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अब पकड़ो हल्दी का हाथ और बढ़ाओ अपना बैंक बैलेंस, 40 हजार प्रति एकड़ की लागत से कमाएं 5 लाख रुपये 9 महीने में

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TV पर आप खूबसूरत मॉडल्स और फिल्म अभिनेत्रियों को कई ऐसी Creme का एड करते रोज ही देखते होंगे जो कहती हैं कि उनकी क्रीम में खूबसूरती बढ़ाने वाली हल्दी है। इस तरह के एड देखते वक्त लोग मॉडल्स को तो देखते हैं और फिर वो क्रीम भी खरीदते हैं लेकिन हल्दी की बात को नज़रअंदाज कर जाते हैं।
 
दरअसल, इन क्रीम को बनाकर बेचने वाली कंपनियां इसी हल्दी की वजह से खरबों रूपया कमाती हैं। ऐसे में अब भारत के किसान भी हल्दी की खेती से लागत का 5 से 10 गुना तक लाभ कमा रहे हैं।
 




आंकड़ों की जुबानी, हल्दी की कहानी
 
  1. भारत में हल्दी का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है और यहीं, हल्दी की सबसे ज्यादा खपत भी होती है।
  2. भारत में की 70%  हल्दी का उत्पादन आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु राज्य करते हैं
  3. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का हर एक व्यक्ति 100 ग्राम हल्दी हर साल खाता है।
लागत और मुनाफा-
ग्रामीण कृषि सेवा केन्द्र सलाहकार Narsaiah Mamidala ने बताया की हल्दी की खेत दो तरह से की जाती है। इसी के आधार पर हल्दी की खेत में लागत आती है। 
  • ड्रिप प्रणाली
  • बिना ड्रिप की खेती
Narsaiah ने बताया कि हल्दी के अच्छे उत्पादन के लिए ड्रिप का इस्तेमाल करना चाहिए लेकिन इससे लागत दोगुनी बढ़ जाती है। खेत में ड्रीप लगाने के लिए 40 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्चा आता है लेकिन हल्दी का उत्पादन भी दो गुने से ज्यादा बढ़ जाता है और एक बार खेत में ड्रीप लगाने से यह पांच साल तक चलता है।
  1. हल्दी की खेती में प्रति एकड़ 40 हजार रुपये से 60 हजार रुपये तक की लागत आती है।
  2. साधारण रूप से खेती करने पर प्रति एकड़ कच्ची हल्दी का औसतन उत्पादन 80  से 90 कुंतल होती है।
  3. ड्रिप प्रणाली का इस्तेमाल करने से प्रति एकड़ कच्ची हल्दी का उत्पादन 100 से 150 कुंतल हो जाता है।
  4. साधारण प्रणाली से खेती करने पर सूखी हल्दी का प्रति एकड़ उत्पादन 30 कुंतल से 35 कुंतल हो जाता है।
  5. वहीं, ड्रिप प्रणाली से सूखी हल्दी का उत्पादन प्रति एकड़ 40 से 50 कुंतल तक  हो जाता है।
  6. बाजार में सूखी हल्दी की कीमत 8000 से 11000 रुपये प्रति कुंतल है। 
  7. वहीं, कच्ची हल्दी की कीमत 5000 से 7000 रुपये प्रति कुंतल है।
  8. प्रति एकड़ कच्ची हल्दी से 4 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।
  9. वहीं, सूखी हल्दी से प्रति एकड़ 3 लाख से 4.5 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।

