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गाय अब सिर्फ बछियों को ही देगी जन्म, दूध का होगा कई गुना ज्यादा उत्पादन, पशुपालक को मिलेगा ज्यादा लाभ

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सरकार ने पशुपालन का काम करने वाले किसानों या ग्रामीण लोगों की बहुत बड़ी समस्या का समाधान खोज निकाला है। दरअसल अभी तक जो लोग गाय-भैंस पालते थे और दूध उत्पादन से अपनी रोजी रोटी कमाते थे, उनके लिए बड़ी परेशी होती थी जब गाय बछिया की बजाय बछड़े को जन्म देती थी।

बछड़ा होने से गाय के मालिक को कोई फायदा नहीं होता था क्योंकि उस दूध तो बछिया से ही मिलना होता है। जिसे बेचकर वो कई साल तक पैसे कमाता है।

लेकिन अब ये समस्या खत्म हो जाएगी। दरअसल सरकार ने  करोड़ रूपए की लागत से दूध उत्पादन की एक खास योजना को मंजूरी दे दी है।




केंद्रीय कृषि मंत्रालय के पशुपालन विभाग के सचिव देवेंद्र चौधीर के मुताबिक इस तकनीक के इस्तेमाल से देश में दूध का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ेगा। अभी 500 से 800 मिली लीटर का उत्पादन होता है जबकि सरकार का लक्ष्य 3.4 लीटर तक पहुंचने का है।




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इस योजना के तहत अब गायों से जरूरत पड़ने पर सिर्फ बछिया को ही जन्म दिलवाया जा सकेगा। इसके लिए अमेरिका की एक कंपनी से साथ करार किया गया है। इस कंपनी के पास ऐसी तकनीक है जिसके इस्तेमाल से गाय जरूरत पड़ने पर सिर्फ बछिया को ही जन्म देती है।

अगर वैज्ञानिक भाषा में बात करें तो सीमन में वाई क्रोमोजोम को हटा दिया जाता है, जिसकी वजह से बछड़ा पैदा होता है। लेकिन एक्स क्रोमोजोम को बचाकर रखा जाता है जिसकी वजह से गाय बछिया को जन्म देती है।

Tags : cow, cow degi sirf bachdo ko janam, cow ke liye sarkari yojana

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सवाल ये कि न्यूजपेपर, रेडियो, टीवी के बाद मीडिया को ऑनलाइन मीडिया का जो नया रूप मिला है उसके बाद अब क्या होगा? सवाल ये भी क्या जो मीडिया हाउसिस ने 200-300 पत्रकारों की टीम बैठाकर पोर्टल चला रहे हैं वो आने वाले समय में बड़ी टीम के बोझ को झेल पायेंगे? क्या आने वाले 5 से 8 साल में इनमें भी टीवी न्यूज़ की तरह ही छटनी होगी? सवाल ये भी क्या वाकई में 5 साल बाद ये पोर्टल अपने कर्मचारियों की सैलरी की जिम्मेदारियों के अलावा तकनीकी और प्रमोशन के स्तर पर बढ़ने वाले खर्चे को झेल पायेंगे? क्या वाकई में टीवी की रेटिंग फाइट की तरह ऑनलाइन मीडिया ट्रैफिक की लड़ाई में जिंदा रह पाएगा। कुल मिलाकर एक ही सवाल कि मीडिया के नए रूप ऑनलाइन मीडिया का अगला रूप क्या देखने को मिलेगा। शायद ये सवाल समय से काफी पहले पूछा गया लगे लेकिन सच्चाई ये है कि ऑनलाइन मीडिया के मामले में भारत बहुत देरी से एंटर हुआ है। इसलिए अतंर्राष्ट्रीय पर इस सवाल के जवाब की खोज भी शुरु हो चुकी है और कुछ हद तक जवाब भी मिल चुका है। जवाब मिला है UGC और PGC कॉन्टेंट मार्केट के रूप में।

 

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2 Comments

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