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जाने इस किसान के बारे में, जोकि 1 हेक्टेयर खेत में बहुत कम पानी में कर रहा है 100 किलो तक धान का उत्पादन, आप भी अपना सकते हैं ये तरीका – Kisan NO.1 Special Story

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जैसा कि आप जानते हैं कि किसानख़बर.कॉम Kisan NO.1 नाम से एक खास सीरिज शुरु की है जिसमें उन टॉप 100 किसानों की सफलता की सच्ची कहानियां बताई जा रही हैं जिन्होंने डॉक्टर, वकील, इंजीनियर बनने के बजाय खेती में वो कर दिखाया जिसके बारे में ज्यादातर लोग सोचते भी नहीं है। इस सीरीज के 2 उद्धेश्य हैं:-

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  1. सफल किसानों को बाकी किसानों से जोड़ना, ताकि बाकी किसान भी खेती में सफल हो सके और अच्छा पैसा कमा सकें।
  2. ऐसे दौर में जब हर कोई डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, नेता बनना चाहता है लेकिन किसान नहीं, उस दौर में हम खेती के असली हीरोज़ की सफलता पर स्टोरी पोस्ट कर उनको सम्मानित करना।

 

आज की स्टोरी

 

आज की स्टोरी में हम बात करेंगे उत्तर प्रदेश के बहराईच ज़िले के युवा किसान शैलेन्द्र अवस्थी की जिन्होंने SRI तकनीक की मदद से एक तीर से 3 निशाने साधे और सफल हुए। 3 निशाने यानी 3 फायदों के बारे में आप स्टोरी में आगे पढ़ेंगे, लेकिन उससे पहले बाकी जरूरी बातें जान लें।

 

क्या खास किया शैलेन्द्र ने खेती में

 

32 साल के शैलेंद्र ने कृषि में B.Sc करने के बाद कहीं नौकरी करने के बजाय खेती करना बेहतर समझा। उन्होंने SRI तकनीक की मदद से धान यानी चावल की फसल में 3 बड़े काम किए:-

 

  1. बेहद कम बीज –  जहां पहले प्रति हेक्टेयर में 5 किलो बीज लगता था वहां अब सिर्फ 2.5 किलो बीज लगाना होता है यानी कि 2 तिहाई बीज की लागत की बड़ी बचत।
  2. इसमें पानी भी 30 प्रतिशत तक कम ही देना होता है यानी बिजली-पानी दोनों की बचत
  3. तीसरा और सबसे बड़ा फायदा ये कि बहुत कम बीज लगने के बावजूद उत्पादन 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ज्यादा उत्पादन यानी ज्यादा कमाई।
  4. शैलेंद्र आज 2 हेक्टेयर जमीन से सालाना 20 लाख रूपए कमा रहे हैं। यानी प्रति एकड़ 4 लाख या प्रति बीघा 80 हजार रूपए की कमाई।

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देश में धान यानी चावल की खेती का मौजूदा हाल

 

भारत देश में धान की खेती परंपरागत फसल का ही हिस्सा है। लेकिन शायद ही कोई ऐसा किसान हो जो बहुत कम लागत में पारंपरिक तरीके से औसत से 30% अधिक तक धान का उत्पादन कर पाते होंगे। लेकिन युवा किसान शैलेंद्र ने वैज्ञानिक तरीके से फसल की 30% अधिक तक पैदावार कर रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश के बहराईच ज़िले के छोटे से गाँव असमानपुर में रहकर शैलेंद्र अवस्थी खेती में एक नई क्रांति ला रहे हैं। वह पारंपरिक खेती से हटकर एसआरआई (SRI) तकनीक का इस्तेमाल करके बहुत कम लागत में ज़्यादा मुनाफ़ा कमा रहे हैं।

 

किसानख़बर.कॉम से Exclusive Interview (खास बातचीत) में शैलेंद्र ने बताया कि एक हेक्टेयर में जहां 50 से 60 किलो तक उत्पादन होता है वहीं वो SRI तकनीक के जरिए 1 हेक्टेयर खेत में 100 किलो तक धान का उत्पादन करते हैं।

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क्या है SRI तकनीक

 

शैलेन्द बताते हैं कि SRI एक ऐसी तकनीक है जिसके इस्तेमाल से बहुत कम पानी के इस्तेमाल से धान का ज्यादा उत्पादन किया जा सकता है। इसे सघन धान प्रणाली (System of Rice Intensification-SRI) तकनीक भी कहते हैं।

