Press "Enter" to skip to content

कश्मीर में आतंकवादी ही नहीं, युवा सफल किसान भी हैं। पहले महीने के 2 हजार रूपए कमाने वाला गनी अब कमाता है 1.5 लाख रूपए महीने

Hits: 7995

जम्मू-कश्मीर का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के जेहन में दो ही तस्वीरें तुरंत आती है। पहली – खूबसूरत वादियों वाला कश्मीर और दूसरा आतंकवादियों के आतंक से ढाई दशक से परेशान कश्मीर। आतंकवादियों की आतंक की गोली की गूंज में कश्मीर में खेती बाड़ी की दुनिया में सफलता का मुकाम हासिल वाले किसानों की सफलता की गूंज दबकर रह गई है।

लेकिन किसानख़बर.कॉम हमेशा की तरह इस बार भी आपके लिए लाया है एक और युवा किसान की सफलता की शानदार सच्ची कहानी। दक्षिण कश्मीर में कुलगाम जिले से करीब 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित है बोगुंड गांव। इस गांव में 28 साल का एक युवा किसान है गौहर अहमद गनी।




Successful Farmer from Kashmir 4
Successful Farmer from Kashmir

गनी के पास करीब 4 बीघा खेत है यानी 1 एकड़ से भी कम। गनी का परिवार पारंपरिक रूप से खरीफ में चावल और रबी के मौसम में भूरी सरसों की खेती करता था। अपर्याप्त आय की समस्या ने गौहर के साथ ही उनके भाई तारक अहमद को नए विकल्प की तलाश करने के लिए प्रेरित किया।

गौहर केवीके कुलगाम द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों व जागरूकता कैंप में भाग लेने के साथ ही केन्द्र के वैज्ञानिकों से बातचीत भी किया करते थे। इस संपर्क ने उन्हें कृषि के विविधीकरण की तरफ आकर्षित किया। छोटे भाइयों व महिला सदस्यों सहित उत्साहित परिवार ने मुर्गी पालन, मछली पालन, बागवानी और पुष्पोत्पादन में केवीके कुलगाम के तकनीकी सहयोग से लाभकारी खेती की नई विधियों को अपनाया। इस प्रकार से केवीके ने  गनी को विभिन्न योजनाओं की जानकारी तथा खेती के लिए महत्वपूर्ण आदान प्रदान किए। इनके सहयोग से उन्होंने वैज्ञानिक विधि पर आधारित समन्वित खेती को अपनाया।

Successful Farmer from Kashmir 2
Successful Farmer from Kashmir

उन्होंने मात्स्यिकी विभाग के सहयोग से लगभग 1 बीघा आकार के तालाब में मछली पालन शुरू किया। उनकी लगन एवं रूचि को देखते हुए एसकेयूएएसटी- कश्मीर ने उन्हें कुक्कुट पालन के लिए चूजे दिए। कुक्कुट किस्म ‘वनराज’ एवं ‘कुरोलियर’ की भारी मांग की वजह से उन्होंने कुक्कुट विकास विभाग से अतिरिक्त चुजों की आपूर्ति के लिए संपर्क किया। इसके अलावा कृषि एवं बागवानी विभागों ने दो पॉलीहाउस और ऑफ-सीजन (गैर-मौसमी) सब्जी उत्पादन के लिए आदानों के साथ ही बाजार में जल्दी पौधों की आपूर्ति के लिए नर्सरी स्थापना में भी सहयोग किया।

हाल ही में पुष्पोत्पादन विभाग द्वारा उन्हें चार पॉलीहाउस और फूल व सजावटी पौधे उगाने वाले चार गमले दिए गए। केवीके ने उन्हें कृषि उत्पादों की बिक्री में भी सहयोग दिया।  गनी ने क्षेत्र में भारी मांग वाले लॉन घास और सजावटी पौधों का भी बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू किया।




पहले और अब कमाई

Successful Farmer from Kashmir 1
Successful Farmer from Kashmir

Whatsapp Farmers Networkइससे पहले गनी की आय लगभग 23,000 रु. सालाना थी। कुक्कुट पालन, मात्स्यिकी, पुष्पोत्पादन और खेती के एकीकरण द्वारा वर्ष 2013 में उनकी वार्षिक आय लगभग 2.77 लाख रु. हो गई। इन प्रयासों के कारण अब उनके परिवार की मासिक आय बढ़कर 1.6 लाख रु. तथा वार्षिक आय लगभग 19 लाख रु हो चुकी है। 19 लाख रुपये की इस वार्षिक आय में मछली पालन से 1.36 लाख रु., कुक्कुट पालन से 7.24 लाख रु., गमले वाले फूलों व सब्जियों के पौधों की बिक्री से 1.52 लाख रु. तथा बागवानी से 9.0 लाख रु. का योगदान है।




गनी की इस सफलता से प्रभावित होकर केवीके ने ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए उन्हें अतिथि प्रशिक्षक के तौर पर आमंत्रित किया है। समन्वित खेती के प्रसार के लिए उन्होंने अन्य किसानों को अपने खेत का दौरा करने की सुविधा प्रदान की है। इन उपलब्धियों के कारण  गौहर अहमद गनी अपने क्षेत्र में ‘आदर्श किसान’ के रूप में प्रसिद्ध हैं।

इस लेख के बारे में आपके जो भी विचार है वो आप नीचे कॉमेंट बॉक्स में लिखने सकते हैं।

[wp-like-lock] your content [/wp-like-lock]

[facebook_likebox url=”http://www.facebook.com/kisankhabar” width=”300″ height=”200″ color=”light” faces=”true” stream=”false” header=”false” border=”true”]

matka khad kaya hoti hai, matka khad kaise banti hai

बहुत ही आसानी से सिर्फ 1 हफ्ते में मुफ्त में घर पर ही बनाएं ‘मटका खाद’, मटका खाद के 6 बड़े फायदे, मटका खाद से बढ़ता है उत्पादन और घटती है लागत (Video देखें)

स्टोरी पर कृप्या कॉमेंट करें

खेती की अच्छी ख़बरें फेसबुक पर पाने के लिए Like करें

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Loading...
WhatsApp chat