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क्यों है धोनी की अपने ही स्कूल में एंट्री बैन, 20 ऐसी अनसुनी कहानियां जो पहले शायद ही कभी आपने सुनी हो

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1st Story – 300 फ्लैट्स जितना बड़ा धोनी का फॉर्म हाउस

Dhoni पर लक्ष्मी किस कदर मेहबान हैं ये बात किसी से छुपी नहीं है। लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब धोनी रांची के दोरांदा इलाके में अपने पूरे परिवार के साथ 8 बाइ 10 फीट के कमरे में रहते थे। लेकिन अब वो वक्त आया है जब धोनी अपने सपनों का घर बनाने जा रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय खेल से सन्यास ले चुके हैं तो अब धोनी को अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम देने का वक्त मिलेगा।

ऐसे में धोनी ने अब रांची के रिंग पर 7 एकड़ जमीन पर जबरदस्त फार्म हाउस बना रहे हैं। ये संभवत किसी भी क्रिकेटर के पास अब तक का सबसे बड़ा फॉर्म हाउस होगा। 7 एकड़ जमीन पर बना फॉर्म हाउस कितना बड़ा होता इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इसमें 1000 फीट या करीब 100 गज के करीब 300 फ्लैट बनाए जा सकते हैं।

इतना ही नहीं, इतने विशालकाय फॉर्म हाउस पर धोनी एक इंडोर स्टेडियम भी बनवा रहे हैं।

2nd Story – धोनी मोबाइल पर साक्षी को कैसे मैसेज भेजा करते थे

धोनी की शादी साक्षी से हुई ये बात तो दुनिया जानती है। दोनों की लव मैरेज है ये बात भी दुनिया जानती हैं, लेकिन धोनी ने साक्षी को अपने दिल की बात कैसे कही क्या ये बात आप जानते हैं। क्या बात जानते हैं आप कि इन दोनों का मिलाने में मोबाइल फोन का बड़ा हाथ रहा।

दरअसल, दोनों ही रांची के DAV Shyamali School में पढ़े होने की वजह से एक दूसरे को पहले से ही जानते थे। दोनों के परिवार भी एक दूसरे को जानते थे। लेकिन स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही साक्षी अपने माता-पिता के साथ देहरादून शिफ्ट हो गई। ये वो दौर था जब दोनों में से किसी के भी पास मोबाइल नहीं था और उस समय तो मोबाइल फोन होना किसी लक्जरी से कम नहीं था। खैर शहर बदलने की वजह से दोनों में बातचीत खत्म हो गई।

साक्षी हॉटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद कोलकाता के ताज होटल में ट्रेनिंग करने लगी। तभी भारत बनाम पाकिस्तान मैच के लिए धोनी टीम के साथ कोलकाता में थे।

उस समय धोनी के मैनेजर युद्धजीत दत्ता थे। दत्ता ने ही दोनों की बरसों बाद मुलाकात करवाई। बस फिर क्या था। धोनी को अपने स्कूल के दिन याद आ गई और उन्होंने जैसे तैसे दत्ता के जरीए साक्षी का मोबाइल नबंर निकलवा कर उनको रोजाना प्यार भरे मैसेज भेजना शुरु कर दिया।

पहले तो साक्षी को आसानी से भरोसा नहीं हुआ कि टीम इंडिया का मोस्ट Eligible Bachelor पर उन पर अपने प्यार की बरसात करने को बेकरार है। लेकिन धीरे धीरे जैसे मोबाइल फोन पर मैसेज के जरीए बातचीत बढ़ती गई, वैसे वैसे साक्षी ने धोनी को प्यार स्वीकार कर लिया और फिर मार्च 2008 से उनको डेट करते करते जुलाई 2010 में शादी कर ली।

Mahendra Singh Dhoni untold stories
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03rd Story बिहारी धोनी से बन गए मैच विनर धोनी

धोनी से पहले युवराज सिंह की टीम इंडिया में एंट्री हो चुकी थी और वो टीम में अच्छी तरह से अपनी जगह बना चुके थे। धोनी झारखंड राज्य से थे लेकिन बिहार से अलग होकर 3-4 साल पहले ही झारखंड अलग राज्य बना था। इसलिए धोनी ने जब पहली बार ड्रेसिंग रूम में कदम रखा, तो युवी ने उनके बिहारी खिलाड़ी कह कह खूब चिढ़ाया। युवी धोनी के कई दिनों तक बिहारी खिलाड़ी कहकर ही चिढ़ाते रहे। जब जब धोनी लंबे छक्के लगाने के बाद पवैलियन या ड्रेसिंग रूम में वापस आते, तो युवी फिर ये कहकर उनके चिढ़ाते कि लंबे छक्के लगाना कोई बड़ी बात नहीं धोनी, मैच जीतने से ही कोई खिलाड़ी महान बनता है।

