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मटर की खेती अब करें वैज्ञानिक तरीके से वैज्ञानिकों ने नई प्रजाति को किया विकसित

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वैज्ञानिकों ने मटर के पौधे में अधिक फूल लगने बाली प्रजाति विकसित की है, जिसके कारण पौधों पर लगने बाली फलियों की संख्या बढ़ी है
नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने मटर की ऐसी प्रजाति विकसित की जिसमें फूलों की संख्या अधिक होगी, और जब फूलों की संख्या अधिक होती है तब पेड़ों पर फलियों की संख्या भी अधिक होती है इससे किसानों को अधिक उत्पादन मिल सकता है।
मटर की सामान्य किस्मों के पौधों में प्रति डंठल पर एक या दो फूल लगते हैं। वैज्ञानिकों ने मटर की दो अलग -अलग प्रजातियों वीएल – 8 और पीसी -531 के संकरण के जरिये मटर की नई किस्म जारी की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस नई प्रजाति के प्रत्येक डंठल पर शुरू में दो फूल लगते है, लेकिन चार पीढ़ी के बाद इस नई प्रजाति के पौधों के प्रत्येक डंठल में दो से अधिक फूल देखे गए हैं। जिससे एक डंठल में अधिक फलियां लगती हैं।
भारतीय भोजन में प्रमुख रूप से शामिल मटर प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है और दलहन तथा सब्जी के रूप में इसका प्रयोग बहुत अधिक होता है।

मटर की नई विकसित वीआरपीएम 901-5 में एक डंठल में पांच फूल और उनकी फलियां
संकरण से प्राप्त पांच किस्मों में वीआरपीएम -501, वीआरपीएम -502 , वीआरपीएम -503 , बीआरपीएम -901-3 ,और वीआरपीएसईएल -1 पी के पौधे के कई डंठलों में तीन फूल भी उत्पन्न हुए। एक अन्य प्रजाति, जिसे वीआरपीएम 901-5 नाम दिया गया है

इसके डंठलों में पांच फूल देखे गए हैं। मटर की इन प्रजातियों के पौधों के आधे से अधिक डंठलों में दो से अधिक फूल पाए गये हैं।पौधों की नई विकसित वीआरपीएम 901 – 5 में एक डंठल में पांच फूल तथा उसकी फलियां भारतीय सब्जी अनुसन्धान संस्थान (आईवीआरआई) वाराणसी, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली और केंद्रीय मृदा लवणता अनुसन्धान संस्थान,करनाल के वैज्ञानिकों द्वारा ये अध्ययन किये गये है। अध्ययन के नतीजे शोध पत्रिका प्लॉस वन में प्रकाशित किये गए हैं।
शोध कर्ताओं में शामिल आई वीआरआई से जुड़े वैज्ञानिक डा.राकेश के. दुवे बताते है,” की एक डंठल पर अधिक पुष्पन बाली नई किस्मों के मटर के पौधों के उत्पादन में सामान्य किस्मों की अपेक्षा उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी देखी गयी है।”दुवे आगे कहते है,” इस शोध के शोधकर्ताओं,शिक्षाविदों और उद्दोगों को एक आधार मिलेगा, जिससे मटर की बेहतर गुणवत्ता एवं अधिक उत्पादन बाली प्रजातियां विकसित करने में भी मदद मिल सकती है एक डंठल में अधिक फलियों के उत्पादन के साथ-साथ जल्दी पैदावार देने वाली किस्मों के विकास सम्बन्धी शोध भविष्य में किए जा सकते है। ”
वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि बहु पुष्पन या अधिक फूल आने के बाबजूद पेड़ों पर अधिक फलियां नहीं आती है। वीआरपीएसईएल -1पी यह एक ऐसी ही नयी प्रजाति है, जिसमें वहु पुष्पन को मोटी डंठल का सहारा नहीं मिल पाता। इस वजह से फूल एवं फलियाँ समय से पहले नस्ट हो जाती है और पौधे की उत्पादन क्षमता का भरपूर लाभ नहीं मिलता। शोध कर्ताओं ने यह भी पाया। कि बहुपुष्पन बाले कई पौधे मध्य से देर तक परिपक्व होते है और इन पौधों के पुष्पन कि स्थिति में अधिक तापमान का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

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