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राजस्थान के अजमेर में रहने वाली अंकिता ने कोलकाता की नौकरी छोड़ अपनाई खेती, आज कमा रहीं हैं लाखों

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राजस्थान के अजमेर में रहने वाली अंकिता ने कोलकाता की नौकरी छोड़ अपनाई खेती, आज कमा रहीं हैं लाखों

आज कल के वक़्त में अगर हम किसी गाँव के व्यक्ति को शहर जाकर पैसे कमाने का मौका दें तो शायद वह ख़ुशी-ख़ुशी शहर चला जाएगा। लेकिन अगर हम किसी शहर के व्यक्ति को गॉंव जाने के लिए पूछें तो शायद वे कभी शहर की आरामदायक ज़िन्दगी छोड़कर गॉंव नहीं जाना चहेगा।
लेकिन  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कोलकाता से पढ़ाई करने के बाद अंकिता कुमावत ने शहर की ऐश की ज़िन्दगी छोड़कर अपने गॉंव जाकर फुल टाइम किसानी करने की ठानी।
पिता के साथ हाथ बटाती अंकिता
पिता के साथ हाथ बटाती अंकिता
अंकिता अजमेर की रहनेवाली हैं। शहर छोड़ चुकी अंकिता ‘मातृत्व डेरी एंड ऑर्गनिक फूड’ के माध्यम से डेरी और ऑर्गनिक खेती को नए मुकाम तक पहुंचने की ठानी है। दरअसल अंकिता के पिता ने चार्टर्ड सिविल इंजिनियर के पद से वोलंटरी रिटायरमेंट स्कीम के तहत नौकरी छोड़कर डेयरी को बतौर व्यवसाय चुना, यही वजह थी की अंकिता ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर व्यवसाय में पिता का हाथ बटाने की सोची।

कहाँ से हुई शुरुआत?

यह बात नब्बे के दशक से शुरू हुई जब अंकिता लंबे समय के लिए बीमार पड़ गईं। तब डॉक्टर्स ने उन्हें गाय का दूध पीने की सलाह दी। उस वक़्त उनके पिता ने एक गाय ख़रीदी। वहीं से अंकिता के पिता ने डेयरी शुरुआत की। फिर समय के साथ-साथ गायों कि संख्या भी बढ़ती गई। मौजूदा समय में अंकिता के अजमेर स्थित फार्म में करीब 50 गाएं और भैंसें हैं। करीब 2 साल पहले ही अंकिता ने डेयरी और खेती के कामों में खुद को लगा दिया।

कांटो से भरा था अबतक का सफर: अंकिता 

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अंकिता का यह सफर ज़ादातर व्यवसायों की तरह ही था जहाँ पर सफ़लता का रास्ता कांटो से भरा होता है। अंकिता ने कई बार, कई महीनों तक अपनी जेब से पैसे निकालकर व्यवसाय में लगाए। एक भरोसा था कि एक दिन तो सफलता आनी ही है, यही कारण था कि अंकिता ने इस पूरे संघर्ष के समय को हँसकर बिताया।

काउंटर बिक्री से होम डिलीवरी तक 

अंकिता का कहना था कि, ”पहले हम सिर्फ डेयरी से जुड़ा व्यवसाय कर रह थे और तब हम सिर्फ अपने काउंटर से ही बिक्री करते थे। जब से मैं इससे जुड़ी, हमने लोगों को उनके घरों तक होम डिलीवरी के ज़रिये डेरी उत्पादों को पहुंचाना शुरु किया। साथ ही ओर्गेनिक फार्मिंग से प्राप्त फसलोत्पादों जैसे सब्जियां, अनाज, आटा, शहद, मसाले आदि को भी घर पहुंचने की सुविधा के साथ बेचने लगे हैं।”

”मेरा मानना है कि हमें GAP यानी गुड एग्रीकल्चर प्रेक्टिसेस को अपनाना चाहिए जिसमें रसायनों का इस्तमाल कम से कम हो ताकि इनसे किसी को भी नुकसान न हो। अपनी भूमि की उर्वरकता और पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर बनाए रखने के लिए ये बेहद जरूरी है।”- अंकिता

समाज सेवा भी था एक उपदेष्य

अंकिता का कहना है कि बाज़ार मिलावटी दूध और खाद्य पदार्थों से भरा हुआ है। ऐसे में सभी उपभोक्ताओं का सचेत रहना होगा। इतना ही नहीं जो व्यवसायी हैं उन्हें मुनाफे की फिक्र किए बगैर ये तय करना होगा कि समाज के हर वर्ग के लोगों को शुद्ध उत्पाद मिले।
”हमारा एक मात्र उद्देश्य है हम शुद्ध व रसायनमुक्त दूध सही कीमत पर लोगों को दें।”- अंकिता

कितना रहा परिवार का सपोर्ट?

अंकिता का कहना है कि उनके पिता आदर्श हैं और उनके इस व्यवसाय में आने की वजह भी वही थे। लेकिन इस तरह के व्यवसाय को पढ़े लिखे लोगों के लिए सही नहीं माना जाता रहा है, यही वजह थी कि लोग अंकिता के इस फैसले से बहुत हैरान थे।
”दुर्भाग्य की बात यह है कि अब किसान खुद गाँव छोड़कर शहरों में बसने लगें हैं, नौकरियां खोज रहे हैं लकिन मेरे मामले में ये पूरी तरह उलट था। मैं नौकरी छोड़कर खेती करने जा रही थी और समाज के बुजुर्ग इस बात को समझ नहीं पा रहे थे।”- अंकिता

अंकिता के अनुसार इस क्षेत्र में व्यवसाय का क्या है भविष्य?

जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ेगी इस व्यवसाय का भविष्य और भी ज़ादा उज्जवल होता जाएगा। आज बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज़, खेती और सौर ऊर्जा की तरफ ज़ादा से ज़ादा ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों व्यवसायों के लिए कारोबार और मुनाफे की संभावनाओं की कमी नहीं है।
तो यह भी कहा जा सकता है कि वर्तमान समय खेती और खेती से जुड़े व्यवसायों को अपनाने के लिए सबसे उचित है। जहाँ हर व्यवसाय लोगों से भरा हुआ है वहीं भारत के युवाओं और युवतियों के लिए यह  व्यवसाय एक उज्जवल भविष्य दिखता है।
”इस क्षेत्र में संभावनाओं की भरमार हैं। लोग भोजन करना नहीं छोड़ सकते, ये जीवनयापन के लिए सबसे अहम है।”- अंकिता

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