अगर आपकी गाय या भैंस से इस शीतकालीन में दूध का उत्पादन कम हो रहा है, तो खिलायें यह घास, बढ़ेगा 20 से 25 प्रतिशत दूध ! पढ़ें पूरी जानकारी

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लुधियाना (पंजाब)। सर्दियों में अक्सर दूध देने वाले पशुओं का दूध सूखने की संभावना रहती है, जिसके कारण दुग्ध पशुओं से दूध कम निकलता है। सर्दियों में पशुपालक अपने पशुओं की पूर्ण सुरक्षा भी करते हैं, जिससे पशुओं को ठंड न महसूस हो सके। लेकिन फिर भी क्या कारण है, कि दूध देने वाले पशुओं का दूध कम हो जाता है।

सर्दियों में पशुपालक अपने पशुओं को हरे चारे में बरसीम खिलाते हैं, जिसमें कीट लगने पूरी तरह संभावना होती है। लेकिन अगर किसान सर्दियों में अपने पशुओं को इस बरसीम की जगह पर मख्खन ग्रास खिलाएं तो दूध उत्पादन 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, और इस मख्खन घास में कभी कीट नहीं लगता है।

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इस मख्खन घास बीज कंपनी के अमित महापात्रा बताते हैं, ” कि मख्खन घास पूरी तरह सर्दियों का सबसे महत्वपूर्ण चारा होता है, इसकी बुवाई अक्टूबर से दिसंबर महीने में की जाती है, इसके बाद 35 से 40 दिनों में इस घास की पहली कटाई हो जाती है। और दूसरी कटाई 20 से 25 दिनों में मिल जाती है। इस तरह मख्खन घास से एक बार बुवाई करने के बाद 5 से 6 कटाई मिल जातीं हैं।

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वो आगे बताते हैं,” कि मख्खन घास का बीज एक हेक्टेयर में एक किलो डाला जाता है। क्योकि ये बरसीम की बुवाई के समय में ही बोया जाता है, बरसीम की तुलना में अगर आप अपने पशुओं को मख्खन घास खिलाते हैं, तो 20 से 25 प्रतिशत दूध का उत्पादन बढ़ जाता है।

इस घास में 14 से 15 प्रतिशत प्रोटीन होता है। अगर आप इसका बीज खरीदना चाहते हैं, तो आप किसी भी बीज विक्रेता की दुकान पर जाकर मख्खन घास के नाम से खरीद सकते हैं।”

पंजाब – हरियाणा के पशुपालकों को भा रही है, मख्खन घास
चार साल पहले मख्खन घास की शुरुआत पंजाब -हरियाणा जैसे राज्यों में हुई थी। दो हजार किलो से शुरू किया था और आज अकेले पंजाब 100 मीट्रिक टन बीज लगाते हैं। पंजाब हरियाणा राज्यों में 150 टन बीज किसानो ने ख़रीदा है। मख्खन घास पशुओं की सेहत के लिए बहुत ही बढ़िया होती है। इससे कमजोर पशुओं की हालत आसानी से सुधर जाती है। मख्खन घास का बीज मार्केट में 400 रूपये किलो मिलता है।

मख्खन घास में नहीं लगते हैं कोई कीट
बरसीम में फरबरी में कीट लगने की समस्या बढ़ जाती है। लेकिन मख्खन घास में यह खास बात है, कि इसमें कोई कीट नहीं लगते हैं।

ऐसे करें बुवाई
इसकी खेती सभी तरह की मिटटी में की जा सकती हैं, जिसका पीएच 6.5 से 7 तक हो। मख्खन घास शीतकालीन चारा फसल है, जिसे घर-घर काटा जा सकता है। यह मैदानी एवं पहाड़ी इलाकों में बुवाई के लिए उपयुक्त है। सभी तरह की मिटटी में इसकी शीतकालीन बुवाई नवम्बर से दिसंबर में की जा सकती है। ग्रीष्मकालीन चारा फसल के लिए इसे मार्च से अप्रेल के बीच बोया जा सकता है।

बुवाई के समय खेत में नमी रहनी चाहिए। इसके बीज खेत में 10 से 15 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं। इसके बीज बजन में काफी हल्के होते हैं।

लेकिन बहीं बरसीम के बीज में मिलाकर इस मख्खन घास के बीज को खेत में बोया जा सकता है। बीजों के अंकुरण के बाद दो -तीन सप्ताह में एक सिचाई की जरुरत होती है। इसके बाद 20 दिनों के बाद जरुरत के अनुसार पानी जरूर दिया जाता है।

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