भारत के कृषि वैज्ञानिक के.के सुब्रमणि का बड़ा आविष्कार, देश में पपीता उत्पादन को देगा बड़ा आयाम

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A majority of Indian farmers grow the Red Lady Dwarf variety, which is also known as the ‘Taiwan 786’ papaya, due to its exceptional quality and long shelf life.

The plant takes only eight months to fruit, with the total yield reaching 60 kg per plant. The pear-shaped, yellow coloured fruit remains in excellent condition, 15 days from harvest. Interestingly, Indian farmers pay Rs 3,00,000 for a kilo of seeds, numbering around 48,000 pieces.

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The annual world production of the fruit that originated in southern Mexico and Costa Rica is estimated at 6 million tonnes, of which India’s share is 3 million tonnes.

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Of the 12 varieties grown in India, RLD has the largest area under cultivation. Cultivated in the States of Andhra Pradesh, Karnataka, Gujarat, Orissa, West Bengal, Assam, Kerala, Madhya Pradesh and Maharashtra, India exports papaya mainly to the Gulf Nations. According to this report (http://www.infodriveindia.com/) in 2016, India imported papaya seeds worth around Rs 5.6 crores.

 

“2,000 kg of seeds worth several crores have been imported in the last 30 years,” says Subramani (57), a plant breeder of repute who has worked with national and international seed companies.

 

जब हमने अम्बिका सीड्स क. से बात की तो हमें पता चला की

250-300 ग्राम RLD बीज से हम 1 हेक्टेयर में 1000-1100 पेड़ लगा सकते है। जिसमे कुल मिला कर करीब-करीब 12000-13000 किलो पपीता उत्पाद होता हैं। 1 किलो RLD बीज से हम लग भग 7.25 अकड़ में खेती कर सकते है। तो 3000-3300 तक पौधे लगाए जा सकते है, जिसका मतलब है की 36000-40000 किलो तक का फसल उपजाया जा सकता है। जिससे लगभग 650,000 रुपये की कमाई हो सकती है।

कर्नाटक के मांड्या जिल़े के सुब्रमणि का ऐग्रीमा बायोसाइंस कंपनी ने पपीते की रेड लेडी ड्वार्फ़ (आरएलडी) प्रजाति के बीजों के जगह पर इस वैराएटी के ही एफ़-1 हाइब्रिड बीज तैयार किया है। आपको बता दें कि पपीते की 12 मुख्य प्रजातियों में से इस वैराएटी का उत्पादन भारत में सबसे अधिक होता है।

अभी तक भारत इन बीजों के आयात से मिला पैसा खर्च कर रहा है। केके सुब्रमणि द्वारा विकसित बीज से हर साल देश के करोड़ों रुपए बच सकते हैं।

57 साल के सुब्रमणि के मुताबिक पिछले 30 सालों में भारत ने 2000 किलो तक पपीते के बीज आयात किए। जिस पर सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च हुए।

सुब्रमणि द्वारा विकसित बीजों की वजह से देश को बड़ा फायदा होगा। ऐग्रीमा बायोसाइंस, पपीते और मैरीगोल्ड (गेंदे के फूल) की अलग-अलग प्रजातियों के किफ़ायती बीज विकसित करने का काम कर रही है।

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                                           अच्छी किस्म का पपीता

आरएलडी के हाईब्रिड बीज की खास बातें

सुब्रमणि द्वारा विकसित आरएलडी के हाईब्रिड बीज की कई और ख़ासियतें भी हैं। इनकी मदद से पपीते के पौधे को सिर्फ़ 8 महीनों में फलदार बनाया जा सकता है।

ये फल कटाई के बाद भी 15 दिनों तक ताज़े बने रहते हैं। भारत में पिछले 2 दशकों से लगातार पपीते की अलग-अलग प्रजातियों (ब्रीड) के उत्पादन में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

केके सुब्रमणि पिछले कई सालों से इस क्षेत्र में काम कर रहे है। उनकी कंपनी ने मैरीगोल्ड और पपीते के एफ-1 बीजों की एक रेंज विकसित की है, जो हमारे देश और उसके आस-पास के देशों के वातावरण के हिसाब से बिल्कुल सही हैं।

