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खेती की नई तकनीक का हुआ हरियाणा में सफल परीक्षण, ज़ीरो टिलेज तकनीक (Zero Tillage Machine) से 200 किसानों को मिला 16 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन, राज्य सरकार देगी इस तकनीक पर बड़ी सब्सिडी (वीडियो देखें)

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खेती में अब आए दिन कोई ना कोई ना तकनीक ईजाद हो रही है। ये अच्छा भी है क्योंकि इनसे खेती की ना केवल लागत कम होती है बल्कि मुनाफा भी बढ़ता है।

अब ज़ीरो टिलेज तकनीक (Zero Tillage Machine) खोज ली गई है। कृषि वैज्ञानिकों ने हरियाणा के 200 किसानों की खेती की जमीन पर इसका परीक्षण सफलता के साथ किया। परीक्षण में रिजल्ट बहुत अच्छे आए और किसानों को नई तकनीक की वजह से 16 प्रतिशत ज्यादा गेंहू का उत्पादन मिला। इसलिए अब इसे हरियाणा सरकार भी बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देने के सुझाव पर विचार कर रही है।




क्या है ज़ीरो टिलेज तकनीक (Zero Tillage Machine) और क्या है इसके फायदें?

  1. ज़ीरो टिलेज तकनीक (Zero Tillage Technology) में धान की कटाई के बाद किसान खेत में लगे खरपतवार को हटाने के बजाय उन्हीं के साथ नई फसल के बीज को बो देता है।
  2. परंपरागत तरीके से खेती करने पर खरपतवार हटाने के लिए मजूदरों का खर्च बढ़ जाता है, जो कि अब जीरो टिलेज तकनीक में नहीं होता। यानी मजदूरी बच जाती है।
  3. परंपरागत खेती में खरपतवार हटाने के बाद खेत की जुताई के लिए ट्रैक्टर पर खर्चा करना पड़ता है, जबकि जीरो टिलेज में जुताई करने की जरूरत ही नहीं होती। यानी लागत बच जाती है।
  4. पुराने तरीके से खेती करने में रोटरी से जुताई करनी पड़ती है जबकि नई तकनीक में इसकी जरुरत ही नहीं होती। यानी फिर से लागत बच गई।
  5. बहुत बड़ा फायदा ये कि जनवरी-फरवरी में होने वाली बेमौसम बारिश का इस तकनीक से की गई खेती पर या तो कोई असर नहीं पड़ता या फिर थोड़ा ही नुकसान होता है। दरअसल, एक विशेष प्रकार की मशीन की मदद से जीरो टिलेज तकनीक में पहले से तय की गई एक निश्चित गहराई पर गेंहू को बिना जोते ही धान के खरपतवार के साथ बो दिया जाता है। ऐसे में जब बारिश होती है तो धान के खरपतवार इन बीजों की रक्षा करने के साथ साथ पानी को तेजी से सोखकर फसल को नुकसान होने से बचा लेते हैं।




Tag : Zero Tillage Machine, Zero Tillage technology kaya hai aur kaise hoti hai

 

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मशरूम की देश और दुनिया में खपत बहुत तेजी से बढ़ी है। लेकिन जितनी रफ्तार से इसकी खपत बढ़ी है उतनी रफ्तार से इसकी खेती करने वालों की संख्या नहीं बढ़ी। हालांकि इसे करने में रूचि रखने वालों की कोई कमी नहीं है। दरअसल इसमें रूचि रखने वालों को पता नहीं है कि इसकी ट्रेनिंग कब, कहां, कैसे होती है और कौन इसकी सही ट्रेनिंग दे सकता है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि भारत सरकार का DMR यानी Directorate of Mushroom Research खुद इसकी ट्रेनिंग देश में अलग अलग जगहों पर दे रहा है। इसकी ट्रेनिंग के लिए कैसे, कब और कहां एप्लाई करें, इसकी पूरी जानकारी आज आप किसानख़बर.कॉम के इस वीडियो में सिखेंगे। Note:- आपसे अनुरोध है कि किसानख़बर.कॉम की इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर करें ताकि सभी लोगों को इसका लाभ मिल सके। साथ में फेसबुक पेज को लाइक भी करें, ताकि आपको हमेशा ऐसी अच्छी ख़बरें तुरंत मिलती रहें। mushroom cultivation in India, mushroom training kahan hoti hai, mushroom ki kheti main faayda, mushroom farming investment and profit

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