युवी तो धोनी को ये बात मजाक में कहकर चिढ़ाने की कोशिश करते थे, लेकिन धोनी ने युवी के इस मजाक को कब गंभीरता से ले लिया और इस बात गहराई को समझ लिया ये युवी को भी समझ नहीं आया। लंबे छक्के लगाने वाला धोनी धीरे धीरे मैच विनर खिलाड़ी में तब्दील हो गया।

04th Story – विकेट-कीपर से कैसे बने बॉलर धोनी

धोनी को क्रिकेट जगत में कई मौको पर विकेट कीपिंग के अलावा बॉलिंग करते और बॉलिंग से मैच जीताते देखा है। लेकिन क्या आपको पता है कि विकेट कीपिंग करते करते धोनी ने कैसे बॉलिंग करना भी शुरु किया। इसके पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है।

खडकपुर में बीएमआर रेलवे ग्राउंड है। इस ग्राउंड पर उस समय डे नाइट टूर्नामेंट होता था। वहीं टूर्नामेंट में धोनी हर साल पार्टीसिपेट करता था। टीम इंडिया के लिए 2004 में खेलने से पहले आखिरी बार 2003 में धोनी इस टूर्नामेंट खेले। 2003 के फाइनल में धोनी ने टीम पहले बैटिंग की। इस मैच के आखिरी ओवर में ऐसी स्थिति बनी दूसरी टीम को मैच जीतने के लिए सिर्फ 8 रन चाहिए थे। धोनी ने पूरे मैच में विकेट कीपिंग ही की थी। लेकिन जब सवाल ये उठा कि किसको ओवर दिया जाए ताकि 8 रन विपक्षी टीम ना बना सके। तभी तपाक से धोनी बोले कि मैं बॉलिंग करूंगा।

धोनी का कॉन्फीडेंस इतना जबरदस्त था उस समय कि कोई ना नहीं कर सका। धोनी ने जैसा कॉन्फीडेंस दिखाया था वैसा ही उसने प्रदर्शन भी किया और मैच में दूसरी टीम आखिरी ओवर में धोनी की बॉलिंग पर 8 रन नहीं बना सकी। नतीजा, धोनी की टीम उस साल चैंपियन बन गई और धोनी ही उस मैच में मैन ऑफ द मैच अवार्ड मिला।

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05th Story – एक मजबूरी से ईजाद हुआ धोनी का हेलीकॉप्टर

क्रिकेट में धोनी का हैलीकॉप्टर शॉट धोनी की पहचान बन चुका है। लेकिन धोनी ने इस शॉट को एक मजबूरी में इजाद किया था। वैसे ये शॉट क्रिकेट की किसी किताब में नहीं मिलेगा।

दरअसल, खड़गपुर के एक ग्राउंड पर धोनी अपनी टीम के बाकी साथी खिलाड़ियों के साथ रेगुलर क्रिकेट खेला करते थे। लेकिन इस मैदान का ऑफ साइट सिर्प 22 गज का ही था यानी छोटा था।

इसलिए खिलाड़ियों ने ये नियम बनाया कि ऑफ साइड में छक्का या चौका लगने पर बल्लेबाज को सिर्फ 2 ही रन दिए जायेंगे। ऐसे में गेंदबाज जानबूझकर ही बल्लेबाज को ऑफ स्टंप पर ही बॉल डालता था।

लेकिन धोनी ने इस मजबूरी को भी मौके में बदल दिया और हेलीकॉप्टर शॉट्स के जरीए ऑफ स्टम्प पर पड़ने वाली गेंदों पर लेग साइड में छक्का लगाने लगे।

