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दीपिका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा अपने Lips पर यह खास मिर्ची लगाएं बिना नहीं निकलती घर से बाहर, इस खास मिर्ची से हो रहे हैं बनारस के किसान मालामाल

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ख़बर की हेडलाइन पढ़कर आप चौंकिए नहीं क्योंकि यह खास मिर्ची (paprika chilli) सिर्फ फिल्म अभिनेत्रियां ही नहीं बल्कि आपकी पत्नी या Girl Friend भी लगाती है। दरअसल ख़बर यह है कि भारत के वैज्ञानियों ने मिर्ची की एक ऐसी किस्म को खोजा है जिसका इस्तेमाल Lipstick बनाने में होता है। इसके बिना Lipstick बन नहीं सकती। अच्छी बात यह है कि इसकी डिमांड बहुत ज्यादा है जबकि सप्लाई बहुत कम। ऐसे में आप भी इसकी खेती से मालामाल हो सकते है। इसलिए इस ख़बर को पूरा और ध्यान से पढ़िए।
आज हम आपको मिर्ची की ऐसी प्रजाति के बारे में बताने जा रहे हैं जो जिसके इस्तेमाल के बिना कई कॉस्मेटिक सामान बन ही नहीं सकते जैसे कि Lipstick और नेल पॉलिस।
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर IIVR-Indian Institute of Vegetables Research ) ने मिर्च की एक ऐसी प्रजाति विकसित की है, जिसमें तीखापन एकदम नहीं होता। इस वजह से इसका इस्तेमाल लिपस्टिक (Lipstick), नेल पॉलिस (Nail Polish), कॉस्मेटिक सामान, दवाओं और खाने के कई सामान बनाने में बड़े स्तर किया जाता है।
paprika chilli farming
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कब विकसित हुई यह मिर्ची

बनारस स्थित IIVR संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साल 2002 में पपरिका मिर्च (Paprika Chilli) पर शोध किया जो कि आमतौर पर सिर्फ ज्यादा गर्मी वाले राज्यों में होती है।
गर्म जलवायु के कारण पपरिका मिर्च (Paprika Chilli) तीखी हो जाती है, लेकिन राजेश कुमार ने इस मिर्ची को तीखा नहीं होने दिया। इस मिर्ची पर 4 सालों तक कृषि विश्वविद्यालय में टेस्टिंग हुआ। टेस्ट की सफलता के बाद इस राज्य सरकार के पास भेज दिया और फिर राज्य सरकार ने इसे काशी सिंदूर के नाम से बाजार में बिकने के लिए रिलीज कर दिया, जबकि IIVR संस्थान इसे IIVR 535 के नाम से इस्तेमाल करती है।

सबसे निराली मिर्ची क्यों है यह

भारत में यह एक मात्र मिर्ची है जिसकी पूर्वांचल राज्यों (UP और बिहार के कुछ इलाके) में काफी पैदावर की जा रही है। IIVR 535 किस्म की मिर्ची का इस्तेमाल रंगों को बनाने के लिए किया जा रहा है। इस मिर्ची की कई रंगों में पैदावर की जा सकती है। लाल, भूरा, नारंगी, हरा जैसे रंगों की मिर्ची की पैदावर आसानी से की जा सकती है।
इस मिर्च से ओलेओरेसिन तेल (Oleoresin Oil) भी निकाला जाता है जिससे रंग बनाए जाते हैं। इन रंगों का ही इस्तेमाल Lipstick और नेल पॉलिस जैसे ब्यूटी प्रॉडक्ट बनाने में होता ज्यादा है।
इसके अलावा इस मिर्च से बने रंगों के इस्तेमाल से त्वाचा को नुकसान भी नहीं होता। इस मिर्च से बने सामानों की कीमत बाजार में काफी होती है और इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।
paprika chilli farming
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लागत और कमाई कितनी है

 
कॉस्मेटिक और दवाओं का बाजार कई गुना रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है जिसकी वजह से IIVR 535 मिर्ची की डिमांड दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ रही है।
IIVR संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. राजेश कुमार के मुताबिक इस मिर्ची की पैदावर 60 से 80 कुंटल प्रति हेक्टेयर किया जा सकता है यानी प्रति एकड़ 24 से लेकर 32 कुंटल।
जबकि इस पर कमाई प्रति एकड़ डेढ़ लाख रुपये आराम से हो जाती है।

कैसे करे पपरिका मिर्च (Paprika Chilli ) की खेती

1. IIVR से बीज लेकर सितम्बर के दूसरे हफ्ते तक नर्सरी तैयार कर लें।
2. 20-25 दिन बाद खेत में पौधों का रोपण करें।
3. खेतों में खाद्य पदार्थ उसी तरह डालें जिस तरह बाकी मिर्चों की खेती में डालते हैं।
4. इसके उगने का समय सामान्य मिर्च की तरह होती है।
5. मिर्च को सूखाकर बाजार में बेचने लायक तैयार किया जाता है।
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