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दिल्ली के 17 साल के ईशान ने बनाया ऐसा डिवाइस, किसान घर बैठे ही ऑपरेट कर सकते है अपने खेतों में लगे वाटर पंप…

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दिल्ली के 17 साल के ईशान ने बनाया ऐसा डिवाइस, किसान घर बैठे ही ऑपरेट कर सकते है अपने खेतों में लगे वाटर पंप…

दोस्तों सिर्फ हमारा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनियां किसानों के बिना अधूरी है। किसान ना हो तो लोग भूखे ही मरेंगे। आज हम इस आधुनिक दौर में हैं, जहां हर कोई अपनी तरक्की के लिए अच्छी नौकरी करना चाहता है। हर किसी को पैसा कमाना चाहता है और मज़े में अपनी ज़िंदगी को चलाना चाहता है। लेकिन कोई यह नहीं सोच रहा है की अगर किसान ही ना हो तो हम तरक्की करके भी क्या करेंगे।

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जब खाने के लिए खाना ही नहीं होगा तो काम कैसे करेंगे। कोई और इंसान इस बात को सोचे या ना सोचे लेकिन दिल्ली के सिर्फ 17 साल के एक लड़के ईशान ने किसानों के बारे में सोचा और उनके लिए एक प्लूटो नामक डिवाइस बनाया। आइये जानते हैं कि कौन है ईशान और कैसे किया उन्होंने इतना बड़ा काम वो भी सिर्फ 17 साल की उम्र में।

 किसानो के लिए बनाया प्लूटो डिवाइस
                                                            किसानो के लिए बनाया प्लूटो डिवाइस

 

 

क्या है प्लूटो डिवाइस ?
दिल्ली के ईशान मल्होत्रा (17) के है और वह 12 क्लास के स्टूडेंट है, ने प्लूटो नामक एक ऐसा डिवाइस बनाया है, जिसकी मदद से किसान घर बैठे खेतों में लगे वाटर पंप को ऑपरेट कर सकते हैं। वाटर पंप चालू और बंद करने के लिए उन्हें बार-बार खेतों में नहीं जाना पड़ेगा। डिवाइस की खास बात यह है कि इसे स्मार्टफोन के अलावा सामान्य फोन से भी ऑपरेट किया जा सकता है।

प्लूटो डिवाइस
                                                                           प्लूटो डिवाइस

 

कैसे काम करता है यह डिवाइस ?
इस डिवाइस को वाटर पंप के अंदर फिट किया जाता है। इसमें ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी मदद से टेली कम्युनिकेशन के जरिए किसान वाटर पंप चालू या बंद कर सकते हैं। वाटर पंप चालू करने के लिए किसानों को अपने मोबाइल से 1111 और बंद करने के लिए 2222 नंबर डायल करना होगा।

 प्लूटो डिवाइस के साथ ईशान
                     प्लूटो डिवाइस के साथ ईशान

डिवाइस बनाने में लागत
सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने की चाहत रखने वाले ईशान जयपुर से 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। उनके मुताबिक एक डिवाइस बनाने में लग-भग 700 रुपए खर्चा आता है। वह इसे इतने ही रुपए में किसानों को बेच देते हैं।

डिवाइस बनाने में 700 रुपए खर्चा आता है।
                                     डिवाइस बनाने में 700 रुपए खर्चा आता है।

शुरुआत में किसानों ने इस डिवाइस का मज़ाक उड़ाया, लेकिन ईशान ने हार नहीं मानी
ईशान ने जून, 2015 में डिवाइस बनाने की शुरुआत की थी। उस समय उनकी उम्र 14 साल थी। जनवरी 2016 में पहला डिवाइस तैयार किया। डिवाइस लेकर जब वह किसानों के बीच पहुंचे तो उनका मज़ाक बनाया गया।ईशान ने किसानों की बातों को ज्यादा बुरा ना मान अपने काम में लगे रहे है और आगे अपनी मंज़िल की ओर बढ़ते रहे। साल 2016-17 के बीच 500 डिवाइस बना डाले। काफी कोशिशों के बाद किसानों को डिवाइस की मदद से जब वाटर पंप ऑपरेट कर दिखाया, तब उन्हें विश्वास हुआ।

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किसानों ने इस डिवाइस का मज़ाक उड़ाया
                                                                किसानों ने इस डिवाइस का मज़ाक उड़ाया

किसानों की परेशानी देखर ली प्रेरणा
ईशान बताते हैं कि बचपन से ही उन्होंने किसानों की परेशानी सुनी है। किसानों को रोजाना सुबह-शाम घर से चार-पांच किमी पैदल चलकर खेतों में लगे वाटर पंप को चालू करने जाना पड़ता है।कई बार वहां पहुंचने पर लाइट चली जाती है। बारिश के दिनों में स्थिति बदतर हो जाती है और वाटर पंप चालू करने के दौरान किसानों को इलेक्ट्रिक शॉक लग जाता है।

किसानों की परेशानी देख ईशान ने एक ऐसा डिवाइस बनाने का फैसला किया। इसके जरिए वे देश के किसी भी कोने से वाटर पंप चालू कर सकें। डिवाइस बनाने के लिए ईशान ने क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म इंपैक्ट गुरु के जरिए 1.30 लाख रुपए का फंड जुटाया।

 वाटर पंप
                                                                                 वाटर पंप

300 किसानों को मुफ़्त में बाटें डिवाइस
ईशान ने अब तक लग भग तीन साल में 500 डिवाइस बनाकर, 300 डिवाइस किसानों को मुफ्त में बांटे है। ईशान शुरुआत में जब यह डिवाइस बनाने के बारे में सोच रहे थे तब उनके दिमाग में सिर्फ यही आ रहा था की अगर मैं इसमें फेल हो गया तो भी मई दोबारा मेहनत और कोशिश करूंगा और इस डिवाइस को बनाये बिना नहीं छोडूंगा। ईशान की मेहनत रंग लाइ और उन्होंने यह डिवाइस बना लिया।

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