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भारत और कनाडा में कूड़े से ऊर्जा बनाने की योजना का खुलासा किया किटसॉल्ट एनर्जी (KE-kitsault energy) ने

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भारत की 130 करोड़ जनता से रोजाना करोड़ों टन कूड़ा बनता है। यह कूड़ा जनता और सरकार सभी के लिए दशकों से परेशानी बना हुआ है। ना केवल इनका निपटारा बहुत बड़ी समस्या है साथ में इनसे फैलने वाली बिमारियां और भी बड़ी परेशानी है।

लेकिन तकनीक की वजह से अब इस समस्या का समाधान दुनिया को मिल चुका है। अब भारत में भी कचरे से ऊर्जा बनाने के प्रॉजेक्ट पर कई कंपनियां या तो काम शुरु कर चुकी हैं या फिर योजना बना रही हैं।

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इन्हीं में से एक है कनाडा की कंपनी KitSault Energy।

KitSault Energy के संस्थापक और अध्यक्ष कृष्णन सुथंथिरन ने खुलासा किया है कि अब वो भारत में भी कचरे से ऊर्जा बनाने के प्रॉजेक्ट पर गंभीरता से काम कर रहे हैं।

केई के प्रेसिडेंट और संस्थापक कृष्णन सुथंथिरन कहते हैं, “किटसॉल्ट एनर्जी भविष्य की हरित दृष्टि वाले नगर निगमों, कंपनियों और सरकारों को अपने साथ जुड़ने के लिए आमंत्रित करती है। जलवायु परिवर्तन, कल की अर्थव्यवस्था में कार्बन की अनुमानित कीमत, फॉस्सिल फुएल्स से मुक्त होने की चाहत, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत का विकास करने की आवश्यकता, लैंड फिल की लगातार बढ़ती समस्या और स्थायी भविष्य के लिए अभियान – कई कारण हैं हमसे जुड़ने के। हम सही दिशा में एक छोटे कदम की पेशकश करते हैं।”

किटसॉल्ट एनर्जी (केई) ऊर्जा बनाने के लिए कूड़े में लुगदी और कागज बनाने वाले प्लांट का लीगेसी वेस्ट वुड, नगर निगम का ठोस कचरा, सड़क का कूड़ा, बेकार खाद्य पदार्थ, जानवरों का खाद और कई खास चीजें जैसे भारत में गांडो बावल (गुजरात और आस-पास पाया जाने वाला पेड़)  का इस्तेमाल करेगी।

इस प्रक्रिया से उच्च शक्ति वाला जैव ईंधन तैयार होता है जिसने जलने से कोई राख नहीं बचती। इस खूबी की वजह से यह ईंधन इस्पात और सीमेंट उद्योग में कोयले की जगह लेने के लिए सबसे बढ़िया है।

किटसॉल्ट एनर्जी कनाडा की कंपनी है जिसकी स्थानपना कृष्णन सुथंथिरन ने कनाडा के पैसेफिक नॉर्थवेस्ट में ऊर्जा की समृद्धि का विकास करने के लिए की थी।

पूरी दुनिया में यूरोप का खूबसूरत देश स्वीडन ही एकमात्र ऐसा देश है जो अपने पूरे कचरे का 99 प्रतिशथ या उससे ज्यादा कचरे से ऊर्चा बनाता है, जबकि इंग्लैंड 44% कचरे को ऊर्जा में बदल देता है। भारत इस मामले में बहुत पीछे हैं।

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