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एक भारतीय ने बनाई खेती के 3 बड़े काम करने वाली कमाल की मशीन, 100 मज़दूरों का काम अकेले करती है यह मशीन, कीमत है सिर्फ 18000 रु.

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प्याज की बुवाई किसान के लिए काफी थकाने वाला काम है। जिन किसानों के पास ज़्यादा ज़मीन नहीं होती, उनके लिए तो ज़्यादा मुश्किल नहीं आती, लेकिन जो किसान बड़ी ज़मीन पर खेती करते हैं, उन्हें काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा प्याज की बुवाई बिना किसी मशीन के हाथ से करनी पड़ती है, जिसमें काफ़ी मेहनत और बहुत ज़्यादा वक्त बर्बाद होता है।

ऐसे में इस समस्या से निजात पाने के लिए पेशे से किसान और खोजकर्ता पी एस मोरे ने एक सस्ती और अर्ध स्वचालित (semi automatic) ट्रांसप्लांटर मशीन बनाई है जिससे आसानी से प्याज की बुवाई की जा सकती है।

मोरे ने किसानों के लिए छोड़ा अरबपति बनने का सुनहरा मौका

किसी को भी हैरान कर देने वाली सबसे बड़ी बात ये कि मोरे इस मशीन की खोज के पेटेंट के एकाधिकार का इस्तेमाल करके अरबपति बन सकते थे लेकिन उन्होंने किसानों की भलाई के लिए अपना स्वार्थ त्याग दिया और पेटेंट होने के बावजूद सभी को इसे बनाने और बेचने की छूट दे दी।

यहां आपको बताना जरूरी है कि पेटेंट करवाने से क्या होता। अगर मोरे पेटेंट के एकाधिकार का इस्तेमाल करते तो वो इस मशीन को बनाने और पूरी दुनिया में किसी भी कीमत पर बेचने के लिए अगले 20 साल तक के लिए अधिकृत थे।

इनके अलावा कोई और इस मशीन को अगले 20 साल तक के लिए नहीं बना पाता। यानी वो अरबों रूपया कमा सकते थे, लेकिन पीएस मोरे ने इस मशीन की नकल करने और इस तकनीक के जरिए दूसरी मशीन बनाने की भी लोगों को छूट दी है, ताकि इसके जरिए किसानों को सस्ते में यह मशीन मिल सके।

हालांकि मोरे इस मशीन का पेटेंट (कॉपीराईट) नहीं कराना चाहते थे, लेकिन नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने भविष्य में इस टेक्नॉलोजी का गलत इस्तेमाल करने से रोकने के लिए 2008 में इसका पेटेंट करा लिया।

हालांकि तब भी इसकी कॉपी तैयार करने और तकनीक का उपयोग करने पर पाबंदी नहीं लगाई गई है। तकनीक के खुले उपयोग का प्रोपर्टी राइट एक्ट में ऐसा उदाहरण शायद ही कोई और होगा।

मशीन के फ़ायदें

4 मजदूरों और 1 ड्राइवर की मदद से ये मशीन प्रतिदिन 2.5 एकड़ में प्याज की बुआई कर देती है। जबकि इस मशीन के बिना पारंपरिक तरीक से बुआई करने पर करीब 100 मजूदरों की जरूरत पड़ती है। यानी मशीन की लागत का पूरा पैसा 1 या 2 दिन की बुआई से ही वसूला जा सकता है। इसके बाद आप इस मशीन को दूसरों को भी किराए पर देकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

इस मशीन के जरिए यांत्रिक निराई भी की जा सकती है, जिससे निराई पर खर्च की बचत होती है।

क्या कीमत है इस मशीन की

उर्वरक ड्रील के साथ इस मशीन की कीमत 30 हजार रूपये है जबकि बगैर इस ड्रील के ये 18 हजार रूपये तक के खर्च में तैयार हो जाती है।

कैसे काम करती है मशीन 

इस मशीन को 22-35 HP यानी हार्सपावर (Horsepower) के ट्रैक्टर में लगे 3 प्वाइंट के जरिए जोड़ा जा सकता है। खेतों में ट्रेक्टर की गति 1 से 1.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रखी जाती है। जब ट्रैक्टर आगे बढ़ता है तो स्कैल सिस्टम (Scale System) यानी मापक प्रणाली के जरीए फर्टीलाइजर को ट्यूब में भेजती है।

इस मशीन में एक जुताई का फ्रेम, फर्टीलाइज़र बॉक्स, उर्वरकों के बहने के लिए नलियां, बीज पौधों को रखने के लिए ट्रे, दो पहिए, खांचा खींचने वाला, बीज पौधों को नीचे ले जाने के लिए फिसलन प्रणाली और चार लोगों तक के बैठने की जगह होती है। मशीन से पौधारोपण करने से पहले खेत की जुताई जरूरी होती है।

एक क्यारी से दूसरी क्यारी के बीच की दूरी 7 इंच की होनी चाहिए। जबकि 2 पौधों के बीच की दूरी 3.5 इंच की दूरी होनी चाहिए।

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