06th Story – पापा बोले कि एक दिन में क्या कर लोगे

धोनी के स्कूल के एक्जाम का वक्त था। 2-3 दिन के बाद ही पहला एक्जाम था लेकिन उससे पहले एक महत्वूपर्ण मैच भी था। धोनी के समझ नहीं आ रहा था कि वो अपने पापा से मैच खेलने की इजाजत कैसे लें। खैरे जैसे तैसे हिम्मत बटोरी और पापा से पूछा कि पापा क्या मैं मैच खेलने जाऊं। पापा ने भी ऐसा जवाब दिया कि धोनी हैरत में पड़ गए। पापा बोले कि अगर तुम पूरे साल पढ़े हो तो एक्जाम से पहले एक दिन मैच खेलने से कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन अगर तुम पूरे साल नहीं पढ़े हो तो एक दिन पढ़ने से कोई खास फायदा भी नहीं होगा। इसलिए तुम तय करो कि तुमने पूरे साल क्या किया है और अब क्या करना सही है।

उस समय धोनी को ये बात ज्यादा समझ तो नहीं आई क्योंकि उनके दिमाग पर तो मैच का जूनुन सवाल था, इसलिए वो पापा की बात की गहराई समझे बिना ही इस खुशी में घर से निकल गए कि पापा ने हां कर दी।

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07th Story – दिल्ली में साउथ एक्स के नजदीक लोधी कॉलोनी ही क्यों ठहरते थे धोनी

ये बात 2001 और 2002 की, जब मैक्डॉनल्ड्स की स्टोर हर जगह नहीं होते थे, खासतौर पर रांची में शायद एक भी नहीं था। इसलिए जब भी धोनी किसी और बड़े शहर में मैच खेलने जाते और अगर उनको वहां कहीं भी मैक्डॉनल्ड्स का स्टोर दिख जाता तो, वो अपने को बर्गर खाने से रोक नहीं पाते थे।

ऐसी ही एक कहानी है उनके बहुत पुराने दोस्त और अपने उनका बिजनस देखने वाले अरूण पांडे से जुड़ी। अरूण पांडे का घर लोधी कॉलोनी में था और धोनी वहां सिर्फ इसलिए रूकते थे ताकि वो अरूण की बाकी लेकर पास ही में साउथ एक्स में बने McDonalds जाकर अपनी पसंद का बर्गर खा सके।

08th Story – गोलकीपर से कैसे बने विकेट कीपर

ये बात तो दुनिया जानती है कि धोनी क्रिकेटर बनने से पहले फुटबॉल के गोलकीपर थे। लेकिन सवाल ये उठता है कि वो कैसे गोलकीपर से विकेट कीपर बने। कुछ लोग कहते हैं कि उनके कोच ने ऐसा करने को कहा। लेकिन ऐसा क्यों कहां, इसके पीछे की कहानी फिल्मी है।

दरअसल, धोनी रांची में जिस ग्राउंड पर फुटबॉल मैच खेला करते थे, वहीं पर फुटबॉल मैच के बाद क्रिकेट का मैच खेलने भी कुछ टीमें आती थी। वो लोग रेगुलर ही धोनी की जबरदस्त ढंग से गोलकीपिंग करते देखते थे। लेकिन एक उसी मैदान पर क्रिकेट मैच खेलने वाली टीम को गोलकीपर की जरूरत पड़ी। ऐसे में उन्होंने धोनी को उस मैच में विकेट कीपिंग के लिए बात की और धोनी मान गए।

पहले ही मैच में धोनी की विकेटकीपिंग जबरदस्त थी, जिसने सभी को प्रभावित किया। फिर धोनी रेगुलर ही फुटबॉल के साथ साथ क्रिकेट में भी विकेट कीपिंग करने लगे। ऐसे में एक दिन उनके कोच ने ही उनको फुटबॉल के बजाय क्रिकेट को गंभीरता से लेने और विकेटकीपिंग में करियर बनाने का सुझाव दिया।

Mahendra Singh Dhoni untold stories
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09th Story – चाय वाले से धोनी की दोस्ती

खड़कपुर वो जगह है जहां कभी रेलवे स्टेशन पर धोनी टीटी के नौकरी किया करते थे। लेकिन खड़कपुर से जुड़ी यह दिलचस्प कहानी नहीं है। दरअसल, खड़कपुर रेलवे स्टेशन के पास एक चाय वाले की छोटी सी दुकान थी। दुकान के मालिक थॉमस ने उस दुकान का नाम अपने नाम पर रखा हुआ था।

