पूसा जैल लगाओ और फसल की प्यास बुझाओ, अब नहीं फसल को बार बार पानी देने की जरूरत

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अब सिर्फ एक बार के पानी में ही होगी फसल तैयार

पिछले करीब 7-8 साल से टीवी पर आपको एक विज्ञापन खूब दिखता है जिसमें एक एक्टर अपने बालों की नमी की जरूरत पूरी करने के लिए बालों में जैल लगाता दिखता है। अब कुछ उसी तरह ही आप अगर किसी किसान को अपनी फसल को जैल लगाते देख लें, तो चौंकिएगा नहीं।

देश के कृषि वैज्ञानिक लगातार खेती को और आसान बनने के लिए दिन रात नई नई रिसर्च करते रहते हैं, ताकि नई चीजों की खोज हो सके और किसानों को इसका फायदा मिल सके। ऐसे में अब एक नई खोज की है बड़ौदा कृषि विज्ञान केंद्र ने, जो कि इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च(आईसीएआर) से संबंधित है।

बड़ौदा कृषि विज्ञान केंद्र की खोज के मुताबिक देश में कई इलाकों में जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है और फसलों को 3 बार पानी देना संभव नहीं हो पा रहा. लेकिन अब ऐसे इलाकों में फसल को पानी के बजाय जैल लगाया जाएगा।

केंद्र ने पूसा हाइड्रोजैल नाम का एक पदार्थ विकसित किया है, जो 2 या 3 बार पानी देने वाली फसलों को सिर्फ 1 बार की सिंचाई में तैयार कर देगा। बड़ौदा कृषि विज्ञान केन्द्र ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में इसका प्रयोग गेंहू और चना की फसलों पर किया है, जहां परिणाम उम्मीद से  भी ज्यादा अच्छे आए हैं।

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ऐसे काम करता है पूसा हाइड्रोजैल

बारीक कंकड़ों जैसा होता है पूसा हाइड्रोजल। इसे बीज के साथ फसल की बुआई के समय खेतों में डाला जाता है। जब फसल में पहला पानी दिया जाता है तो पूसा हाइड्रोजैल पानी को सोखकर 10 मिनट में ही फूल जाता है और अंत में जैल में तब्दील हो जाता हैं।

जैल में बदला यह पदार्थ गर्मी और उमस में भी नहीं सूखता। जड़ों से चिपके होने की वजह से पौधा अपनी जरूरत के हिसाब से जड़ों के माध्यम से इस जैल का पानी धीरे धीरे सोखता रहता है। यह जैल 2.5 से 3 महीने तक एक सा रह सकता है।




खेत पर बुरा असर नहीं, अनाज का दाना भी बड़ा

बड़ौदा कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक चंद्रभान सिंह के अनुसार जिस खेत में गेहूं और चने के साथ पूसा जैल डाला गया, वहां सिर्फ 1 पानी में ही फसल तैयार हो गई। इसके साथ ही, पूसा हाइड्रोजैल के मदद से हुए चने का साइज भी 2 बार की सिंचाई से हुए चने के साइज से बड़ा होता है।

खास बात यह है कि पेस्टीसाइट्स की तरह, इस जैसे से खेत में कोई नुकसान नहीं होता।




एक एकड़ में 1200 का खर्च

अभी पूसा हाइड्रोजैल के दाम रूपए 1200 प्रति किलो हैं। 1 एकड़ में बीज के साथ 1 किलो पूसा हाइड्रोजैल बोया जाता है। जबकि 1 बार की सिंचाई में किसान को 1 एकड़ के लिए रूपए 500 से 700 चुकाने पड़ते हैं।

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