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खरगौन का 26 साल का एक युवा पॉली हाउस से कमाता है सालाना 1 करोड़ 60 लाख रूपए। नौकरी छोड़ कर खेती से जुड़ा काम करने का लिया था रिस्क

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जिंदगी के खेल में जो रिस्क लेता है वहीं खेल जीत भी लेता है। ये बात खरगौन के 26 साल के एक ऐसे लड़के ने साबित कर दी जिसने MAC की पढ़ाई की थी नौकरी करने के लिए। नौकरी भी की लेकिन 4 साल। उसके  बाद खेती (पॉली हाउस) में खुद कुछ कमाल करने का ऐसा जूनुन चढ़ा कि वो फिर ऊतरा ही नहीं।




किसने और क्या कमाल किया

मध्य प्रदेश में खरगौन नाम का जिला है। इस जिले में नांद्रा नाम के एक गांव में ओम प्रकाश नाम के एक युवा किसान ने 4 साल पहले नौकरी छोड़कर अपने इलाके में खेती में कुछ नया करने की एक छोटी सी कोशिश शुरु की।

ओम प्रकाश ने गांव में ही अपने खेत पर 1 एकड़ में पॉली हाउस (नर्सरी) लगाई और उसमें तरह तरह की सब्जियों के पौधे तैयार करने शुरु कर दिए।

जैसे जैसे समय गुजरता गया, ओम प्रकाश की नर्सरी में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी और मुनाफा होने लगा। पहले वो खुद ही नर्सरी का सारा काम देखते थे, लेकिन अब उन्होंने कई लोगों को अपनी नर्सरी में काम पर रख लिया।

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ओम प्रकाश ने राज्य सरकार के उद्धान विभाग से 18 लाख 67 हजार रूपए के सरकारी अनुदान की मदद से अपनी नर्सरी को और बड़ा किया। पहले ही साल में ओम प्रकाश की नर्सरी से कमाई 70 लाख रूपए हो गई। सभी खर्चे निकालने के बाद 13 लाख रूपए का शुद्ध मुनाफा हुआ। यह ओम प्रकाश को नौकरी में मिलने वाली सालाना सैलरी का 4-5 गुना था।

सिर्फ जैविक खाद के इस्तेमाल की वजह से ओम प्रकाश की नर्सरी के पौधे ज्यादा होते हैं। इस वजह से अब खरगौन ही नहीं बल्कि दूसरे शहरों और दूसरे राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, यूपी और छत्तीगढ़ में वो अपने पौधे एक्सपोर्ट भी कर रहे हैं। आज की तारीख में ओम प्रकाश की नर्सरी से सालाना टर्नओवर 1 करोड़ 60 लाख रूपए हो गया है।

हाईब्रिड पपीता, टमाटर, प्याज, बैगन, शिमला मिर्च, गोभी, करेला, लौकी से लेकर तरबूज-खरबूज और गेंदा के फूल के पौधे भी वो अब एक्सपोर्ट करने लगे हैं।

अच्छी बात ये है कि इस नर्सरी से आस पास के गांव के कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।

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