LOADING

Type to search

Editorial

‘किसान छुट्टी पर’ आंदोलन को मीडिया उद्योग पार्टी विरोध में बदलने के चक्कर में है। – अभिमन्यु प्रताप सिंह, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ Editorial

Share

Hits: 124

Editorial Article Written by Abhimanyu Pratap Singh, District President, Bhartiya Kisan Sangh, Badaun 

खेती की ख़बरें अब मोबाइल पर पाना और भी हुआ आसान, डाउनलोड करें किसानख़बर की नई एप जिसमें है किसानों की लगभग हर समस्या का समाधान

Note:- यह संपादकीय है जिसे बिना काट-छांट के पब्लिश किया गया है। अगर आप भी ऐसे आर्टिकल या खेती से जुड़ी किसी भी अच्छी जानकारी पर लेख लिखना चाहते हैं तो हमको kisankhabar@gmail.com या फिर फेसबुक पेज या फिर फेसबुक किसानखबर ग्रुप  पर संपर्क कर सकते हैं।

किसानों का आंदोलन चल रहा है। किसान भाई भी कुछ हद तक लामबंद हो रहे है। पर किसानों की समस्या के निस्तारण पर जब भी बात हो तो पता होना चाहिए कि किसानों की समस्या असल में है क्या। किसानों की असल समस्या कर्ज नहीं बल्कि फसलों का लाभप्रद मूल्य है।

दूसरी बात यह है कि उन्हें अपनें मित्र और शत्रु की पहचान करनी होगी। किसानों की लड़ाई व्यवस्था व सरकार से है।लेक़िन कुछ मीडिया उद्योग इसे पार्टी विरोध में बदलने के चक्कर मे है। क्योंकि उसमें उनके हित छुपे हुये हैं।

Abhimanyu Pratap Singh, Rashtriya Kisan Sangh

Rashtriya Kisan Sangh program






आप सोचिये की अगर चीनी 40 या 50 रु बिकने लगे या प्याज़ 60 70 रू बिकने लगे। तो ये ही भेड़िये हल्ला मचाना शुरू कर देंगे। अब बतायें कि अगर कुछ महीने 20 रू बिकने वाला प्याज़ अगर 70 रू बिके तो आप पर कितने रु का फर्क पड़ेगा। शायद 60या 70 रुपये प्रति माह।लेकिन कभी फसलों के मूल्यों को लेकर कभी किसी बुद्धिजीवी को इस tv डिबेट करते सुना है। सुनेंगे भी नही।
सभी पार्टियों की सरकारें कभी न कभी कहीं न कहीं रही हैं उन्होंने किसानों के उचित मूल्य देने के बारे में क्या किया। और कर्ज़ माफ करने से क्या किसानों को लाभ हुआ। किसान की फसल का मूल्य तय करते समय किसानों की लागत का क्या पैमाना है इस पर कोई बहस है क्या? अब बात डीजल के मूल्य की जब कच्चे तेल के दाम कम थे तब विभिन्न प्रकार के टैक्स लगा कर सरकार ने उस पर काफी लाभ कमाया लेकिन जब दाम बढ़ने लगे तो कम करना चाहिए।लेकिन सरकार व्यापार कर रही है।




हमारा संगठन तो कहता है डीजल 100 रु लीटर बिके तो भी बिरोध नही करेगा लेकिन हमारे उत्पादन का मूल्य लाभकारी होना चाहिए। लेकिन किसान को किसी भी कारण से अगर सही मूल्य मिले तो मीडिया कर्मी माइक ले कर घर घर घूम कर किसानों के कारण आयी हुई प्रलय को कवरेज करते दिखाई दे निकलेंगें।
अब बात करते है कि फसल की कीमत होनी कितनी चाहिए तो केवल दूध और गेहूँ के आंकड़ा पेश करने की कोशिश करता हूँ। 1 एकड़ खेत का किराया 20000 रुपये खेत की जुताई 5000 पानी 6000 बीज 1500 खाद 2000 रखवाली या देखरेख 4 महीनों की 1ooo0 रुपये कटाई उठाई5000रुपये टोटल 44500 रुपये।जबकि नराई और दवाई इसमे शामिल नही है।
अब 5 एकड़ में गेहूँ पैदा होता 15 से 20 कुंतल जिसका बाजार भाव हुआ 30000 हज़ार रुपये और जो लागत लगाई है। उस पर ब्याज अलग। तो साहब इसी से उसे बच्चे पालने हैं। 5 एकड़ का कुल उत्पादन आपके बिजली के बिल से भी कम है। इसी प्रकार दूध का भाव 150 रुपये प्रति किलो होना चाहिये। लेकिन अगर हो गया तो मीडिया की क्या भूमिका होगी।




जानना चाहतें हैं तो कभी अमूल के दूध के दाम बड़े हों तो प्रतिक्रिया पर ध्यान दे। गांवों में आजकल ढूध के भाव 20 किलो है क्योकि ये आपको तय करने है और किसान का उत्पादन करना है लेकिन बोतल बंद पानी उत्पादक ही तय करेगा और दूध से महंगा पानी बिकता रहेगा और वो किसी को महगें नही लगेंगें। मैंने पहले ही लिखा है हमें अपने शत्रु और मित्रों का ध्यान रखना होगा।
हमारी लड़ाई सरकार से है तंत्र से है लोग हमें किसी पार्टी के समर्थन या विरोध के लिये उकसाएंगे लेक़िन हमारा ध्यान केवल लाभकारी मूल्य पर रहना चाहिए चाहे गांव बन्द करना पड़े या शहर संघर्ष करते रहना है जब तक सारी पार्टियां इकठ्ठे हो कर लाभकारी मूल्यों का प्रस्ताव पास नई करती। जब तक दुखी किसान रहेगा धरती पर तूफान रहेगा।

क्या आपको KisanKhabar.com की तरफ से खेती की अच्छी ख़बरें WhatsApp पर मिलती हैं?

View Results

Loading ... Loading ...

 

अगर आप वॉट्सअप पर खेती की अच्छी ख़बरें रोज चाहते हैं, तो यहां क्लिक करके WhatsApp Group ज्वाइन करें।

स्टोरी पर कृप्या कॉमेंट करें

Tags:
Vandana Singh

वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

    1

3 Comments

  1. Like August 28, 2018

    Like!! Thank you for publishing this awesome article.

  2. It is in reality a great and useful piece of info. Thanks for sharing. 🙂

  3. ปั้มไลค์ October 5, 2018

    I believe you have noted some very interesting details, thankyou for the post. 🙂

WhatsApp chat