवच ! पढ़ें पूरी जानकारी

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गदेला (लखनऊ) अभी तक किसान नीलगाय से बहुत परेशान थे, लेकिन अब छुट्टा जानवरों के बढ़ने से किसानों को खेती करना मुश्किल हो गया है। किसान कई तरह के उपाय अपनाते हैं जो पूरी तरह से कारगार साबित नहीं हो पाते हैं। ऐसे में किसान फसल सुरक्षा कवच से अपनी फसल को सुरक्षित कर सकते हैं।

खेती की ख़बरें अब मोबाइल पर पाना और भी हुआ आसान, डाउनलोड करें किसानख़बर की नई एप जिसमें है किसानों की लगभग हर समस्या का समाधानमिर्ज़ापुर जिले के त्रिलोकी ने अब तक कई किसानों के खेतों में सुरक्षा कवच (सोलर फेसिंग) लगा चुके हैं, वे बताते हैं,” कि आज के समय में किसानों की सबसे बड़ी समस्या छुट्टा पशु हैं, पहले तो नीलगाय ही थे। लेकिन अब तो छुट्टा जानवरों का आतंक बढ़ गया है। कुछ मिनटों में पशु पूरी फसल को बर्बाद कर देते हैं ऐसे में अगर फसल ही नहीं बचेगी तो किसानों की आय कैसे बढ़ेगी। ऐसे में किसान अगर सोलर फेसिंग से फसल को सुरक्षित कर दें तो निश्चित ही किसानों की आय बढ़ेगी।”इस मशीन से पशु या व्यक्ति घायल नहीं होते हैं और फसल की सुरक्षा भी पूरी तरह होती है। यह मशीन सोलर पैनल के जरिये चार्ज होती है।
इस मशीन में डे – नाईट मोड़ व ऑटोमेटिक मोड़ का भी ऑप्सन है। डे – नाईट मोड़ के जरिये मशीन सिर्फ दो घंटे तारों में करेंट सप्लाई करेगी और अगर ऑटोमेटिक मोड़ पर है तो मशीन पुरे 24 घंटे काम करेगी। यह मशीन खेत के चारो तरफ लगे तारों में 9 किलोवाट का करंट दौड़ाती है।त्रिलोकी आगे कहते हैं,” कि आप यहां पर देख रहे हैं किस तरह फसल सुरक्षा कवच जो जानवरों से आपकी फसल को बचाता है, इसे सोलर फेसिंग भी कहते हैं, हम इस तकनीक से उत्तर प्रदेश के किसानों को इससे परिचित करा रहे हैं। कई किसानों ने इस तकनीक का इस्तेमाल अपने खेतों में किया हैं, और उनकी फसल जानवरों से पूरी तरह बच रहती हैं।

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अगर किसानों की फसल इसी तरह बची रहेगी तो किसानो कि आय 100% बढ़ेगी। नीलगाय और छुट्टा जानवरों से बचाव के लिए किसान कटीले तार का इस्तेमाल करते हैं। कई बार तो किसान उसी तार में बिजली का कनेक्शन भी दे देते हैं। जो पशुओं के साथ किसानो के लिए भी काफी खतरनाक साबित होता हैं। लेकिन सोलर फेसिंग से थोड़ा सा झटका लगता है।लागत के बारे में त्रिलोकी जी ने आगे बताया,” इसकी लागत बहुत ज्यादा नहीं होती है, एक एकड़ में लगाने पर लगभग 23 हजार का खर्चा आता है, और पांच एकड़ में लगाने पर लगभग 40 हजार का खर्चा आता है। अगर किसान के घर पर सोलर पैनल और बैटरी पहले से है तो पंद्रह हजार रूपये का खर्चा आता है। इसमें बस तार इंसुनेटर का खर्चा आता है।

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