 

दरअसल यह तकनीक सबसे पहले 1983 में भारतीय महासागर में स्थित छोटे से आइलैंड देश मैडागास्कर में फ्रांस के एक व्यक्ति हेनरी (पूरा नाम- Henri de Laulanie) ने खोजी थी लेकिन तब इसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाया।

 

इस तकनीक में पौधों की जड़ों में नमी बरकरार रखना ही जरूरी होता है, लेकिन इसके सिंचाई के पुख्ता इंतजाम जरूरी हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर फसल की सिंचाई की जा सके।

 

इसमें सामान्यत: जमीन पर दरारें उभरने पर ही दोबारा सिंचाई करनी होती है। इसमें 25×25 सेमी पर 8 से 10 दिन की पौध लगाई जाती है।

 

एस.आर.आई तकनीक के फ़ायदे

 

शैलेन्द के मुताबिक पारंपरिक खेती में जहां पहले 15 किलो तक बीज लगता था वहीं इस तकनीक के इस्तेमाल से 5 किलो तक बीज से काम हो जाता है। निराई-गुणाई में भी लेबर खर्चा काफ़ी कम आता है। 30% तक पानी की भी बचत होती है और उत्पादन भी 30% तक बढ़ जाता है।

 

कैसे की शैलेंद्र ने शुरुआत

 

उन्हें इस तकनीक के बारे में नरेन्द कृषि विश्वविधालय फ़ैज़ाबाद में पता चला फिर स्वयं के प्रयासों से उन्होंने इस पर काम किया। उन्होंने पहले प्रयोग के तौर पर 1 बीघा ज़मीन को चुना उसके बाद धीरे-धीरे करके इसका दायरा बड़ा किया और आज वह 2 हेक्टेयर ज़मीन पर खेती कर रहे हैं।

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क्या इस तकनीक के जरिए कोई समस्या भी आती है।

 

शैलेन्द्र आगे कहते हैं कि वैसे तो इस तकनीक के इस्तेमाल से कोई समस्या नहीं आती बस शुरुआती दौर में लेबर थोड़ा मुश्किल से मिलते हैं।

 

इस तकनीक से बहुत कम दिन की पौध होती है जिससे लेबरों को अच्छी तरीके से लगाना पड़ता है और खुद की देखरेख में ही इसकी रोपाई कराई जा सकती है। यानि कि सुविधाजनक अगर इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाए तो खेत को किसी भी तरह का नुक़सान नहीं पहुंचता है।

 

शैलेन्द्र खेती के साथ-साथ सलाह देने का भी काम करते हैं। वह अन्य किसानों के खेतों में जाकर उन्हें प्रशिक्षित यानी ट्रेनिंग देते हैं और वैज्ञानिक तरीकों के जरिए सामान्य से अधिक उत्पादन करने का तरीका भी बताते हैं।

 

शैलेंद्र ने किसानख़बर.कॉम से खास बातचीत में बताया कि वो अब तक लगभग 100 से ऊपर किसानों को अपने साथ जोड़ चुके हैं।

 

शैलेन्द्र को खेती में उनके योगदान के लिए राज्य व केन्द्र दोनों ही सरकार सम्मानित कर चुकी है। इसके अलावा खेती के शुरुआती दौर में जब वह इस क्षेत्र में नए थे तो SRI  तकनीक का इस्तेमाल करके सामान्य से अधिक धान का उत्पादन करने के कारण, वहां के ज़िला मजिस्ट्रेट ने उन्हें उनके खेत पर आकर 10,000 की प्रोत्साहन राशि दी थी।

 

उनका काम यहीं नहीं ख़त्म हो जाता वह इन दिनों अधिकारियों के साथ मिलकर रोज़ किसानों से जुड़ी समस्याओं को फोन पर सुलझाते हैं। वह बताते हैं कि अगर कोई किसान अपनी समस्या को लेकर फोन करता है तो हम उसकी समस्या का समाधान निकालते हैं।

 

इसके अलावा कोई तकनीकी समस्या आती है तो वैज्ञानिकों के जरिए उसका समाधान निकाला जाता है। अब तो सरकारी विभाग भी किसानों की समस्या को दूर करने में हमारी मदद ले रहा।

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