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अब भारत की गाय भी देंगी ब्राजील की गायों की तरह एक दिन में 80 लीटर दूध, सफल हो गया परीक्षण, होशंगाबाद में सेंटर खोल रही है सरकार

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मध्यप्रदेश में गायों की नस्ल सुधारने के लिए अब सॉटेंड सेक्सड सीमन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे दुधारू गाय की नस्ल में सुधार तो होगा ही दूध उत्पादन भी बढ़ेगा। केंद्र सरकार देसी नस्ल की गायों में इस तकनीक के प्रयोग से मादा या नर बछड़े पैदा करने को लेकर रिसर्च करवा रही है।




इधर, सरकार ने ब्राजील नस्ल के सांड का सीमन सैंपल लेकर उसे देसी गाय में प्रत्यारोपित कराया है, इसके रिजल्ट भी आ गए हैं। यह गाय अब रोजाना एक समय में अधिकतम 40 लीटर दूध देगी।

इसका उद्देश्य यह है कि 2022 तक किसान की आमदनी दोगुना हो जाए। मध्यप्रदेश में ज्यादा दूध देने वाली गायों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम ने ब्राजील से गिर और जर्सी नस्ल के सांडों के आठ हजार सीमन डोज मंगवाए हैं।

पशुपालन विभाग के मुताबिक ब्राजील में गिर और जर्सी नस्ल की गाय 35-40 लीटर दूध एक समय में देती है। जबकि मप्र में इन नस्लों की गायों से एक टाइम में अधिकतम पांच लीटर दूध ही मिलता है। राज्यों की गायों में दुग्ध उत्पादन की क्षमता कम होने का करण उन्हें ज्यादा दूध उत्पादन वाले सांड का सीमन न मिलना है। इस कारण गिर और जर्सी नस्ल की सांड के आठ हजार सीमन डोज ब्राजील से मंगवाए हैं।




इस सीमन को पशु चिकित्सालयों और गर्भाधान क्लीनिकों के माध्यम से अच्छी गायों (ज्यादा दूध देने वाली) के गर्भाशय में स्थापित कर भ्रूण तैयार किए जाएंगे। ऐसा गायों की नस्ल सुधारने के लिए करेंगे। बाद में यह भ्रूण सामान्य गाय के गर्भाशय में शिफ्ट करा दिए जाएंगे। इससे न केवल गाय की नस्ल में सुधार होगा, बल्कि दूध उत्पादन भी बढ़ेगा।

पशुपालन विभाग के डॉक्टरों के मुताबिक सीमन से ज्यादा पशुओं को गर्भाधन कराया जा सकता है, लागत भी कम आती है। इसलिए सरकार ने सीमन लाने का फैसला किया है।

कामधेनू ब्रीडिंग सेंटर होशंगाबाद के कीरतपुर में खुलेगा। प्रदेश में सॉर्टेंड सेक्सड सीमन तकनीक का उपयोग अभी जर्सी और एचएफ गाय में किया जाएगा।




देसी नस्ल की गायों में इस तकनीक के उपयोग से मादा या नर बछड़े पैदा करने को लेकर केंद्र सरकार रिचर्स करवा रही है। इस दिशा में काफी काम भी हो चुका है। केंद्र सरकार ने सीएसएस (सेक्स सॉटेंड सीमन) तकनीक के प्रयोग की मंजूरी दी है। मादा बछड़े ज्यादा पैदा होने पर दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा। मौजूदा समय में पंजाब व हरियाणा में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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