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भोपाल के एक किसान ने बदली पूरे गांव की किस्मत, प्रति एकड़ 3 लाख रूपए के मुनाफे वाली सेवंती फूल की खेती से गांव करता है करोड़ों की कमाई

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सेवंती की ख़ुशबू से महका गुनखेड़ा, फ़ूलों की खेती करके बन गए करोड़पति, सालाना कमा रहे है 2 करोड़

भोपाल का नाम सुनते ही आपको शोले का सूरमा भोपाली सबसे पहले ज़रूर याद आता होगा लेकिन आज आपको भोपाल याद करने का एक और कारण मिल जायेगा  भोपाल, गुनखेड़ा गांव के एक किसान हनुमंतराव कनाठे ने सेवंती के फूलों की खेती करके पूरे गांव कि किस्मत बदल दिया।

भोपाल के गाँव गुनखेड़ में हर साल परम्परागत खेती किसी ना किसी वजह से बर्बाद हो रही थी। किसान मौसम की मार से भी बेहाल थे। कोई और खेती करने के बारे में सोच तक नहीं पा रहा था।

255 घरों और 1173 लोगों की आबादी वाले इस छोटे से गांव के किसानो की किस्मत बदलनी तब शुरू हुई, जब गांव के एक किसान को नए तरीके से खेती करने का विचार आया। जी हां, उस किसान का नाम है हनुमंतराव कनाठे, जिन्होंने अकेले ही पूरे गांव के किसानों को एक नई राह दिखाई। उन्होंने अपने साथ-साथ पूरे गांव को आधुनिक तरीके से फूलों की खेती शुरू करनी सिखाई।

संवेती की खेती
                                                             संवेती की खेती

55 हज़ार से 2 करोड़ तक का सफ़र कैसे हुआ तय:-

पहले ही साल में हनुमंतराव की मेहनत रंग लाई और मात्र 3 तीन हजार रुपए खर्च कर 55 हजार रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया। सेवंती के फूलों से हुए इस मुनाफे से खुश होकर हनुमंतराव ने अगले साल दुगने खेत में सेवंती के फूलों की खेती की। वर्तमान में लगभग 2.5 एकड़ जमीन में सेवंती, रजनीगंधा, गेंदा, डेजी और अन्य फूलों की खेती कर लाभ कमा रहे हैं।

लागत और लाभ:-

साल 2016-17 में होर्टीकल्चर विभाग से संरक्षित खेती योजना का हनुमंतराव ने लाभ लिया। इसमें हनुमंत ने विभाग से 4 लाख 67 हजार 500 रूपये की आर्थिक मदद ली। इस पैसे से 1 हजार वर्गमीटर (1 चौथाई एकड़) में पॉली हाउस बनाकर सेवंती की खेती करना प्रारंभ किया।

1 हजार वर्गमीटर के पॉलीहॉउस में लगभग 18-20 क्विंटल सेवंती फूल का उत्पादन हो रहा है। पॉली हाउस में उत्पादित फूल की गुणवत्ता अच्छी होने के कारण फूल औसतन 250 रूपये प्रति किलो के मूल्य पर आसानी से बिक जाते हैं।

अगर खुले खेत में इस फसल की बात करें तो, खुले खेत में 1.5 एकड़ में सेवंती की खेती से लगभग 30 क्विंटल फूल का उत्पादन हो रहा है। इसे औसतन 125 रूपये किलो कीमत पर नजदीकी बाजार और नागपुर बाजार में बेचा जा रहा है।

वर्तमान में सेवंती और अन्य फूलों की खेती से 2.5 एकड़ जमीन पर उन्हें हर साल 7,50,000 से 8,00,000 रूपये तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो रहा है।

 

खेती के उन्नत तरीके सीखने के लिए नीदरलैंड का दौरा किया:-

हनुमंतराव कनाठे की खेती और समाज के विकास को देखते हुए होर्टीकल्चर विभाग ने साल 2016-17 में उन्हें हॉलैंड- नीदरलैंड की विदेश यात्रा पर भी भेजा गया। विदेश दौरे में उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला और उन्होंने भी बड़ी लगन मेहनत के साथ उस गुर को हासिल किया और दूसरे किसान भाइयों को भी यह गुर सिखाया।

नतीजा यह निकला की आज के समय में पूरा गांव 70 एकड़ में सिर्फ फूलों की खेती कर रहा है। इससे हर साल किसानों को 2 करोड़ रुपए की आमदनी हो रही है। किसानों के लिए सेवंती के फूलों की खेती वरदान साबित हो रही है।

कनाठे का मानना है कि नई पीढ़ी के किसानों को अब खेती की ओर जाने का प्रयास करना चाहिए और उन्हें इस गुर को सीखना चाहिए।

गांव में हुआ गज़ब का बदलाव :-

पिछले 10 सालों में सेवंती की खेती के कारण गुनखेड़ गांव के लोगों के रहन-सहन में भी बहुत सुधार हुआ है। आज के समय में गांव में लगभग सभी किसानों के पक्के मकान हैं, सभी अपने बच्चों को जिले के निजी स्कूलों में पढ़ाने के लिए भेज रहे हैं। साथ ही साथ सभी आधुनिक सुख-सुविधा के साधन गांव में ही उपलब्ध है। हम यह कह सकते है कि आधुनिक खेती के तकनीकों को अपनाने के बाद गुनखेड़ा गांव ख़ुशहाल और सुखी हो गए है।

 

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