क्यों सागवान है बेशकीमती? एक एकड़ में सागवान के पेड़ 50 लाख तक की कमाई करवा सकते हैं।

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सागवान की मांग के पीछे की 2 सबसे बड़ी वजहें

पिछले 20 साल में दुनिया में दो चीजों में तेजी से वृद्धि हुई है। पहली-अमीरों की संख्या और दूसरी दर्जनों देशों में युद्ध या गृह युद्ध। इन दोनों की बातों का सागवान से सीधा संबंध है।

अमीरों की बढ़ती संख्या ने सागवान की मांग काफी बढ़ा दी है क्योंकि बड़े बड़े घरों और इमारतों में सागवान की लकड़ी से बने फर्नीचर की भारी डिमांड है।

दूसरा है युद्ध – दुनिया में 200 से ज्यादा देश हैं और करीब 40 देशों में इस समय या तो गृह युद्ध छिड़ा हुआ है या फिर दो पड़ोसी देशों के बीच युद्ध चल रहा है। युद्ध में इस्तेमाल होने वाली बंदूकों के बट भी सागवान की लकड़ी से ही सबसे ज्यादा बनते हैं।




भविष्य में कमाई

सागवान की मांग और सप्लाई में जमीन आसमान का अंतर है। इसलिए आने वाले कई दशकों तक सागवान की लकड़ी के दाम घटने वाले नहीं है। दरअसल, सागवान की लकड़ी की हर साल जरूरत 200 मिलियन क्यूबिक फीट है।

जबकि सप्लाई सिर्फ इसकी 10 प्रतिशत ही हो पाती है। यानी करीब 90 प्रतिशत की हमेशा कमी बनी रहती है।




व्यवसायिक खेतीबाड़ी के अंतर्गत सागवान की खेती क्यों की जाये?

  1. विश्व विख्यात प्रीमियर इमारती लकड़ी के तौर पर सागवान की पहचान है। चमकीले रंग, सुगन्ध और गुणवत्ता के लिये मशहूर सागवान मजबूत और बेहद टिकाऊ लकड़ी है।
  2. सागवान का इस्तेमाल घर, ऑफिस और घर की सजावटी वस्तुओं के निर्माण, बन्दूक की बट इत्यादि के लिये अधिक होता है।
  3. सागवान की बाजार को जरूरत 200 मिलियन क्यूबिक फीट सालाना है, जबकि पूर्ति सिर्फ 20 मिलियन क्यूबिक फीट सालाना ही हो रही है।
  4. यानी सागवान की पूर्ति के लिये 180 मिलियन क्यूबिक फीट की और जरूरत है।

यह जड़ द्वारा तैयार होने की वजह से आसमान की तरफ सीधा बढ़ता है। इसमें टहनी, शाखाऐं, फूल, फल इत्यादि नहीं होते।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, ऊना, मंडी, हमीरपुर, बिलासपुर और चंबा में पिछले कुछ साल से सागवान की बागबानी बहुत तेजी से बढ़ी है।

लागत कितनी होगी और कितनी कमाई हो सकती है?

सागवान का एक पौधा 80 रुपए से 100 रुपए के बीच आता है। इसका पेड़ 12-13 वर्ष में तैयार हो जाता है। तब प्रति पौधा किसानों को 25-30 हजार तक की कमाई हो जाती है। एक एकड़ जमीन से 50 से 55 लाख रूपये तक हो सकती है कमाई।

इनको खेतों की मेढ़ पर भी लगाया जा सकता है, क्योंकि इससे खेत या फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता।




कहां संपर्क करें।

इसके लिए आप प्राइवेट और सरकारी एजेंसियों को संपर्क कर सकते हैं। अगर आपको किसी प्राइवेट कंपनी के अधिकारी का नाम और नंबर चाहिए, तो कृप्या अपना पूरा नाम, शहर और गांव का नाम और मोबाइल नंबर लिखकर kisankhabar@gmail.com पर ईमेल कर दीजिए। आपको ईमेल पर ही नाम और नंबर भेज दिया जाएगा।

हमारे पाठकों से निवेदन है कि ईमेल या फेसबुक पर अधिकारियों का नंबर ना मांगे। जिनको जरूरत है सिर्फ उन्हीं को ईमेल पर नंबर दिए जा सकते हैं।

नोट :- किसानख़बर.कॉम का किसी भी कंपनी के साथ कोई व्यावसायिक डील नहीं है।

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