हल्दी का बाजार
हल्दी का इस्तेमाल सिर्फ मसालों में ही नही किया जाता। इसका इस्तेमाल दवाईयों के रूप में भी किया जाता है। हल्दी से कुरकमिन तत्व निकलता है, जिसका इसका उपयोग अल्सर, पेट संबंधी तकलीफ और कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार वाली दवाओं के निर्माण में किया जाता है। 
हल्दी का इस्तेमाल एंटीसेप्टीक के रूप में भी किया जाता है। इसके अलावा कई तरह के क्रीम बनाने के लिए भी हल्दी का प्रयोग करते हैं। इसलिए इसका बाजार काफी बड़ा है। –
  1. हल्दी का बाजार काफी फैला हुआ है। घरों में खाने से लेकर तरह तरह की दवाईयां, क्रीम और ब्यूटी प्रोडक्ट में हल्दी का इस्तेमाल होता है।
  2. बड़ी-बड़ी नामी कंपनियां आजकल आयुर्वेदिक क्रीम बनाने के लिए हल्दी का इस्तेमाल कर रहें हैं ।
  3. पहले भारत में VICO turmeric में ही हल्दी के इस्तेमाल होने का जिक्र होता था लेकिन अब धीरे धीरे कई कंपनियां अपने क्रीम में हल्दी के इस्तेमाल का जिक्र करते हैं जिनमें Fair and lovely का आयुर्वेदिक क्रीम काफी चर्चे में है।
  4. इसके साथ साथ कई फैस पैक में भी हल्दी का इस्तेमाल होता है। इन सब जगहों में हल्दी के इस्तेमाल से हल्दी का बाजार सीधे सीधे बढ़ा ही है।

हल्दी की खेती के लिए बीज
Narsaiah Mamidala ने बताया कि हल्दी की खेती के लिए अच्छे बीजों का चयन बहुत जरूरी है। एक एकड़ खेत में 6 कुंतल हल्दी के बीज लग जाते हैं। इन बीजों की मार्केट में कीमत 3 हजार प्रति कुंतल है।
हल्दी की किस्में 
पकने के आधार पर हल्दी को तीन वैरायटी में बांटा गया है।
  1. अल्प कालीन- इस किस्म के फसलें 7 महीने में पक कर तैयार हो जाती हैं।
  2. मध्य कालीन किस्में- इस किस्म के फसलें 8 महीने में पक कर तैयार हो जाती हैं।
  3. दीर्घ कालीन किस्में- इस किस्म के फसलें को पकने में लगभग 9 महीना लग जाता है।
हल्दी की खेती के लिए भूमि का चयन
हल्दी की खेती बलुई दोमट या मटियार दोमट मृदा में सफलतापूर्वक की जाती है। जल निकास की उचित व्यवस्था होना चाहिए। यदि जमीन थोड़ी अम्लीय है तो उसमें हल्दी की खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।
बुवाई 
  1. जहां पानी की उपलब्धता अधिक हो वहां 15 अप्रैल से जुलाई के पहले सप्ताह तक हल्दी की बुआई कर देनी चाहिए।
  2. जहां पानी की कमी हो वहां बारिश के मौसम में  हल्दी की बुआई करनी चाहिए।
कटाई
  1. फरवरी महीने में हल्दी की फसलें खोदने लायक हो जाती हैं।
  2. पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती है तब समझना चाहिए कि हल्दी पक चुकी है और अब खुदाई की जा सकती है।
  3. पहले पौधों को काट देना चाहिए तथा बाद में हल से जुताई करके हल्दी के कंदों को आसानी से निकाला जा सकता है।
हल्दी की नई किस्म ‘सिम पीतांबर’  जिसकी पैदावर अन्य हल्दियों की तुलना में दोगुनी
केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध अनुसंधान संस्थान (सीमैप) ने हल्दी की नई किस्म किस्म विकसित की है। जिसकी पैदवार अन्य वैरायटी की हल्दियों की तुलना में दो गुनी होती है।
संजय कुमार, सीमैप के वैज्ञानिक के अनुसार हल्दी की खेती देश में 150000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में की जाती है। इस तरह तीन मिलियन टन तक का हल्दी उत्पादन देश में किया जाता है जिसकी कीमत लगभग 150 करोड़ रुपए है। देश के दक्षिण भागों (तेलंगाना और आंध्र प्रदेश) में इसकी खेती ज्यादा होती है।

नोट –
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Tag: Haldi ki kheti kaise karein

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One Comment

  1. Rajesh Malik Rajesh Malik

    श्रीमान जी क्या हरियाणा में हल्दी की खेती की जा सकती है

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