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केले की किस वैरायटी की खेती में कमाए 80 हजार की लागत पर 3 लाख रुपये, जाने केले की खेती की A To Z जानकारी

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आज हम आपको केले की खेती के पूरी जानकारी देने जा रहे हैं । वैसे तो केले की खेती लगभग 4000 पहले मलेशिया में शुरु हुई, लेकिन आज के दौर में भारत, विश्व का सबसे अधिक केला उत्पादक देश बन गया है। भारत में केले की खेती खासतौर पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, बिहार, कर्नाटक और असम जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा होती है। केला को पौष्टिक रूप से सोने की खान माना जाता है। यह दिमाग और शरीर दोनों के लिए अच्छा रहता है।

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आइए जानते हैं केले की खेती से जुड़ी जानकारी:-

लागत और कमाई

  1. केले की खेती में प्रति एकड़ 30 से 40 हजार रुपये की लागत आती है।
  2. एक एकड़ में 1500 पौधे लगाए जाते हैं। Triangular pattern में 3000 और square pattern में 4000 पौधे लगाए जा सकते हैं।
  3. इससे औसतन 200 क्विंटल प्रति एकड़ केले का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। कही कहीं पर यह उत्पादन 300 क्विंटल तक चला जाता है।
  4. इसे मंडी इसके रेट अलग अलग वैरायटी पर अलग अलग होते हैं। वैसे आमतौर पर यह 300 रूपए से 5000 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचा जा सकता है। महाराष्ट्र के जलगांव की मंडी में 2 मई 2018 को खांदेश ( Khandesh ) वैराइटी का रेट 300 रूपए प्रति क्विंटल था। जबकि केरला के आदिमाली (Adimali) मंडी में Nendra Bale वैराइटी का रेट 8 मई 2018 को 5000 रूपए प्रति क्विंटल था। इसके लिए आप नीचे दी गई मंडी के रेट की ईमेज देख सकते हैं। अगर आप देश की किसी भी मंडी में केले और बाकी किसी भी फसल के ताजा रेट्स जानना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें

नफीज नर्सरी, लखनऊ के ऑनर शाबीहुल हसन ने बताया कि केले का  उत्पादन किसान की मेहनत पर डिपेंड करता है कि किसान किस तरह से खेती कर रहा है। इसकेे साथ-साथ केले की खेती में लागत औऱ मुनाफा केले की वैरायटी पर डिपेंड करता है। बोनिया वैरायटी के केले की खेती में लागत 25 हजार रुपये के करीब आता है और उत्पादन 250 से 300 क्विंटल के करीब होता है। जो मार्केट में 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकता है।




 

वहीं,  G-5 किस्म की केले की खेती में लगभग 80 हजारा रुपये से 1 लाख रुपये की लागत प्रति एकड़ होती है और उत्पादन 400 क्विंटल प्रति एकड़ होता है।  जो मार्केट  में 700 से 1 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकता है, जिससे प्रति एकड़ लगभग 2 लाख 80 हजार से तीन लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है।

 
 
केले की खेती के लिए मिट्टी

केले की खेती के लिए जीवाश्म युक्त मिट्टी होनी चाहिए। केले के सही उत्पादन के लिए जीवाश्म युक्त दोमट  मिट्टी, मटियार दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है। यह मिट्टी इसलिए अच्छी होती है क्योंकि इसमें पानी आसानी से निकल जाता है। इसके साथ साथ मिट्टी का PH मान 6 से 7.5 होती है। PH क्या होता है यह जानने के लिए यहां क्लिक करें। 





दोमट मिट्टी क्या होती है

दोमट एक प्रकार की मिट्टी है जो फसलों के लिए अत्यन्त उर्वर (उपजाऊ)) होती है। इसमें लगभग 40% सिल्ट, 20% चिकनी मिट्टी तथा शेष 40% बालू होता है। ऐसी मिट्टी अपने कुल भार का 50% पानी रोकने की क्षमता रखती है। इस मिट्टी में पोषक पदार्थों की मात्रा भी अधिक होती है।

दोमट मिट्टी में सिल्ट, बालू और चिकनी मिट्टी के अंश अलग-अलग होने से भिन्न-भिन्न प्रकार के दोमट बनते हैं जैसे बलुई दोमट, सिल्टी दोमट, चिकनी दोमट, बलुई चिकनी दोमट आदि। चिकनी मिट्टी की अपेक्षा दोमट मिट्टी में अधिक पोषक पदार्थ, अधिक नमी, अधिक ह्यूमस होता है। दोमट मिट्टी की जुताई चिकनी मिट्टी की अपेक्षा आसान होती है। इसमें सिल्टी मिट्टी की अपेक्षा हवा और पानी को छानने तथा जल-निकास की बेहतर क्षमता होती है।

दोमट मिट्टी बागवानी तथा कृषि कार्यों के लिए उत्तम मानी जाती है। यदि किसी बलुई या चिकनी मिट्टी में भी अधिक मात्रा में जैविक पदार्थ मिले हों तो उसके गुण भी दोमट जैसे ही होंगे।

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केले की प्रजाति 

केले की उन्नत प्रजाति में खाने वाले केले बसराई, ड्वार्फ, हरी छाल, सालभोग, अल्पान, रोवस्ट तथा पुवन शामिल हैं। इसके अलावा सब्जी बनाने वाले केले कोठिया, बत्तीसा, मुनथन एवं कैम्पिरगंज वैरायटी हैं।





