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योगी के गढ़ उत्तर प्रदेश में इजात हुई धान की इस किस्म से प्रति किलो एक कुंतल होती है पैदावार

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योगी के गढ़ उत्तर प्रदेश में इजात हुई धान की इस किस्म से प्रति किलो एक कुंतल होती है पैदावार

हर साल हमारे देश में मौसम के मार की वजह से करोड़ो रुपये की फसलें बरबाद हो जाती है। अगर मौसम से फसलें बच भी जाएं तो रोगों के कारण देश के किसानों कि खून-पसीने की मेहनत मिट्टी में मिल जाती है।

बहुत समय से इस समस्या का हल निकलना इस लिए भी मुश्किल हो रहा था, क्योंकि भारत एक बहुत बड़ा देश है, जहाँ अलग-अलग जलवायु क्षेत्र हैं। जिसकी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग किस्म के बीजों की ज़रूरत पड़ती है।

लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने शुष्क सम्राट नामके धान के बीज का आविष्कार किया जिसपर न ही मौसम की मार का न ही रोगों का कोई असर होता है। जिसका मतलब है कि शुष्क सम्राट धान के पैदावार पर किसी चीज़ का कोई असर नहीं पड़ता। यहीं कारण है कि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र, चंदौली व मिर्जापुर के किसानों के लिए धान की यह किस्म वरदान साबित हो रही है।

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उत्तर प्रदेश के जमगांई गाँव के किसान जितेंद्र पाठक का कहना है कि, ”पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां सिंचाई में दिक्कत होती है। हम लोग अपनी ज्यादातर खेती भगवान भरोसे ही करते हैं। कई वर्षों से सूखे के कारण धान की खेती में नुकसान ही हो रहा था फिर अधिकारियों द्वारा बताए गए शुष्क सम्राट धान को लगाया जो कम पानी में भी हो जाता है। इस धान की पैदावार भी अच्छी होती है। कम समय में तैयार होने के कारण दाम भी अच्छा मिल जाता है।”

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एक किलो बीज से होती है एक कुंतल धान की पैदावार 

इन छेत्रों के बड़े-बड़े किसान जिनके पास कई एकड़ की ज़मीनेें हैं वे इसी किस्म के धान कि खेती करते हैं। ऐसे ही एक किसान हैं आशुतोष पांडे। जिनके के पास 40 एकड़ से ज़ादा के खेत हैं जिनमें वह शुष्क सम्राट धान की खेती करते हैं।

वह कहते हैं, ‘नहरों पर पानी समय पर नहीं आता है, जब भी आता है तो फसल में पानी लगा देता हूं। ये फसल बहुत ही कम पानी में हो जाती है। लगभग एक किलो धान के बीज में फसल तैयार होने के बाद एक कुंतल की पैदावार हो जाती है।’

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प्रति हेक्टेयर 40 से 45 कुंतल की पैदावार

कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर श्री राम सिंह बताते हैं, ”किसानों को शुष्क सम्राट की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस बार भी अच्छी बरसात नहीं हुई तो किसान शुष्क सम्राट धान की रोपाई कर उत्पादन ले सकते हैं। इसके अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। धान की नर्सरी डालने का सबसे उपयुक्त समय भी जून का प्रथम सप्ताह है।’’

 

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रोगों से नहीं पड़ता पैदावार पर कोई भी असर 

यही वजह है कि कम बरसात व सूखा में भी शुष्क सम्राट धान की वजह से  किसान मालामाल हो रहे हैं। यही नहीं, शुष्क सम्राट धान की फसल  90 से 95 दिनों में तैयार हो जाती है। पठारी जिले मीरजापुर, सोनभद्र व चंदौली के लिए यह प्रजाति वरदान साबित हो रही है।

जादातर किसानों का यही मानना है कि किसानों को भी अधिक से अधिक इसी प्रजाति के बीज का रोपण करना चाहिए जिससे उन्हें अधिक से अधिक मुनाफा हो सके।

 

 

पठारी क्षेत्रों में शुष्क सम्राट धान का बीज मौजूदा समय में सबसे ज्यादा कारगर है। इस धान की खासियत यह है कि खेत में थोड़ी नमी बनी रहे तो भी यह बीज भरपूर पैदावार देता है।गोरखपुर कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख कृषि वैज्ञानिक संजीत कुमार कहते हैं, ‘हर किसान को अपने क्षेत्र के हिसाब से ही धान की किस्मों का चुनाव करना चाहिए।

उत्तर प्रदेश  में अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी और वातावरण सभी एक तरह का नहीं है, इसी कि वजह से कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा मिट्टी और वातावरण के हिसाब से बीज का संशोधन किया जाता है।’

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शुष्क सम्राट धान की मुख्य विशेषताएं

  1. फसल पर सूखे या रोगों का असर नहीं पड़ता बस खेत में नमी बनी रहे तो भी फसल तैयार हो जाती है
  2. प्रति हेक्टेयर में 40 से 45 कुंतल तक उत्पादन बड़े ही आराम से हो जाता है
  3. फसल को तैयार होने में सिर्फ 90 से 95 दिनों का समय लगता है
  4. इस धान कि नर्सरी डालने का समय जून का प्रथम सप्ताह में होता है
  5. वहीं इसकी रोपाई का समय 25 जून से 15 जुलाई के बीच का होता है

 

कृषि वैज्ञानिक साउथ कैंपस के डॉक्टर श्री राम सिंह का कहना है कि, ‘फसल पर रोग का प्रकोप बहुत कम होता है। अगर खेत में सिर्फ नमी भी बनी रहे तो भी उत्पादन भरपूर होता है।’

 

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