Plastic Mulching

Plastic Mulching कैसे होती है, क्या फायदे हैं, कितनी लागत और सरकार की अनुदान, ये सब विस्तार से जाने इस रिपोर्ट में

कैसे करें ताजा ख़बर नई तकनीक

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21वीं सदी में खेती की बात आते ही झट से आपके मन में सवाल आता है कि अब कौन सी तकनीक है जो खेतों में उत्पादन बढ़ा सकती है और किसान की जेब भर सकती है। नई तकनीकों की लंबी फेहरिस्त में इस बार किसानखबर.कॉम आपके लिए लेकर आया है प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक (Plastic Mulching) की पूरी जानकारी। 




प्लास्टिक मल्चिंग क्या है।

खेत में पौधों की जमीन को चारों तरफ से प्लास्टिक की एक फिल्म के जरिए सही ढंग से कवर करने (ढकने) की तकनीक को प्लास्टिक मल्चिंग कहते हैं। यह फिल्म कई साइज, क्वालिटी और कई रंगों में बाजार में मिलती है।

Plastic Mulching 3इस तकनीक का क्या फ़ायदा होता है।

अगर आप मिट्टी में कम नमी और मिट्टी के कटाव से परेशान हैं तो ये तकनीक आपके लिए बेहद ही कारगर साबित हो सकती है। इस तकनीक के जरिए खेत में पानी की नमी को बनाये रखने में तो मदद मिलती ही है साथ ही सूरज की तेज धूप के कारण मिट्टी से पानी सोख लेने की समस्या से भी निजात मिल जाती है।

इस तकनीक की मदद से खेत में मिटटी का कटाव रोकने के साथ साथ खतपतवार को भी सफलतापूर्वक रोका जा सकता है।

अगर आप बागवानी करते हैं तो फिर आपको प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक से बागवानी में होने वाले खतपतवार को रोकने के अलावा पोधों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने में बहुत मदद मिलेगी। इसके अलावा जमीन के कठोर होने की परेशानी भी खत्म होती है और पौधों की जड़ों का विकास भी अच्छे से होता है।

Plastic Mulching 4कैसे होता है सब्जियों की फसल में प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल

जिस खेत में सब्जी वाली फसल लगानी हें उसे पहले अच्छे से जुताई कर ले। इस बीच मिट्टी की जांच करवा लें। जांच की रिपोर्ट के हिसाब से जोते हुए खेत में गोबर की खाद उचित मात्रा में डाल दें। इसके बाद खेत में उठी हुई क्यारियां बनाएं। फिर उनके ऊपर ड्रिप सिचाई की पाइप लाइन को बिछाए।

सब्जियों की खेती के लिए 25 से 30 माइक्रोन लास्टिक मल्च फिल्म बेहतर होती है। इस फिल्म को उचित तरीके से बिछाते जाएं और फिल्म के दोनों किनारों को मिटटी की परत से दबाते जाएं। इसे आप ट्रैक्टर से चलने वाली मशीन से भी दबा सकते हैं।

इसके बाद आपको उस फिल्म पर गोलाई में पाइप से दो पौधों की बराबर दूरी तय करके छेद करने होंगे। फिर इन छेंदों बीज या नर्सरी में तैयार पौधों का रोपण करना होगा।




फल वाली फसल में कैसे होता है प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल

Plastic Mulching 5फल वाले पौधों के लिए 100 माइक्रोन की लास्टिक की फिल्म मल्च अच्छी रहती है। अगर आपने खेत में फलदार पौधे लगाएं हैं तो फिर इसका इस्तेमाल वहां तक करिए जहां तक पौधे की छाव रहेगी। इसके लिए फिल्म मल्च की सही लम्बाई-चौड़ाई में काट लें। इसके बाद पौधों के नीचे के नीचे उग रही घास और खरपतवार को पूरी तरह हटा दें।

फिर सिंचाई का नली को सही ढंग से सेट करने के बाद 100 माइक्रोन की लास्टिक की फिल्म मल्च को पौधों के तने के आसपास अच्छे से लगाना होता है। इसके बाद उसके चारो कोनो को 6 से 8 इंच तक मिटटी की परत से ढकना जरूरी होगा।

 प्लास्टिक मल्चिंग करते समय क्या सावधानियां बरतें। 

  1. प्लास्टिक फिल्म हमेशा सुबह या शाम के समय लगानी चाहिए।
  2. फिल्म में ज्यादा तनाव यानी टाइट नहीं लगानी चाहिए। उसको थोड़ा ढीला छोड़ना चाहिए।
  3. फिल्म में जो भी सल हो उसे निकलने के बाद ही मिटटी चढ़ावे।
  4. फिल्म में छेद करते वक्त सावधानी से करें और सिचाई नली का ध्यान रख के लगाएं।
  5. छेद एक जैसे हो और फिल्म न फटे।
  6. मिटटी चढाने में दोनों साइड एक जैसी रखें
  7. फिल्म की घड़ी (फोल्ड करना) हमेशा गोलाई में करें
  8. फिल्म को फटने से बचाएं, ताकि उसका उपयोग दूसरी बार भी कर पाए और उपयोग होने के बाद उसे सुरक्षित रखें।

Whatsapp Farmers Networkलागत कितनी आती है?

प्लास्टिक मल्चिंग की लागत कई बातों पर निर्भर करती है। जैसे क्यारियां का साइज क्या है और बाजार में फिल्म का मौजूदा रेट क्या है। रेट हर साल कम-ज्यादा होते रहते हैं। लेकिन फिर भी अगर औसत लागत की बात करें, तो औसत लागत प्रति बीघा लगभग 8 हजार रूपए तक आती है। 




सरकारी अनुदाना मिलता है क्या?

देश की कई राज्य सरकारों ने प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक का इस्तेमाल करने पर किसानों को अनुदान की सुविधा दे रखी है। मध्य प्रदेश सरकार प्लास्टिक मल्चिंग की लागत का 50 प्रतिशत या फिर अधिकतम 16 हजार रूपए प्रति हेक्टेयर का अनुदान दे रही है।

इस लेख के बारे में आपके जो भी विचार है वो आप नीचे कॉमेंट बॉक्स में लिखने सकते हैं।

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