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21 दिन लगाओं गाय-भैंस को नए जमाने का इंजेक्शन, फिर रहेगी No Tension, दूध ना देने वाले गाय-भैंस के लिए खोजा गया एक अनोखा इंजेक्शन, कुल खर्चा सिर्फ 1500 रूपए

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गाय-भैंस का बाझंपन एक गंभीर समस्या

भारत जितनी तेजी से तरक्की कर रही है, उतनी ही तेजी से भारत में प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती जा रही हैं। इंसान के खाने से लेकर जानवरों के चारे तक सभी में मिलावट मिल ही जाती हैं। यही मिलावट के आज किसानों और उनके पशुओं के लिए एक समस्या बन गई हैं।

अक्सर देखा जाता है कि इस तेजी से विकास हो रहे भारत में दूध देने वाले पशु बांझपन का शिकार हो जाते हैं। बांझ होने की वजह से वे पशु को जन्म दे नहीं पाते, जिसका असर उनके दूध देने की क्षमता पर साफ दिखता हैं।

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समस्या का समाधान 

लेकिन कहते है ऐसी कोई समस्या ही नहीं जिसका समाधान ना निकाला जा सके। ऐसा ही एक चमत्कार उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के किसान कर रहे हैं। शाहजहांपुर जिले के किसान एक ऐसी किट का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके प्रयोग से गाय-भैंस दोबारा दूध दे सकती हैं।

Injection for cow
Injection for cow



किट के इस्तेमाल के बाद होने लगा किसानों को लाभ

शाहजहांपुर से 30 किमी दूर बसे भारापुर गाँव में रहने वाले प्रमोद कुमार वर्मा के पास चार गाय और दो भैंसे हैं। प्रमोद बताते हैं कि मेरी एक गाय ने एक बच्चा देने के बाद दूध देना बंद कर दिया था। तब हमने इंड्यूज लेक्टेशन तकनीक (यानी दूध देने वाली किट) का प्रयोग किया। अब वो तीन से चार लीटर दूध दे रही है।

गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ.एससी सूद ने इस किट की खोज की थी। बच्चा नहीं देने वाली गाय-भैंस में इंड्यूज लेक्टेशन तकनीक के जरिए दूध पैदा  किया जाता है। मतलब निर्धारित कोर्स के अनुसार पशु को हार्मोन व स्टेरायड का इंजेक्शन दिया जाता है।





इसके कुछ दिन बाद वे पशु दूध देने के काबिल हो जाती है। इस किट के बारे में कृषि विज्ञान केंद्र के पशुधन वैज्ञानिक डॉ. टीबी यादव ने बताया ज्यादातर पशुपालक गाय-भैंस के बांझ होने के बाद छुट्टा छोड़ देते हैं या फिर उन्हें बेच देते हैं। ऐसे में यह किट लाभदायक है।

इसका ट्रीटमेंट लगभग 21 दिन तक चलता है। उसमें गाय को इंजेक्शन देने पड़ते हैं। यह किट का उपयोग पशुओं के वजन के अनुसार किया जाता है। इस प्रयोग से कई किसानों को लाभ भी मिला है।

दुधारु पशुओं में पोषक तत्वों की कमी के कारण बांझपन की समस्या होती हैं। लिहाजा यह किट पशुपालकों के लिए कारगार सिद्ध हो रही हैं। शाहजहांपुर के योगेश मिश्र इस तकनीक की मदद से अपने गाँव की पांच बांझ गायों का इलाज करा चुके हैं।




कितना खर्चा आता है

योगेश बताते हैं मेरे गाँव में लोगों ने दूध न देने पर उन्हें खाली छोड़ दिया। लेकिन जब उनके इस किट के बार में पता चला तब से उनको इस किट सही इस्तेमाल किया जिससे गाय उतना ही दूध दे रही है।

इस किट में आने वाले खर्च के बारे में योगश बताते हैं कि इस किट का पूरा खर्चा 1500 रुपए आता है। इस किट में पूरी जानकारी भी रहती है कि कितने दिन पर कितने इंजेक्शन लगने हैं। इस किट के प्रयोग में लापरवाही नहीं होनी चाहिए वरना नुकसान भी होता है।

यह किट किसी भी मेडिकल स्टोर में यह मिल सकती है।  बांझपन होने का कारण बताते हुए डॉ. टीबी यादव कहते हैंदुधारु पशुओं में पोषक तत्व (जिंक, कॉपर, कॉमनसोल्ट) की सबसे ज्यादा जरूरत होती है जो मिनिरल मिक्सचर पूरी करता है लेकिन ज्यादातर पशुपालक इस पर ध्यान नहीं देते हैं। महीने में दस से ज्यादा पशुपालक यह समस्या लेकर केंद्र में आते है।

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