कैसे करें केले की खेती-

  1. सबसे पहले समतल खेत की 4 से 5 बार गहरी जुताई करके मिट्टी को भुर भूरा बना लेना चाहिए, समतल खेत में लाइनों में गढढे तैयार करके रोपाई की जाती हैI
  2. खेत की तैयारी के बाद लाइनों में गढढे वैरायटी के आधार पर बनाए जाते हैं, जिसमें सब्जी बनाने वाले केले के पौधे के लिए 50cm गढ्डे की आवश्यकता होती हैं। वहीं, खाने वाले केले के पौधों के लिए 2 से 3 मीटर का गढ्डा होना चाहिए।
  3. इसके बाद 15 से 30 जून के तक केले के पौधों की रोपाई कर लेनी चाहिए।

खाद एवं उर्वरक कैसे डालें-

  1. प्रति पौधा 300 ग्राम नत्रजन 100 ग्राम फास्फोरस तथा 300 ग्राम पोटाश की आवश्यकता पड़ती है
  2. फास्फोरस की आधी मात्रा पौध रोपण के समय तथा शेष आधी मात्रा रोपाई के बाद देनी चाहिए।
  3. नत्रजन की पूरी मात्रा 5 भागो में बाँटकर अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर तथा फरवरी एवं अप्रैल में देनी चाहिए।
  4. पोटाश की पूरी मात्रा तीन भागो में बाँटकर सितम्बर, अक्टूबर एवं अप्रैल में देना चाहिए।

केले की खेती में सिंचाई

  1. केले के खेतों में नमी बनी रहनी चाहिए।
  2. पौध रोपण के बाद सिचाई करना अति आवश्यक है।
  3. गर्मियों में 7 से 10 दिन के अंदर सिंचाई करनी चाहिए।
  4. सर्दियों में 12 से 15 दिन के अंदर सिंचाई कर लेनी चाहिए।
  5. अक्टूबर से फरवरी तक के अन्तराल पर सिचाई करते रहना चाहिए।
  6. मार्च से जून तक यदि केले के पौधों के पास पुवाल, गन्ने की पत्ती अथवा पॉलीथीन बिछा देने से नमी सुरक्षित रहती है, जिससे सिचाई की मात्रा भी आधी रह जाती है।

केला के खेती की निराई गुड़ाई

केले की फसल के खेत को स्वच्छ रखने के लिए समय पर निराई-गुड़ाई करने की आवश्यकता होती है, इससे पौधों को हवा एवं धूप आदि अच्छी तरह मिलता रहता है।

केले की कटाई-छटाई

  1. केले के रोपण के 2 माह के अन्दर ही बगल से नई पुत्तियाँ निकल आती है।
  2. पुत्तियों को समय-समय पर काटकर निकलते रहना चाहिए।
  3. रोपण के 2 माह बाद मिट्टी से 30cm गोलाई से 25 cm ऊँचा चबूतरा नुमा आकृति बना देनी चाहिए।
  4. इससे पौधे को सहारा मिल जाता है, साथ ही बांसों को कैची बना कर पौधों को दोनों तरफ से सहारा देना चाहिए।

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केले की खेती में रोगों का नियंत्रण 

केले की फसल में पर्ण चित्ती या लीफ स्पॉट, गुच्छा शीर्ष या बन्ची टाप,एन्थ्रक्नोज और तनागलन हर्टराट आदि रोग लगते हैं। इसके नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइट 0.3% का छिडकाव करना चाहिए। मोनोक्रोटोफास 1.25 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिएI

केले की खेती में लगने वाले कीट और उसका नियंत्रण

  1. केले में पत्ती बीटिल (बनाना बीटिल), तना बीटिल कीट लगते हैं, इसके नियंत्रण के लिए मिथाइल ओ-डीमेटान 25EC 1.25 ml प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करना चाहिएI
  2. कारबोफ्युरान अथवा फोरेट या थिमेट 10 जी दानेदार कीटनाशी प्रति पौधा 25 ग्राम का इस्तेमाल करना चाहिएI

फल की कटाई

  1. केले में फूल निकलने के बाद लगभग 25-30 दिन में फलियां निकल आते हैं।
  2. फलियां निकलने के बाद घार के अगले भाग से नर फूल काट देना चाहिए।
  3. फलियां निकलने 100 -140 दिन बाद फल तैयार हो जाते है।
  4. फलियाँ की चारो घरियाँ तिकोनी न रहकर गोलाई लेकर पीली होने लगे तो फल पूर्ण विकसित होकर पकने लगते है, जिससे बाद फल को काट लेना चाहिए।

केले के पकाने विधि 

  1. केले को पकाने के लिए घार को किसी बन्द कमरे रखकर पकाया जाता है।
  2. जिसे केले की पत्तियों से ढक देते है और एक कोने में उपले अथवा अंगीठी जलाकर रख देते है।
  3. कमरे को मिट्टी से सील बन्द कर देते है।
  4. यह लगभग 48 से 72 घंटे में कमरें केला पक जाता है।

 

नोट

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Tag: kele ki kheti kaise karein, kele ki kheti ke liye mitti kaisi honi chahiye

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3 Comments

  1. Like!! Thank you for publishing this awesome article.

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