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कैसे होती है मलेरिया की दवा में इस्तेमाल होने वाली आर्टिमिशिया की खेती

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पिछले दिनों हमने एक ऐसी फसल पर स्टोरी पोस्ट की थी, जिसका इस्तेमाल मलेरिया की दवा बनाने में बहुत ही ज्यादा होता है। अब इस फसल की पैदावार सीमैप (CIMAP) के जरिए देश में तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि किसानों को इस फसल में परंपरागत फसल के मुकाबले कई गुना ज्यादा लाभ मिलता है। उस खबर के बाद करीब 30 हजार लोगों ने वॉट्सअप, फेसबुक, ट्विटर, ईमेल के जरिए देश भर से इस ख़बर की पूरी जानकारी मांगी थी। विस्तार से वो रिपोर्ट अब यहां पेश है।




देश में आर्टिमिशिया की कितनी मांग है

सीमैप के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ.संजय कुमार के मुताबिक देश में सीमैप ने WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) से मांग आने के बाद, आर्टिमिशिया की खेती साल 2005 में करवाना शुरु की थी। फिलहाल भारत में जितनी इस फसल की मांग है उसका करीब 25 प्रतिशत ही सप्लाई पूरी हो पाती है। बाकी की कमी केन्या, चाइना, तंजानिया जैसे देशों से पूरी की जाती है।

फसल कब होती है – वैसे तो इस फसल का समय मार्च से जून होता है। लेकिन इसे और बेहतर ढंग से समझने के लिए इसे दो हिस्सों में समझें। आपका खेत अगर फरवरी मे खाली होता है यानी अगली फसल के लिए फरवरी में खाली होता है, तो दिसम्बर के अंत में नर्सरी लगानी होगी। अगर आपका खेत मार्च में खाली होगा, तो जनवरी के मध्य में नर्सरी लगानी होगी। यानी पहले इस फसल की नर्सरी बनानी होती है और फिर नर्सरी से पौधा खेत में लगाना होता है। ये ठंडे क्षेत्रों की फसल है।




नर्सरी के लिए कितनी जगह चाहिए

नर्सरी के लिए आप या तो अपने खेत में थोड़ी जगह निकाल सकते हैं या फिर कोई और खाली जगह ढूंढ सकते हैं। 1 हेक्टेयर में कुल 66 हजार पौधे लगते हैं। जिनकी नर्सरी बनाने के लिए आपको 500 वर्ग मीटर की जरूरत होगी। नर्सरी को आप घर की छत, खाली प्लॉट या खेत में कहीं भी बना सकते हैं।

लागत और कमाई कितनी होगी और बीज कहां से मिलेगा

लागत – इसकी लागत करीब 10 से 12 हजार रूपए प्रति एकड़ आती है। आर्टिमिशिया का बीज आपको सीमैप से मुफ्त मिलता है, इसलिए आपको ये लागत बाकी फसलों के मुकाबले काफी कम पड़ती है।

कमाई – कंपनियों पौधे की सिर्फ पत्तियां लेती हैं। ऐसे में एक एकड़ में करीब 30 कुंटल पत्तियां निकलती हैं जिन्हें कंपनी करीब रूपए 33 से 35 प्रति किलो के हिसाब से लेती है। यानी एक एकड़ में करीब 1 लाख का उत्पादन होता है। जबकि लागत आती है करीब 10-12 हजार रूपए। प्रति एकड़ लागत के करीब 10 गुना तक की कमाई हो सकती है।

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पानी कितना देना होता है।

इस फसल को पानी की अच्छी खासी जरूरत होती है। सीमैप के प्रमुख वैज्ञानिक ( Principal Scientist) डॉ. ए.के.गुप्ता के मुताबिक ‘कुल 6-7 बार पानी देना होता है यानी करीब हर 10-12 दिन में पानी की जरूरत होती है। लेकिन ध्यान रहे जहां डूब क्षेत्र हैं या फिर पानी खेतों में अपने आप घुस आता है वहां ये फसल नहीं लग सकती।

