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रतनजोत, पौधा एक फायदे अनेक, कम महेनत – कम लागत और कम देखभाल – फिर भी करेगा मालामाल

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रतनजोत पौधा, अंग्रेजी में इसे जेट्रोफा कहते है। रतनजोत से बायो डीजल बनता है जो कि पर्यावरण के लिए आशीर्वाद साबित हो सकता है। खासकर के भारत जैसे देश में जहां प्रदूषण का लेवल दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है ऐसे में इस पौधे की खेती करना अब अनिवार्य हो गया है। रहा है। यहीं वजह है कि रतनजोत की खेती बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकारें किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। इस पौधे का आयुर्वेद में भी महत्व बताया गया है। औषधी के रुप में ये कई रोगों को मिटाने में कारगर साबित हो रहा है। आईएं आपकों बताते है कि रतनजोत की खेती कैसे करते है।

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ज़मीन कैसी चाहिए

    • रतनजोत की खेती के लिए उपजाऊ और खराब (उसर भूमि), दोनो ही भूमि उचित है
    • जहां बारिश कम होती है वहां और जहां बारिश ज्यादा होती है वहां, दोनों ही जगह रतनजोत का पौधा जीवित रहता और फलता-फूलता है
    • जहां दूसरी फसलें नही ली जा सकतीं, वहां भी इसकी पैदावार ली जा सकती है
    • रतनजोत को सड़क के किनारे, रेलवे लाइन या नहर के किनारे लगा सकते हैं।




 रतनजोत की विशेषता

  • इसका पौधे बहुत उंचा नही होता जिससे फल और बीज इकट्ठा करने में दिक्कत नही होती – जमीन पर खडे होकर ही फल तोडे जा सकते हैं।
  • पौधा लगाने के लगभग दो वर्ष में फल आने लगते हैं
  • इसके पौधा लगभग ५० वर्ष तक फल पैदा करता है। बार-बार फसल लगाने की जरुरत नहीं पडती।
  • रतनजोत के पौधें को लगाना आसान है, ये तेजी से बढता है और देखरेख की बहुत कम जरूरत होती है।
  • इसे जानवर नही खाते और कीट नही लगते। इस कारण इसकी विशेष देखभाल नहीं करनी पडती।
  • यह किसी भी फसल का प्रतिस्पर्धी नहीं है, बल्कि यह उन फसलों की पैदावार बढाने में मदद करता है।

रतनजोत की खेती करने से फायदे

  • रतनजोत के बीज सस्ते मिलते है।
  • दूसरी फसल की तुलना में रतनजोत के बीजों में तेल की मात्रा तकरिबन ३७% ज्यादा होती है, यानिकी उतना ही ज्यादा मुनाफा।
  • 05 किग्रा जेट्रोफा के तेल से 1 किग्रा बायोडिजल पैदा होता है। जेट्रोफा का तेल जलाने पर धुआंरहित स्वच्छ लौ पैदा करता है। इसे बाजार में ना बेचे तब भी अपने घर में यूज कर सकते है।
  • इसकी खेती और उपयोग के लिये कोई तकनीक नही चाहिये




रतनजोत के उपयोग

  • जेट्रोफा के करीब १६०० उपयोग गिनाये गये हैं।
  • इसके पौधे भू-क्षरण रोकने के लिये काम आते हैं
  • जत्रोफा की जडें जमीन से फास्फोरस सोखने का काम करती हैं – इसका यह गुण अम्लीय भूमि के लिये वरदान है
  • ये पौधा जमीन पर पत्तियां गिराता है जो भूमि की उर्वरा-शक्ति को बढाता हैं
  • इसके बीजों से तेल निकालने के बाद जो खली बचती है वह उच्च कोटि की जैविक खाद है (नाइट्रोजन से भरपूर)। इसे जानवरों को भी खिलाया जा सकता है क्योकि यह प्रोटीन से भरपूर होती है।
  • ग्लीसरीन भी इसका एक सह-उत्पाद है।
  • जानवर और कीडे इससे प्राकृतिक रूप से ही दूर भागते हैं। इसलिये इसका उपयोग बागों और खेतों की रक्षा के लिये चारदीवारी के रूप में भी किया जाता है।

 बायोडिजल का उपयोग

  • इसके बीजों को पीसने से तेलप्राप्त होता है
  • इस तेल से वाहनों के लिये बायोडिजल बनाया जा सकता है
  • तेल को सीधे लालटेन में डालकर जलाया जा सकता है
  • तेल को जलाकर भोजन पकाने के काम में लिया जा सकता है
  • इसके तेल के अन्य उपयोग हैं – जलवायु संरक्षण, वार्निश, साबुन, जैव कीट-नाशक आदि

औषधीय उपयोग

  • इसके फूल और तने औषधीय गुणों के लिये जाने जाते हैं।
  • इसकी पत्तियां घाव पर लपेटने (ड्रेसिंग) के काम आती हैं।
  • इसके अलावा इससे चर्मरोगों की दवा, कैंसर, बाबासीर, ड्राप्सी, पक्षाघात, सर्पदंश, मच्छर भगाने की दवा तथा अन्य अनेक दवायें बनती हैं।
  • कब्ज या पेट से जूडी बिमारीयों के लिए रतनजोत का बीज वरदान है।
  • इसके छाल और जड़ो से ‘डाई’ और मोम बनायी जा सकती है।




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सवाल ये कि न्यूजपेपर, रेडियो, टीवी के बाद मीडिया को ऑनलाइन मीडिया का जो नया रूप मिला है उसके बाद अब क्या होगा? सवाल ये भी क्या जो मीडिया हाउसिस ने 200-300 पत्रकारों की टीम बैठाकर पोर्टल चला रहे हैं वो आने वाले समय में बड़ी टीम के बोझ को झेल पायेंगे? क्या आने वाले 5 से 8 साल में इनमें भी टीवी न्यूज़ की तरह ही छटनी होगी? सवाल ये भी क्या वाकई में 5 साल बाद ये पोर्टल अपने कर्मचारियों की सैलरी की जिम्मेदारियों के अलावा तकनीकी और प्रमोशन के स्तर पर बढ़ने वाले खर्चे को झेल पायेंगे? क्या वाकई में टीवी की रेटिंग फाइट की तरह ऑनलाइन मीडिया ट्रैफिक की लड़ाई में जिंदा रह पाएगा। कुल मिलाकर एक ही सवाल कि मीडिया के नए रूप ऑनलाइन मीडिया का अगला रूप क्या देखने को मिलेगा। शायद ये सवाल समय से काफी पहले पूछा गया लगे लेकिन सच्चाई ये है कि ऑनलाइन मीडिया के मामले में भारत बहुत देरी से एंटर हुआ है। इसलिए अतंर्राष्ट्रीय पर इस सवाल के जवाब की खोज भी शुरु हो चुकी है और कुछ हद तक जवाब भी मिल चुका है। जवाब मिला है UGC और PGC कॉन्टेंट मार्केट के रूप में।

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2 Comments

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