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ऐसा क्या है स्वामीनाथन रिपोर्ट में जिसके लागू होने पर देश के किसान के अच्छे दिन आ सकते हैं और क्यों नहीं लागू हो रही यह रिपोर्ट पिछले 12 साल से

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कब और क्यों?

18 नवंबर 2004 को कांग्रेस के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मनमोहन के रहते हुए राष्ट्रीय किसान आयोग यानी NCF (National Council of Farmers) का गठन किया गया। प्रो.स्वामीनाथन को चैयरमैन बनाया गया। आयोग ने कुल 5 रिपोर्ट्स केंद्र सरकार को सौंपी। गठन बनने के पहले महीने में ही यानी दिसम्बर 2004 को ही स्वामीनाथन ने पहली रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। जबकि 5वीं और आखिरी रिपोर्ट 4 अक्टूबर 2006 को दी गई। यानी 2 साल में ही स्वामीनाथन ने देश में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का पूरी रिपोर्ट बनाकर टाइम पर दे दी।

अब फैसला सरकार को लेना था लेकिन 10 साल सत्ता में रहने के बाद भी कांग्रेस सरकार किसानों के हक में फैसला ना ले पाई। इसके बाद आई मोदी सरकार भी स्वामीनाथन रिपोर्ट के सुझाव पूरी तरह से लागू करने में आनाकानी करती दिख रही है।

स्वामीनाथन ने अपनी रिपोर्ट में किसानों के ‘तेज और संयुक्त विकास’ को लेकर सरकार को सुझाव दिए थे।

स्वामीनाथन कौन है और क्यों हैं उनका देश के कृषि इतिहास और तरक्की में बहुत बड़ा योगदान?

तमिलानाडु में 1925 में पैदा हुए वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति के जनक के रूप में पहचाना जाता है। यह स्वामीनाथन ही थे जिन्होंने 1966 में दक्षिण अमेरिकी देश मैक्सिको के बीजों को भारत में पंजाब के घरेलू किस्मों के बीजों के साथ मिश्रित करेक बहुत ज्यादा बढ़िया क्वालिटी के बीज तैयार किए।

इन्हीं बीजों की मदद से देश में गेंहू और चावल का उत्पादन कई गुना ज्यादा बढ़ गया। देखते ही देखते सिर्फ 25 साल में भारत सबसे कम खाद्यान्न उत्पादन वाले देश की कैटेगिरी से निकलकर आत्मनिर्भर बन गया।

स्वामीनाथन को भारत सरकार ने 1967 में ‘पद्म श्री’, 1972 में ‘पद्म भूषण’ और 1989 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया था।

MS-Swaminathan
MS-Swaminathan

स्वामीनाथन रिपोर्ट में किसानों की स्थिति देश में सुधारने के लिए क्या सुझाव दिए थे?

स्वामीनाथ ने वैसे तो 1 दर्जन से ज्यादा सुझाव दिए थे लेकिन उनमें से कुछ बड़े सुझावों के बारे में हम यहां बता रहे हैं:-

रोजगार सुधार

1961 में कृषि से जुड़े काम-धंधो में देश के 75 % लोग जुड़े हुए थे लेकिन 2000 आते आते यह आंकड़ा 59.9 % पर आकर अटक गया। ऐसे में रिपोर्ट में इसमें सुधार के कदम उठाए जाने पर जोर दिया। इसके अलावा आयोग के ने ‘नेट टेक होम इनकम’ भी किसानों के लिए तय किए जाने पर जोर दिया।

भूमि का बंटवारा

स्वामीनाथ रिपोर्ट के मुताबिक 1991-92 तक 50 प्रतिशत ग्रामीण लोगों के पास देश की सिर्फ 3 प्रतिशत जमीन थी। जबकि कुछ लोगों के पास ज्यादा जमीन थी। ऐसे में रिपोर्ट में इसके सही व्यवस्था की जरूरत बताई गई।

भूमि सुधार

देश में सरप्लस और बेकार पड़ी जमीनों की सीलिंग और बंटवारे की सिफारिशें दी गई। इसके अलावा खेतीहर जमीन पर गैर कृषि के काम किए जाने पर गंभीर चिंता जताई गई। जंगलों को लेकर खास नियम बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए National Land Use Advisory Service के गठन पर जोर दिया गया।

वितरण प्रणाली में सुधार :
इसमें किसानों को पैदावार को लेकर सुविधाओं को पहुंचाने के साथ ही विदेशों में फसलों को भेजने की व्यवस्था थी। इसमें गांव के स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक पूरी व्यवस्था का खांका खींचा गया था। साथ ही फसलों के इंपोर्ट और उनके रेट पर नजर रखने की व्यवस्था बनाने की सिफारिश भी थी।

सिंचाई सुधार :
आयोग ने पानी की सप्लाई और रेन वाटर हारवेस्टिंग पर भी जोर दिया गया था। स्वामीनाथन ने सलाह दी थी कि सिंचाई के पानी की उपलब्धता सभी के पास होनी चाहिए। इसके साथ ही ‘कुआं शोध कार्य़क्रम’ के जरीए पानी के स्तर को सुधारने पर जोर दिया था।

उत्पादन सुधार :
कृषि से जुड़े सभी कामों में ‘जन सहभागिता’ / पब्लिक इंवेस्टमेंट की जरूरत होगी, चाहें वह सिंचाई हो, ड्रेनेजे हो, भूमि सुधार हो, जल संरक्षण हो या फिर सड़कों और कनेक्टिविटी को बढ़ाने के साथ शोध से जुड़े काम हों।

क्रेडिट और इंश्योरेंस :
पूरे देश में फसल बीमा के साथ ही एक कार्ड में ही फसल भंडरण और किसान के स्वास्थय लेकर व्यवस्थाएं की जाएं। क्रेडिट सिस्टम की पहुंच सभी तक होनी चाहिए। फसल बीमा का इंटरेस्ट रेट 4 प्रतिशत होना चाहिए। साथ ही एग्रीकल्चर रिस्क फंड भी बनाने की बात आयोग ने की थी। कर्ज वसूली पर रोक लगाई जाए। मानव विकास और गरीब किसानों के लिए विशेष योजना की बात कही गई थी।

खाद्य सुरक्षा :
खाद्य सुरक्षा एक्ट के साथ ही गरीब किसानों की मदद को लेकर अन्य योजनाओं के बारे में आयोग ने विस्तार से लिखा था। पंचायत की मदद से पोषण योजना को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की भी बात थी। आयोग ने समान जन वितरण योजना की सिफारिश की थी। साथ ही सेल्फ हेल्प ग्रुप (स्वयं सहायक समूह) बनाकर कम्यूनिटी फूड एंड वाटर बैंक बनाने की बात भी कही गई थी। 

किसान आत्महत्या रोकना :
इसके साथ ही ज्यादा आत्महत्या वाले स्थानों का चिह्नित वहां विशेष सुधार कार्यक्रम चलाने की बात कही थी। किसानों की बढ़ती आत्महत्या को लेकर भी आयोग ने चिंता जताई थी। सभी तरह की फसलों के बीमा की जरूरत बताई गई थी। साथ ही आयोग ने कहा था कि किसानों के स्वास्थय को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत है। इससे उनकी आत्महत्याओं में कमी आएगी.

प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना :
न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की बात कही गई थी। आयोग ने किसानों में प्रतिस्पर्धा (कंपटीटिवनेस) को बढ़ावा देने की बात कही है। इसके साथ ही अलग-अलग फसलों को लेकर उनकी गुणवत्ता और वितरण पर विशेष नीति बनाने को कहा था।

नोट:-

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