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अक्टूबर में बैंगन लगाओ, 2 महीने बाद छप्पर फाड़ कमाई पाओ। आधा किलो बीज में 400 कुंटल प्रति हेक्टेयर तक का जबरदस्त उत्पादन, बैंगन में कीटों से बचाव का इलाज

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ये अक्टूबर का महीना है और अगर इस महीने में आप आलू या बाकी कोई फसल ना लगाकर कुछ नया ट्राई करना चाह रहे हैं, तो सिर्फ 2 महीने में ही अच्छी कमाई बैंगन की खेती से की जा सकती है।

लोगों को बैंगन का भर्ता खूब पसंद है। खासतौर पर सर्दियों के दिनों में।

अगर अच्छे किस्म के बैंगन के बीज खेत में बोए जाएं और कीटों से सही बचाव हो जाए, तो फिर बैंगन को मालामाल कर सकता है।




कब होती है बैंगन की खेती

सितम्बर-अक्टूबर के महीने में पौध की रोपाई की जाती है। इसके करीब 2 महीने बाद यानी दिसम्बर-जनवरी में बैंगन की फसल तैयार हो जाती है। यानी बैंगन तोड़कर बाजार में बेचे जा सकते हैं।

उत्पादन

बैंगन का अगर ज्यादा उत्पादन चाहिए तो 4 किस्म बहुत ही जबरदस्त साबित हो सकती है। पूसा पर्पल राउंड, पूसा हाईब्रिड-6, पूसा अनमोल और पूसा पर्पल लोंग में से आप किसी भी चुन सकते हैं। एक हेक्टेयर में करीब 450 से 500 ग्राम बीज डालने पर करीब 400 कुंटर प्रति हेक्टेयर तक का उत्पादन मिल जाता है।

अगर आप संकर किस्म का इस्तेमाल करते हैं तो एक हेक्टेयर के लिए 200 ग्राम बीज काफी होता है।




कैसे लगाएं बैंगन

बैंगन का अगर ज्यादा उत्पदान चाहिए, तो 2 पौधों के बीच की दूरी का खास ध्यान रखा होता है। कृषइ वैज्ञानिकों के मुताबिक दो पौधों और दो कतार के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर होनी ही चाहिए।

कौन सा कीट कैसे करता है नुकसान

सुंडी नाम का कीट बैंगन का बड़ा दुश्मन माना जाता है। ये बैंगन के फल को नुकसान पहुंचाता है। फिर यह तने में घुस जाता है और इसकी वजह से पौधे मुरझाकर सूख जाते हैं। जबकि बड़े पौधे बौने रह जाते हैं।




कीटों से कैसे करें बचाव

अगर पौधा मुरझाने लगे या फिर सूखने लगे, तो इसे नीचे से करीब आधा इंच काटकर खराब हिस्से को फेंक दे और सही हिस्से को जमीन में गाढ़ दें।

एक हेक्टेयर में बैंगन की फसल के लिए कर्बोसल्फान 25 ईसी की 1.5 लीटर मात्रा को 800 से 1000 लीटर पानी में मिलाकर घोल बना लें। फिर करीब 10-15 दिन के अंतराल पर इसे फसल पर छिड़क दें।

ये भी पढ़ें – फसल को होने वाले तरह तरह के नुकसान से कैसे बचाएं




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सवाल ये कि न्यूजपेपर, रेडियो, टीवी के बाद मीडिया को ऑनलाइन मीडिया का जो नया रूप मिला है उसके बाद अब क्या होगा? सवाल ये भी क्या जो मीडिया हाउसिस ने 200-300 पत्रकारों की टीम बैठाकर पोर्टल चला रहे हैं वो आने वाले समय में बड़ी टीम के बोझ को झेल पायेंगे? क्या आने वाले 5 से 8 साल में इनमें भी टीवी न्यूज़ की तरह ही छटनी होगी? सवाल ये भी क्या वाकई में 5 साल बाद ये पोर्टल अपने कर्मचारियों की सैलरी की जिम्मेदारियों के अलावा तकनीकी और प्रमोशन के स्तर पर बढ़ने वाले खर्चे को झेल पायेंगे? क्या वाकई में टीवी की रेटिंग फाइट की तरह ऑनलाइन मीडिया ट्रैफिक की लड़ाई में जिंदा रह पाएगा। कुल मिलाकर एक ही सवाल कि मीडिया के नए रूप ऑनलाइन मीडिया का अगला रूप क्या देखने को मिलेगा। शायद ये सवाल समय से काफी पहले पूछा गया लगे लेकिन सच्चाई ये है कि ऑनलाइन मीडिया के मामले में भारत बहुत देरी से एंटर हुआ है। इसलिए अतंर्राष्ट्रीय पर इस सवाल के जवाब की खोज भी शुरु हो चुकी है और कुछ हद तक जवाब भी मिल चुका है। जवाब मिला है UGC और PGC कॉन्टेंट मार्केट के रूप में।

 

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3 Comments

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