रेलवे के कर्मचारी कहीं भी चाय पीने जाय लेकिन धोनी सिर्फ थॉमस की ही दुकान पर चाय पीने आते थे। जब धोनी को टीम इंडिया का साथ मिल गया तो उनका यहां आना भी बंद हो गया और थॉमस से बातचीत भी। लेकिन क्रिकेट जगत को अलविदा करने से कुछ समय पहले वो एक मैच के लिए कोलकाता में थे, तभी चायवाला थॉमस उनके मिलने खड़कपुर से कोलकाता पहुंच गया। धोनी ने जैसे ही थॉमस को देखा तो थॉमस के कुछ कहने से पहले ही तुरंत पहचान लिया और अपने साथ 5 स्टार हॉटल मे ले जाकर डिनर किया।

क्रिकेट जगत पर राज करने वाले धोनी से ऐसा स्वागत मिलने के बाद थॉमस ने तुरंत ही अपनी चाय शॉप का नाम बदल धोनी टी-स्टॉल रख दिया।

10th Story – गोलकीपर से कैसे बने विकेट कीपर

2001 तक आते आते धोनी क्रिकेट में ठिकठाक कर प्रदर्शन कर रहे थे और कुछ कमाने भी लगे थे। ऐसे में वो घरेलू क्रिकेट खेल रहे देश के उन गिने चुने खिलाड़ियों में से एक थे जिनके पास मोबाइल फोन था। साल 2001 के आस पास तक मोबाइल फोन रखना किसी लक्जरी से कम नहीं था।

लेकिन इस कहानी ये है कि मोबाइल तो धोनी का थे और इसका बिल भी धोनी ही भरते थे लेकिन इसका टीम उनकी टीम के साथी खिलाड़ी सबसे ज्यादा करते थे। धोनी के पास तो बस नाम के लिए ही मोबाइल रहता था। लेकिन जिस बात ने साथी खिलाड़ियों को धोनी की सादगी का कायल किया वो ये कि धोनी के मोबाइल का जमकर इस्तेमाल करने के बावजूद उन्होंने कभी अपने साथी खिलाड़ियों से इसकी कोई शिकायत नहीं की।

 

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11th Story – किसने की थी धोनी के टीम इंडिया में खेलने की सबसे पहले सटिक भविष्यवाणी

धोनी ने 2004 में पहली बार टीम इंडिया के लिए मैच खेला। इससे पहले खुद धोनी भी श्योर नहीं थे कि वो कब टीम इंडिया के लिए खेलेंगे या खेलेंगे भी की नहीं। लेकिन एक शख्स ऐसा था जिसने धोनी की एक शानदार पारी देखकर भविष्यवाणी कर दी थी कि ये खिलाड़ी एक दिन टीम इंडिया में एंट्री करेगा।

दरअसल, मौका था देवधर ट्रॉफी में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच मैच का। धोनी ईस्ट जोन के लिए खेल रहे  थे। उन्होंने अपनी टीम के लिए ऐसा शानदार ताबड़तोड़ शतकीय पारी खेली कि टीम के कोच पूर्व टेस्ट क्रिकेटर करसन घावरी दंग रह गए। मैच के बाद उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने सभी के सामने भविष्यवाणी कि धोनी एक दिन टीम इंडिया की ब्लू जर्सी पहनेगा।

12th Story – कैप्टन कूल के कूल लक्षण स्कूल में ही दिखे थे

कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं लेकिन धोनी के लिए ये बात यूं कही जा सकती है कि कैप्टन कूल के कूल लक्षण स्कूल में ही दिख गए थे।

धोनी की स्कूल टीचर के मुताबिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान धोनी ने एक मैच में डबल सेंचुरी लगाई, तो स्कूल में जश्न जैसा माहौल हो गया। सभी लोग बेहद खुश थे, लेकिन जब धोनी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने सिर्फ एक छोटी से मुस्कुराहट दी यानी वो सफलता के बावजूद बहुत ज्यादा कभी एक्साइटिड भी नहीं होते थे।

13th Story – धोनी का अपने ही स्कूल में जाना हुआ बैन

अगर कहा जाए कि धोनी की सबसे सफल कप्तान बने लेकिन फिर भी उनको रांची में अपनी ही स्कूल में जाना बैन कर दिया गया, तो सुनने में कैसा लगेगा। दरअसल, धोनी को अपने स्कूल से बहुत लगाव है। इसलिए धोनी ने अपनी बायपिक फिल्म में भी अपने स्कूल की असली टीचर्स से ही फिल्म में एक्टिंग करवाने के लिए फिल्म डायरेक्टर को मनाया था।

