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पहाड़ी इलाकों में होने वाली स्ट्रॉबेरी की फसल को कैसे करें मैदानी इलाकों में आसानी से, जानिए A टू Z जानकारी सिर्फ एक क्लिक पर

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पिछली ख़बर में आपने जाना कि कैसे स्ट्रॉबेरी (strawberry) की खेती से बिहार के हजारों किसान अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं और अब किसानख़बर.कॉम की इस विशेष रिपोर्ट में जानिए कि कैसे  मैदानी इलाकों में स्ट्रॉबेरी की खेती की जाती है। शुरू से अंत तक पूरी जानाकरी।
Strawberry Farming
Strawberry Farming
स्ट्रॉबेरी (strawberry) की खेती की बेसिक जानकारी
1. पौधे लगाने का समय अक्टूबर से दिसम्बर महीने तक होता है।
2. मार्च तक इसकी तु़ड़ाई का काम पूरा किया जाता है।
3. जीवाश्म युक्त हल्की दोमट मिट्टी इसके पैदावर के लिए सबसे अच्छी मिट्टी होती है।
4. मिट्टी का PH मान 5.5 से 6.5 तक होना चाहिए।
strawberry-plantation
Strawberry Plantation
मिट्टी का PH क्या होता है (Kheti main PH kaya Hota hai)
PH की फुल फॉर्म है पोटेन्षियल हाइड्रोजन। सीधी और सरल भाषा में इसका मतलब है कि मिट्टी की उर्वराशक्ति क्या है। यानी कि इसमें किसी भी फसल की पैदावार करने लायक पोषक तत्व क्या क्या है और कितनी कितनी मात्रा में है।
स्ट्रॉबेरी (strawberry) पौधा लगाने की तैयारी…
  • पौधा लगाने से पहले 20 से 25 दिन पहले जमीन की गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • जमीन की तैयारी के समय 10 से 12 टन कम्पोज, 20 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फॉस्फोरस और 15 किलो पोटाश प्रति एकड़ जमीन में मिला दें।
  • इसके बाद उठी हुई क्यारी बना लें, जिसकी चौड़ाई 1 मीटर और ऊंचाई 30 से 35 सेमी. होनी चाहिए।
  • क्यारियों के बीच की दूरी 50 सेमी.होनी चाहिए।
  • ऐसे पौधे लगाए जिसमें 4से 6 पत्तियां हों। ऐसे पौधे रोपण के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है।
  • प्रत्येक क्यारी पर पौधों की दो पंक्तिया 20 से 30 सेमी के बीच लगाई जाती हैं।
  • इस तरह से प्रति एकड़ 22 से 24 हजार पौधों की जरूरत होती है।
  • पौधे में फूल लाने के लिए 10 दिनों तक लगातार कम से कम 8 घंटे सूर्य की रोशनी होनी चाहिए।
  • इसके बाद पुआल या प्लास्टिक के पलवार की जरूरत होती है। इससे खर पतवार को कम किया जाता है। और फलों में मिट्टियां नहीं लगती हैं।
  • पौधे लगाने के बाद NPK 19;19;19 की 25 ग्राम की मात्रा प्रतिवर्ग मी. की दर से पूरे फसल में डालनी चाहिए। यह उर्वरक 15 दिनों के अंतराल में फसल में देनी चाहिए।
  • मल्टीप्लेक्स और मल्टीपोटाश भी 15 दिनों के अंतराल में देनी चाहिए।
  • फल को पाले से बचाने के लिए दिसम्बर माह में पॉलीटनेल का उपयोग करना चाहिए।
  • फलों को बढ़ने के लिए न्यूनतम 15 डिग्री से अधिकतम 35 डिग्री तापमान होना चाहिए।
  • फल लगने के बाद हर हफ्ते केल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव 2 किलो प्रति एकड़ की दर से करनी चाहिए।
सिंचाई विधि
स्ट्रॉबेरी के पौधों के जड़ों की लम्बाई अधिक नहीं होती, इसलिए इसमें नियमित रूप से सिंचाई की जरूरत होती है। अगर संभव हो तो, स्ट्रॉबेरी की सफल खेती के लिए सिंचाई की ड्रीप प्रणाली विधि का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि स्ट्रॉबेरी के पौधे की जड़ें बहुत नाजुक होती हैं और तेज पानी के बहाव में इसका पौधा उखड़ सकता है।
  1. क्यारी बनाने के बाद पौधों में पहले ड्रीप लगा देना चाहिए।
  2. पौधे लगाने के तुरंत बाद ही पहली सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  3. उसके बाद तीन-तीन दिनों के अंतराल में सिंचाई करनी जरूरी होती है।
  4. और जब फल लगने शुरू हो जाएं तो दो-दो दिन के अंतराल में सिंचाई करनी चाहिए।
  5. सिंचाई सही तरीके और सही अंतराल में की कई तो स्ट्रॉबेरी के आकार काफी अच्छे होते हैं।
स्ट्रॉबेरी में लगने वाले कीट और उसके बचाव
  1. लाही  (लाही से बचाव के लिए मेटासिस्टॉक्स 1 मिली. प्रति लीटर पानी में डालकर तीन दिनों के अंतराल में छिड़काव करना चाहिए।)
  2. थ्रिप्स ( कोनफीडोर 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए)
  3. लाल मकड़ी ( सल्फर, 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए)
स्ट्रॉबेरी में होने वाले रोग और उसके बचाव
  1. ग्रे मोल्ड ( डाईथेन M 45 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए।)
  2. एन्थ्रेकनोज (केपटोफ 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें)
स्ट्रोबेरी के किस्म
स्वीट चार्ली, फेस्टिवल, चांडलर, कामा रोजा, विंटर डॉन, फ्लोरिना प्रमुख रूप से स्ट्रॉबेरी के किस्म हैं। उत्तरी बिहार में फेस्टिवल वैरायटी प्रमुख रूप से पैदावर की जाती है।
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