उन्होंने बताया कि प्रोडक्ट को मार्केट में लाने से पहले उसे मौसम की अलग-अलग परिस्थितियों में जांचा जाता है। ताकि लगातार अच्छी फसल को सेलेक्ट किया जा सके।

 

            red lady papaya seeds

सुब्रमणि ने बनाया भारत को नंबर 2

आपको एक अहम बात बता दे कि पूरी दुनिया में हर साल 6 मिलियन पपीते की उपज होती है, जिसमें से अकेले भारत की ही हिस्सेदारी आधी यानी 3 मिलियन टन है।

भारत को यह मुकाम हासिल हुआ है देश के जाने माने कृषि वैज्ञानिक सुब्रमणि की खोज की वजह से। वह कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सीड कंपनियों में काम कर चुके हैं। उन्होंने सीके सीड्स ऐंड सीडलिंग्स प्राइवेट लि. नाम की कंपनी स्थापित की थी, जिसे बाद में फ्रांस की लीमाग्रेन (विलमोरी) कंपनी ने खरीद लिया। सुब्रमणि भारत सरकार के सलाहकार भी हैं।

250-300 ग्राम RLD बीज से हम 1 हेक्टेयर में 1000-1100 पेड़ लगा सकते है। जिसमे कुल मिला कर करीब-करीब 12000-13000 किलो पपीता उत्पाद होता हैं। 1 किलो RLD बीज से हम लग भग 7.25 अकड़ में खेती कर सकते है। तो 3000-3300 तक पौधे लगाए जा सकते है, जिसका मतलब है की 36000-40000 किलो तक का फसल उपजाया जा सकता है। जिससे लगभग 650,000 रुपये की कमाई हो सकती है।

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किन किन राज्यों में पपीता उत्पाद भारी मात्रा में हो रहा है

भारत में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पपीते की अलग-अलग क़िस्मों को भारी मात्रा में उपजाए जाते है। इन्हें मुख्य रूप से खाड़ी देशों को निर्यात किया जाता है

पपीता एक ऐसा फल है जो आपके घर और ऑफिस के आसपास बहुत ही आसानी से मिल जाता है। अगर आपके घर के आगे या पीछे 2-3 फीट की जमीन है तो आप भी इसका पेड़ लगा सकते हैं।

फायदे

1. वजन घटाने में
एक मध्यम आकार के पपीते में 120 कैलोरी होती है ऐसे में अगर आप वजन घटाने की बात सोच रहे हैं। तो अपनी डाइट में पपीते को जरूर शामिल करें इसमें मौजूद फाइबर्स वजन घटाने में मददगार होते हैं।

2. रोग प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में
रोग प्रतिरक्षा क्षमता अच्छी हो तो बीमारियां दूर रहती हैं। पपीता आपके शरीर के लिए आवश्यक विटामिन सी की मांग को पूरा करता है। ऐसे में अगर आप हर रोज कुछ मात्रा में पपीता खाते हैं। तो आपके बीमार होने की आशंका कम हो जाएगी।

3. आंखों की रोशनी बढ़ाने में
पपीते में विटामिन सी तो भरपूर होता ही है। साथ ही विटामिन ए भी पर्याप्त मात्रा में होता है। विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ ही बढ़ती उम्र से जुड़ी कई समस्याओं के समाधान में भी कारगर है।

4. पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में
पपीते के सेवन से पाचन तंत्र भी सक्रिय रहता है। पपीते में कई पाचक एंजाइम्स होते हैं साथ ही इसमें कई डाइट्री फाइबर्स भी होते हैं। जिसकी वजह से पाचन क्रिया सही रहती है।

5. पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द में
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान दर्द की शिकायत होती है। उन्हें पपीते का सेवन करना चाहिए। पपीते के सेवन से एक ओर जहां पीरियड साइकिल नियमित रहता है वहीं दर्द में भी आराम मिलता है।

6. कोलेस्ट्रॉल कम करन में सहायक
पपीते में उच्च मात्रा में फाइबर मौजूद होता है। साथ ही ये विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भी भरपूर होता है। अपने इन्हीं गुणों के चलते ये कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में काफी असरदार है।

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