लेकिन धोनी अगर रांची में है तो वो हर हाल में अपने स्कूल जरूर जाते थे और वहां सभी से मिलते थे। लेकिन एक दिन स्कूल मैनेजमेंट ने उनको रिक्वेस्ट किया कि वो स्कूल ना आया करें। दरअसल स्कूल मैनेजमेंट धोनी की सफलता से बेहद खुश है लेकिन उनको डर रहता है कि धोनी के आने से स्कूल में बच्चों और बाकी लोगों की जबरदस्त भीड़ जमा हो जाती है। धोनी वैसे भी बिना बताएं आते हैं तो सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं हो पाते। ऐसे में भगदड़ मचने और कोई बड़ी दुर्घटना घटने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में स्कूल मैनेजमेंट ने धोनी से रिक्वेस्ट कर उनको अपने ही स्कूल में आने से रोक दिया।

14th Story – धोनी का अपने ही स्कूल में जाना हुआ बैन

धोनी ने जब क्रिकेट जगत में कदम रखा तो उनको 7 या 8 नंबर पर ही खिलाया जाता था। लेकिन उनकी तमन्ना तो इंनिंग ओपन करने की थी। एक दिन केंद्र विधालय स्कूल के खिलाफ एक मैच में वो टॉप ऑर्डर में आने की इच्छा लेकर कोच के पास पहुंचे और साफ साफ शब्दों में बता दिया कि वो इस मैच में इनिंग ओपन चाहते हैं। ऐसे में कोच बनर्जी ने शर्त रखी कि वो अगर ये वादा करें तो टॉप ऑर्डर में आने के बाद वो इस मैच में बाकी किसी बल्लेबाज को बैटिंग के लिए आने ही नहीं देंगे, यानि वो पूरा मैच खेलेंगे और आउट नहीं होंगे, तभी धोनी की इच्छा पूरी का जा सकती है। धोनी ने तपाक से शर्त मंजूर कर ली। नतीजा, धोनी ने अपने साथी बल्लेबाज शब्बीर हुसैन के साथ 378 रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें 40 ओवर के मैच में 214 रन अकेले उनके खुद के थे। इस मैच ने सीसीएल यानी सेंट्रल कोल लिमिटेड क्रिकेट टूर्नामेंट में उनको शोहरत दिलाई और फिर धोनी और हुसैन दोनों को ही Stipend पर ले लिया गया।

15th Story – शरारती धोनी

ऐसा नहीं है कि धोनी बिल्कुल कूल हैं और उन्होंने स्कूल में कोई शरारत नहीं की। बाकी बच्चों की तरह वो भी शरारत करते थे।

ये घटना स्कूल के समय की है। धोनी की 10वीं और 12वीं क्लास में बिजनस स्टडीज की टीचर हुआ करती थी जिनका नाम था शर्मिष्ठा कुमार। धोनी ने खेल के चक्कर में कई दिन तक उनकी क्लासिस मिस कर दी थी, इसलिए एक दिन टीचर का गुस्सा सातवें आसमान पर था और उन्होंने एक मैच के बाद क्लास में आए धोनी को देखकर उनकी अच्छे से लताड़ लगाई।

धोनी चुपचाप शांत बच्चे की तरह सब सुनते रहे। लेकिन उनके एक साथी ने तभी टीचर को बताया कि मैडम धोनी पर आप प्लीज ना चिल्लाए क्योंकि आज ही उसने स्कूल के लिए एक मैच में सेंचुरी लगाई है। इसके कुछ दिन बाद एक दिन उन्हीं टीचर ने कहा कि मैं तुम सभी लड़कों को अपने घर डिनर पर बुलाना चाहती हूं, तभी धोनी ने मासूमियत भरी शरारती स्माइल से पूछा कि सिर्फ बॉयज क्यों मैडम, गर्ल्स क्यों नहीं?

 

16th Story – जब धोनी को मिला पहला स्पॉन्सर्ड किकेट कीट

परमजीत सिंह ये वो शख्स हैं जिसने वाकई रणजी में डेब्यू से पहले ही धोनी के क्रिकेट टैलेंड को पहचाना और उसको स्पॉन्सर्ड क्रिकेट कीट भी दी। दरअसल, परमजीत स्पोर्ट्स गुड्स की शॉप चलाते हैं। वो अक्सर जालंधर जाकर BAS के बैट्स खरीदा करते थे। उन्होंने BAS बैट्स के निर्माताओं से लगातार रिक्वेस्ट की कि वो धोनी को स्पोन्सरशिप दे दें। लगातार रिक्वेस्ट के बाद एक दिन कंपनी ने रणजी मैच में डेब्यू से ठीक एक दिन पहले ही धोनी को उनके घर पर डायरेक्ट कीट भेज दी।

