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मोदी सरकार कभी भी देश के 6 लाख अरबपति किसानों को भेज सकती है जेल। देश के करोडों करोड़पतियों से भी ज्यादा अमीर हैं 6 लाख भारतीय किसान। 2007 से 2012 के बीच कैसे कमाएं 3 अरब रूपए सालाना, मोदी की पड़ चुकी हैं इन किसानों पर तिरछी नज़र

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देश का हर किसान अब लखपति या करोड़पति नहीं बल्कि अरबपति हो चुका है। वो खेती से ही हर साल 3 अरब रूपए कमा लेता है। हैरत में ना पड़े। आपने बिल्कुल सही पढ़ा है। लेकिन ये बात हम नहीं बल्कि देश के आयकर विभाग और भारत सरकार का रिकॉर्ड कह रहा है।

दरअसल, मोदी ने 500 और 1000 के नोट को बंद करना का जो हैरतअंगेज फैसला लिया, उसके पीछे कई कारणों में से एक बड़ा कारण ये भी है। ये खुलासा इतना हैरतअंगेज है कि अगर आप भी इससे किसी भी तरह से जुड़ें हुए हैं तो तय मानिए कि आज नहीं तो कल आपको जेल की हवा ही खानी पड़ेगी।




आयकर विभाग के पूर्व अधिकारी है विजय शर्मा। विजय शर्मा ने RTI से भारतीय किसानों की कमाई के बारे में जो जानकारी हासिल की, उसने देश और दुनिया को हिलाकर रख दिया है। इसी आरटीआई के आधार पर पटना हाइकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर हो चुकी हैं यानी आज नहीं तो कल देश के ये 6 लाख अरबपति किसान जेल में बैठे चक्की पीसते नजर आ सकते हैं।

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कैसे 3 लाख रूपए सालाना कमाने वाले 6 लाख किसान अचानक से कमाने लगे 3 अरब रूपए सालाना?

  1. 2011 में करीब 6.5 लाख से ज़्यादा लोगों ने क़रीब 20 करोड़ करोड़ रुपये की कुल कृषि आय घोषित की यानी औसतन प्रति व्यक्ति 3 अरब रूपए सालाना से ज़्यादा की आमदनी। 2 बार करोड़-करोड़ शब्द पढ़कर लिखे टाइपिंग की गलती ना समझें। ये बिल्कुल सही लिखा है। ये रकम भारत की कुल जीडीपी के 16 गुना से भी ज़्यादा बड़ी रक़म है। भारत की मौजूदा जीडीपी क़रीब 61 करोड़ करोड़ रुपये है। ये किसी भी सूरत में संभव ही नहीं है।
  1. 20 करोड़-करोड़ को 656944 (इतने किसानों ने अपने को अरबपति घोषित किया) से भाग दीजिए, तो आपको 304 करोड़ रुपये प्रति किसान की कमाई का औसत आएगा। यानी 2011 में ही इनमें से हर किसान ने 3 अरब से रूपए से ज्यादा खेती से ही कमाया।
  1. अब थोड़ा पिछे चलते हैं। 2007 में 78,000 ज़्यादा लोगों ने 2361 करोड़ रुपये की कृषि से आय घोषित की थी यानी औसतन प्रति व्यक्ति सिर्फ़ 3 लाख रुपये सालाना। ये बिल्कुल संभव भी है। एक किसान औसतन 3 लाख रूपए सालाना कमा सकता है। लेकिन अगले ही साल किसानों की संख्या 78 हजार से बढ़कर अचानक 2 लाख से ज्यादा हो गई। हैरत की बात ये कि इन 2 लाख किसानों ने 17 हजार रूपए भी खेती से एक ही साल में कमा लिए। यानी 2 लाख किसानों में हर किसान ने 8.32 लाख रूपए सालाना कमाए। 2009 में भी ये आंकड़ा इसके ही आसपास रहा।
  2. लेकिन 2010 में फिर से संख्या दो गुनी हो गई। अब 2 लाख से बढ़कर किसान 4 लाख हो गए और इनकी कमाई पहले 5 गुना पढ़ गई। यानी 17 हजार करोड़ से बढ़कर 83 हजार करोड़ यानी प्रति किसान करीब 20 लाख रूपए सालाना।
  3. 2012 में खेती से अरबों की कमाई करने वाले किसानों की संख्या 8 लाख के पार चली गई।

इन आंकड़ों का सीधा सा मतलब है कि 2007 से 2012 के बीच देश में काले धन को खेती के जरीए सफेद किया गया है। अब इन्हीं 6 से 8 लाख किसानों पर मोदी सरकार की नजर हैं।

अगर आने वाले समय में आपको इन किसानों को जेलों में भरने की ख़बर आएगा तो कोई हैरत की बात नहीं।




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