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भारतीय सरकारी संस्था ने तैयार किया ऐसा अनोखा बीज जिससे होती है प्रति एकड़ 30 लाख रुपये की कमाई, लागत 10 % कम, उत्पादन 5.5 गुना ज्यादा  

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हेडलाइन पढ़ कर चौकिए मत, क्योंकि यह बिल्कुल सच है। दरसअल किसानों हमेशा से चाहता है कि लागत कम की जाए और उत्पादन कई गुना बढ़ाया जाए, ताकि कम लागत पर ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके।
आज किसानख़बर.कॉम आपके लिए टमाटर की ऐसी ही एक नई प्रजाति पर विशेष रिपोर्ट लाया है जो ना केवल लागत को कम करती है बल्कि उत्पादन भी साढ़े 5 गुना बढ़ा देती है। जाहिर है कि उत्पादन इतने गुना बढ़ेगा तो मुनाफा भी कई गुना बढ़ जाएगा।
Arka Rakshak Tomato
Arka Rakshak Tomato
क्या है नई प्रजाति
आईआईएचआर यानी भारतीय बागवानी अनुसंधान (IIHR-Indian Institute of Horticultural Research) के वैज्ञानिकों ने टमाटर की एक ऐसी वैरायटी विकसित की है, जिससे एक पौधे से लगभग 19 से 20 किलो टमाटर का उत्पादन किया जा सकता हैं।
यह अब तक का सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाला टमाटर का पौधा है। इन टमाटर की वैरायटी का नाम है अर्का रक्षक।  भारतीय बागवानी अनुसंधान के वैज्ञानिकों ने काफी रिसर्च के बाद इस पौधे का विकास किया है।
बाकी प्रजाति से ज्यादा अच्छी क्यों है अर्कारक्षक
आमतौर पर देशी टमाटर के एक पौधे से 5 किलो से लेकर 10 किलो टमाटर की पैदावर होती है। लेकिन अर्कारक्षक से सर्दी में यही पैदावार 19-20 किलो तक चला जाता है, जबकि गर्मी में यही करीब 12 किलो होती है।
अगर हेक्टेयर की बात करें तो देशी टमाटर का उत्पादन प्रति हेक्टेयर औसतन 35 टन होता है, जबकि अर्कारक्षक वैरायटी के टमाटर का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 190 टन तक होता है। यानि प्रति एकड़ 76 टन उत्पादन होता है। यानी 5.5 गुना ज्यादा।
विशेषज्ञों के मुताबिक अर्का रक्षक टमाटर बाजार में 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिक जाता है। अगर प्रति एकड़ के उत्पादन के हिसाब से एक किसान की कमाई का हिसाब किताब करें तो अर्का रक्षक की खेती करने वाले किसान को एक एकड़ में 76 टन (76,000 किलो)  उत्पादन से 40 रुपये प्रति किलों के हिसाब से 30 लाख 40 हजार रुपये की कमाई होगी।
Arka Rakshak Tomato
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रोगों से खुद लड़ने में है सक्षम
IIHR के मुताबिक यह टमाटर तीन तरह से रोगों से खुद लड़ने में सक्षम है।
1. पत्तियों में लगने वाले कर्ल वायरस से यह खुद ही निपट लेता है।
2. फसल के शुरूआती दिनों में लगने वाले विल्ट जीवाणु से सफलतपूर्वक लड़ने की क्षमता इसमें मौजूद है।
3. विल्ट जीवाणु लगने का खतरा फसल के बीच में भी होता है यानी फसल के लगभग हो जाने के बाद भी यह अटैक हो सकता है। लेकिन अर्कारक्षण में इस बिमारी से भी लड़ने की क्षमता है।
अर्कारक्षक नाम कैसे पड़ा
 
भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR) के वैज्ञानिकों इस टमाटर की वैरायटी का नाम अर्कारक्षक इसलिए रखा क्योकि यह अनुसंधान कर्नाटक में अर्कावथी नदी के किनारे स्थित है। आज के समय में टमाटर की पैदावर के लिए अर्का रक्षक बीज काफी लोकप्रिय हो रही है। टमाटर के इस बीज को अर्का सम्राट भी कहते हैं।
खेती कब और कैसे होती है
  • इसकी खेती किसी भी मौसम में की जा सकती है।
  • जनवरी से अक्टूबर तक हम बीजाई यानी बीज बो सकते हैं।
  • पौधे नवम्बर तक लगाए जा सकते हैं।
  • दिसम्बर और जनवरी में ठंड अधिक होता है इसलिए इस माह में बीजाई से बचना चाहिए।
  • इसका उत्पादन फसल 140 से 150 दिनों में तैयार हो जाता है।
कहां और कैसे मि‍लेगा बीज
अर्का रक्षक टमाटर का बीज भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (IIHR)  से मंगाया जा सकता है। यहां से नगद, बैंक ड्राफ्ट, एनईएफटी व आरटीजीएस के माध्‍यम से पेमेंट कर बीज ले सकते हैं। दूर दराज इलाकों से पैसे भेजने वालों को बीज पोस्ट के जरिए भी भेजा जाता है। हालांकि पोस्टल चार्ज अलग से देना पड़ता है।
यहां आपको टमाटर के बीज के दाम और इसके बारे में जानकारी मिल सकती है।
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