किससे है खतरा

अच्छी बात ये है कि इस फसल को जानवरों से कोई खतरा नहीं है क्योंकि कोई भी जानवर इस फसल को खाना पसंद नहीं करता। ध्यान रहे कि इस फसल को अगर किसी से नुकसान हो सकता है तो वो है पाला। सिर्फ पाला ही आपके पौधे को नुकसान पहुंचा सकता है।




क्या छोटे किसान इस फसल को कर सकते हैं।

सीमैप के जरिए किसानों से इस फसल का कॉन्ट्रैक्ट करने वाली कंपनियां एक बात पर खासतौर पर ज्यादा गौर करती है। वो ये कि उनको इस फसल को आपके खेत से लाने ले जाने में कितनी लागत आएगी। उनके नजदीकी सेंटर से कितनी दूरी पर है आपका खेत। ऐसे में अगर आप 1-2 एकड़ में ही खेती करना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि आप किसानों का एक समूह बनाकर इस फसल को करें, ताकि कंपनी को भी लागत कम पड़े और आप भी आर्टिमिशिया की लाभकारी खेती कर सकें।

किससे जरिए कर सकते हैं आर्टिमिशिया की खेती

भारत में सिर्फ सीमैप (CIMAP) के जरिए ही आर्टिमिशिया की खेती हो सकती है। क्योंकि CIMAP ही आपको इसके बीज मुफ्त में उपलब्ध करवाता है। सीमैप ने ही इसकी सभी तक की सभी 4 प्रजातियों को विकसित किया है। सीमैप सरकारी संस्था हैं।

कैसे होता है कंपनी के साथ कॉन्ट्रेक्ट

ये जानने के लिए आपको अगली ख़बर को पढ़ना होगा, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट के समय से लेकर पैसे मिलने तक की पूरी जानकारी दी गई है। ‘कैसे करें कंपनी के साथ आर्टिमिशिया की कॉन्ट्रैक्ट खेती’ खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। अगर लिंक ना खुले या कोई दिक्कत आए, तो कृपया आप किसानख़बर.कॉम के ताजा खबर सेक्शन में इस खबर को पढ़ सकते हैं।

कैसे और किसको करें संपर्क

यदि आप इस फसल को करना चाहते हैं तो आप सीधे सीमैप में संपर्क कर सकते हैं। सीमैप में संबंधित अधिकारी का नाम और नंबर जानने के लिए कृप्या आप अपना पूरा नाम, आपके शहर, तहसील और गांव का पूरा नाम, आपका मोबाइल नंबर और ये कितने एकड़ खेत में आप आर्टीमिशिया की खेत करना चाहते हैं, ये लिखकर हमको kisankhabar@gmail.com पर ईमेल कर दीजिए। ध्यान रहे, अधूरी जानकारी भेजने पर संबंधित अधिकारी का नाम और नंबर नहीं मिल पाएगा। साथ ही ये भी ध्यान रखें कि वॉट्सअप, फेसबुक, ट्विटर इत्यादि पर भी कोई नंबर शेयर नहीं होगा।

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इस खबर को नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके लाइक जरूर करें।

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Vandana Singh

वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है

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4 Comments

  1. Like September 8, 2018

    Like!! Really appreciate you sharing this blog post.Really thank you! Keep writing.

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  2. I went over this site and I think you have a lot of good information, saved to fav 🙂

    Reply
  3. ปั้มไลค์ October 10, 2018

    I believe you have mentioned some very interesting points, regards for the post. 🙂

    Reply
  4. Ana Kipling March 21, 2019

    An impressive share, I just given this onto a colleague who was doing a little analysis on this. And he in fact bought me breakfast because I found it for him.. smile. So let me reword that: Thnx for the treat! But yeah Thnkx for spending the time to discuss this, I feel strongly about it and love reading more on this topic. If possible, as you become expertise, would you mind updating your blog with more details? It is highly helpful for me. Big thumb up for this blog post!

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