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एक व्यक्ति ने सोच बदली, तो किस्मत भी बदल गई। सिर्फ 500 रूपए की लागत पर हर साल कमाने लगा 5 लाख रूपए

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गांव-देहात में एक बात बहुत कही-सुनी जाती है कि अगर आप सालों साल एक ही ढर्रे पर चलते रहे या लकीर के फकीर बने रहे, तो जीवन में कुछ खास हासिल नहीं होगा। किस्तम बदलने के लिए सोच बदलनी पड़ती है।

इसी बात पर राजस्थान के एक किसान ने अमल किया और बदल गई उनकी किस्मत। घाटे में रहने वाला यह किसान अब लाखों कमाने लगा।

दरअसल, राजस्थान के भरतपुर जिले में एक गांव है गोविंदपुरा। इस गांव में भगवान सिंह नाम से एक किसान सालों से सरसों की खेती करते रहे हैं। क्योंकि पिताजी और दादाजी भी यही करते थे इसलिए वो भी सरसों करते रहे। लेकिन कई सालों से उनको इसमें कोई फायदा नहीं होता था। अगर होता तो नाम मात्र का। आसपास के इलाके में भी सभी सरसों करते रहे हैं।




ऐसे में लकीर के फकीर बनकर बैठे भगवान सिंह ने नई लकीर खींचने का विचार किया। यानी सरसों छोड़कर कुछ नया करने का।

उनके पास 7 बीघा खेत हैं। भगवान सिंह ने सिर्फ 500 रूपए के अमरूद के बीज लेकर खेत में बो दिए। उन्होंने लखनऊ L-39 वैराइटी का इस्तेमाल किया था। इससे 300 पौधे पूरी तरह से विकसित होकर अमरूद देने लगे।

जब ये बाजार में बिकने पहुंचे तो वैरा न्यारे हो गए। भगवान के अमरूद में बीज ना बहुत कम थे और ये स्वाद में बहुत ही मीठा था। ऐसे में उनका पूरा माल हाथोंहाथ बिक गया।




ये तो सिर्फ शुरुआत थी, जो 2007 में शुरु हुई थी। अब उनके अमरूद की डिमांड यूपी, दिल्ली, राजस्थान जैसे राज्यों में खूब है। आगरा, वृंदावन-मथुरा और दिल्ली में इनको जबरदस्त डिमांड हमेशा रहती है। अब वो 500 की लागत पर 5 लख रूपए आसानी से कमा लेते हैं। ये सिलसिला पिछले 8 साल से यूं ही चल रहा है।

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