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बांदा में आ गए किसानों के अच्छे दिन, ऐसी फसल जो दे रही है विपिन सिंह को 1 बीघा में 40 हजार रूपए की कमाई, एक बार बोने पर देती है 5 साल तक कमाई

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बुंदेलखंड – यह नाम सुनते ही दिमाग में एक तस्वीर ऊभर आती हैं जिसमें उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक का मंजर नज़र आता है। ऐसा इलाका जहां विकास नाम की चिड़िया सपनों की परी जैसी लगती है।
बुंदेलखंड में सूखे और कम बारीश की वजह से खेती का क्या हाल होता है इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लेकिन इन बुरे हालात में भी बांदा जिले के विपिन सिंह ने खेत के मैदान में सफलता की वो कहानी लिख डाली है जिसे हर किसान और गैर किसान व्यक्ति को जानना बेहद जरूरी है।
बांदा जिले में विपिन सिंह ने सरकारी मदद से Lemon grass की ऐसी खेती की जो उन्हें आर्थिक बदहाली से निकाल कर मालामाल कर रही है और वो एक बीघा खेत से बेहद कम लागत पर 40 हजार रूपए सालाना आसानी से कमा रहे हैं। हैरत की बात ये कि एक बार की लागत पर उनको ये कमाई अगले 5 साल तक यूं ही होती रहेगी।




क्या है Lemon Grass Farming (What is lemon grass farming)
Lemon Grass से तेल निकाला जाता है जिसका इस्तेमाल दवा और सौंदर्य उत्पादों को बनाने में किया जाता है। Lemon Grass Oil का इस्तेमाल अरोमथेरपी (aromatherapy -सुगंध-चिकित्सा) के जरिए मांसपेशियों में होने वाले दर्द को दूर करने में किया जाता है। इसके अलावा, खतरनाक बैकटैरिया और कीड़े मकौड़े से बटने के लिए Lemon Grass Oil काफी कारगर साबित होता है। शरीर में एठन और पांचन क्रिया की समस्या के समाधान में भी इसका इस्तेमाल होता है।
Tea और Soup में महक लाने में भी इसको प्रयोग किया जा रहा है। साथ में साबुन, सौंदर्य उत्पाद और घरों में बदबू दूर करने वाले उत्पादों में इसका इस्तेमाल कंपनियां अब खूब करने लगी हैं।




कमाई का हिसाब किताब (income from Lemon grass farming)
विपिन सिंह के मुताबिक नींबू घास यानी Lemon Grass से निकलने वाले Oil को वो अभी तक 1100 रूपए प्रति लीटर के हिसाब से बेचते आ रहे हैं।
एक बार फसल बो देने के बाद वो साल में इसे 3 से 4 बार आसानी से कटाई कर लेते हैं यानी हर 2-3 महीने में एक बार कटाई हो जाती है। एक बार की कटाई में एक बीघा में वो 9-10 लीटर Lemon Grass Oil निकाल लेते हैं।
इतना ही नहीं कम पानी वाली इस फसल को एक बार बो देने के बाद उसो अगले 5 साल तक कटाई की जा सकती है।
इस हिसाब से हर एक बीघा में एक साल में औसतन 40 हजार रूपए की कमाई कर लेते हैं।
 




कहां है बाजार
विपिन सिंह के मुताबिक आमतौर पर लेमन ग्रास ऑयल को या तो दवा और सौंदर्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों खरीदती है या फिर सरकारी एजेंसियां।
सरकारी एजेंसी ने लखनऊ में राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड लेता है। इसके अलावा नोर्थ ईस्ट में भी सरकारी एजेंसियों इसे खरीदती हैं।
विपिन सिंह ने तो अपने खेत पर ही लेमन ग्रास तेल निकालने वाला प्लांट भी लगा रखा है।




कैसे हुई शुरूआत
इसकी शुरुआत 2015 में हुई, जब उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड ने उसको बढ़ावा देना शुरु किया।  बोर्ड ने 2015 में लेमन ग्रास खेती प्रॉटेक्ट को ट्रॉयल पर शुरु किया था, जो कि पूरी तरह से सफल रहा।
बोर्ड अब इसे पूरे बंदुेलखंड में फैलाने की योजना पर काम कर रहा है। किसानों को बोर्ड पौधे देने से लेकर ट्रेनिंग देने और आर्थिक मदद तक की सहायता कर रहा है।
 
फसल को कोई खतरा?
 
किसानों को खेती में सबसे बड़ी परेशानी का सामना जानवरों से करना पड़ता है। यानी कि खतरा बना रहता है कि कहीं फसल को कोई जानवर खा ना जाए। लेकिन Lemon Grass में ऐसा नहीं होता।
Lemon Grass की फसल को ना तो जानवर खाते हैं और ना ही इसे किसी तरह का रोग लगता है।

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