ऐतिहासिक : देश के इतिहास में पहली बार किसान छुट्टी पर जा रहे हैं, 10 दिन पड़ सकते हैं खाने के लाले, क्या क्या होगा और क्या क्या परेशानी झेलनी पड़ेगी, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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अब बहुत हो गया किसानों के साथ सौतेलापन। अब पुरानी पड़ चुकी है किसानों को झूठा दिलासा देना देने की परंपरा। अब चाहिए फैसला। जी हां, किसान अब आर पार की लड़ाई के मूड में है लेकिन लड़ने का तरीका हिन्दुस्तान के इतिहास में बिल्कुल निराला है। देश ही नहीं बल्कि दुनिया में किसान कभी छुट्टी पर नहीं गए हैं।

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किसानों के छुट्टी पर जाने का मतलब क्या है?

1 जून से लेकर 10 जून 2018 तक देश का किसान मंडी नहीं जाएगा। इसका मतलब है कि किसान इन 10 दिनों में सब्जी, फसलें, दूध इत्यादि लेकर बेचने मंडी नहीं जाएगा। ऐसा भारत या बाकी किसी दूसरे देश में इससे पहले कभी नहीं हुआ है।

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छुट्टी पर जाने की पहल किसने की है?

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने हड़डाल करने, देश बंद का आह्वावान करने के बजाय “किसान छुट्टी पर” जाने के आंदोलन का आह्ववान किया है। इस अनोखे आंदोलन से ना तो रोड जाम होगा, ना रेल रोकी जाएगी, ना बाजार बंद करवाया जाएगा और ना ही कोई हिंसा होगी, लेकिन आंदोलन का असर पहले से ज्यादा होने के आसार ज्यादा हैं।

राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के मध्य प्रदेश के मीडिया प्रभारी सुनील गौर के मुताबिक इस अनोखे आंदोलन से दर्जनों छोटे – बड़े किसान और मजदूर संगठन जुड़ चुके हैं, जिनमें राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ से जुड़े 60 संगठन, महाराष्ट्र के 23 संगठन के अलावा, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार, पं.बंगाल, उड़ीसा इत्यादि राज्यों से भी किसान और मजदूर संगठन जुड़ रहे हैं।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ
                     राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ

 

किसानख़बर.कॉम से फोन पर बात करते हुए सुनील गौर ने बताया कि 1 मई से राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के सदस्य संकल्प यात्रा शुरु कर रह हैं, जिसमें गांव गांव जाकर किसानों को “किसान छुट्टी पर” आंदोलन से जोड़ेंगे।




किसानों के छुट्टी पर जाने से क्या परेशानी झेलनी होगी बाकी लोगों को?

इंसान ने सांस लेने के लिए नकली हवा (ऑक्सीजन के सिलेंडर) और प्यास बुझाने के लिए नकली पानी (कोल्ड ड्रींक) तो ईजाद कर ली लेकिन जिंदा रहने के लिए खाने का विकल्प नहीं ढूंढ पाया।पेट की भूख शांत करने वाली कुछ दवाएं जरूर हैं बाजार में, लेकिन उनसे आप जीवन भर जिंदा नहीं रह सकते। यानी कि किसान से ही खाना लेना है। अगर किसान छुट्टी पर चला गया तो खाने के लाले पड़ जायेंगे। ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर किसान धऱती से मिट गया तो दुनिया खत्म हो जाएगी।

10 दिन के लिए किसानों के छुट्टी पर जाने से बाजार में खाने पीने की चीजों जैसे सब्जियों, दूध इत्यादि की किल्लत पड़ सकती है। अगर सरकार इंतजाम कर भी ले, तब भी असर दिख सकता है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ
                        राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ



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क्यों जा रहे हैं किसान छुट्टी पर?

बड़ा सवाल ये कि आखिर किसान छुट्टी पर जा क्यों रहे हैं।

दरअसल, किसान स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की मांग 2006 से कर रहे हैं। स्वामीनाथन रिपोर्ट सरकार के कहने पर ही बनवाई गई थी। स्वामीनाथन रिपोर्ट किसानों के लिए क्यों सबसे ज्यादा अहमियत रखती हैं, इस बारे में जानने के लिए हमारी दूसरी रिपोर्ट पढ़िए।

ऐसा क्या है स्वामीनाथन रिपोर्ट में जिसके लागू होने पर देश के किसान के अच्छे दिन आ सकते हैं और क्यों नहीं लागू हो रही यह रिपोर्ट पिछले 12 साल से

नोट:-

  1. इस ख़बर को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर कीजिए, ताकि लोगों को शायद थोड़ा अहसास हो कि किसान को जिंदा रखोगे तभी आप खुद जिंदा रहोगे।
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