इसके बाद बल्ले भेजने का सिलसिला चल पड़ा। दरअसल, धोनी ने उस दौरान करीब 8 बैट जबरदस्त शॉट्स खेलकर तोड़ दिए थे। इससे परेशान आकर बीएएस बल्ला बनाने वाली कंपनी के मालिक ने परमजीत से कहा कि क्यों तुम एक खिलाड़ी पर इतने बल्ले बेकार कर रहे हो। तो परमजीत ने कहा कि आप बस धोनी को बैट्स भेजते रहो। एक दिन आएगा जब ये टैलेंड चमकेगा और आपका बल्ला भी।

17th Story – धोनी का अपने ही स्कूल में जाना हुआ बैन

आमतौर पर स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले बच्चे अपने रूम में अपनी पसंद के फिल्मी हीरो-हीरोइन के पोस्टर लगाकर रखते हैं। लेकिन धोनी ने किसी का पोस्टर अपने कमरे में लगा रखा था। धोनी MECON क्वार्टर के 8 बाइ 10 फीट के जिस घर में रहते थे उसमें उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बहुत बड़े बड़े पोस्टर लगा रखे थे।

 

18th Story – स्कूल से बंक करने वाला धोनी

धोनी को इतना भी सीधा ना समझे आप। धोनी ने स्कूल के दिनों में खूब शरारतें भी की हैं। धोनी और बाकी उन सभी बच्चों को स्कूल का पहला क्लास मिस करने की छूट मिली हुई थी जो स्कूल टीम के लिए मैच खेलते थे, क्योंकि उनको सुबह सुबह प्रैक्टिस के लिए जाना होता था। लेकिन इस बात का धोनी और उनके कुछ साथियों ने कुछ मौको पर स्कूल बंक करके फायदा भी उठाया।

19th Story – धोनी का अपने ही स्कूल में जाना हुआ बैन

खड़कपुर टीम के लिए धोनी का सिलेक्शन जिन्होंने किया उनका नाम था अनीमेष गांगुली, जो कि खड़कपुर रेलवे डिविजन के मैनेजर थे। अनीमेष गांगुली ने ही धोनी को रेलवे में ग्रुप सी जॉब दिलवाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी। 2004 में जब धोनी India A Team के लिए विदेशी दौर पर जाने वाले थे, तब धोनी ने गांगुली से पूछा कि सर बताइए आपके लिए क्या कर सकता हूं। गांगुली ने तुरंत जवाब दिया कि मेरे लिए इस टूअर पर कई शतक चाहिए। आपको जानकर हैरत होगी कि उस सीरीज में पाकिस्तान के खिलाफ धोनी ने बैक टू बैक 2 शतक भी लगाए और गांगुली से किया वादा पूरा किया।

20th Story – धोनी का अपने ही स्कूल में जाना हुआ बैन

खड़कपुर में टेनिस बॉल से 6 ओवरों वाला सिक्स – ए – साइट नाइट टूर्नामेंट हुआ करता था। इस टूर्नामेंट पर 1 लाख रूपए का ईनाम था, जो कि उस दौर में बहुत बड़ी रकम थी। सेमीफाइनल में धोनी की टीम खराब अंपायरिंग की वजह से मैच हारने की कगार पर खड़ी थी। दूसरी टीम को आखिरी ओवर में जीत के लिए सिर्फ 2 रन ही चाहिए थे। टीम के साथी खिलाड़ी मैच बीच में ही छोड़ने का मन बना चुके थे। लेकिन धोनी ने उनको मैच खेलने के लिए मनाया और कहा कि हम मैच खेलेंगे चाहिए हार ही क्यों ना जाएं। धोनी ने खुद आखिरी ओवर करने का फैसला किया।

आपको जानकर हैरत होगी कि आखिरी ओवर में धोनी ने एक भी रन बल्लेबाजों को लेने नहीं दिया और मैच जीत गए। कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कहानी तो यहां से अब शुरु होती है। धोनी के इस कॉन्फीडेंस और जबरदस्त प्रदर्शन के बाद बाकी क्लबों ने भी अब धोनी को हायर करना शुरु कर दिया और धोनी ने हर मैच के लिए दूसरी टीमों से 2000 रूपए प्रति मैच चार्ज करना भी शुरू कर दिया।

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