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नर्मदा नदी की बंजर जमीन पर एक किसान प्रति एकड़ कमा रहा है 2 लाख रूपए, (मोबाइल के लिए ईमेल करें)

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जबलपुर के किसान की सफलता की कहानी

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है घुघरा। ये गांव नर्मदा नदी के नजदीक है। इसी गांव का एक किसान है संकल्प सिंह परिहार। नाम से संकल्प सिंह, अपने इरादों से भी पक्के संकल्प वाले हैं। कुछ साल पहले उन्होंने नर्मदा नदी के किनारे बंजर जमीन पर आम का बाग लगाने का फैसला लिया।
पहले तो लोग इनके इस फैसले पर काफी हंसे। उनकी मजाक उड़ाया। कुछ लोगों ने समझाया भी कि बंजर और पथरीली जमीन पर खेती करके अपना समय और पैसा बर्बाद ना करे। लेकिन संकल्प सिंह तो संकल्प ले चुके थे। इसलिए उन्होंने 8 एकड़ पथरीली जमीन पर आम, अनार और अमरूद के बगीचे लगा दिए।
संकल्प का हौसला देखकर कृषि विभाग के वैज्ञानिकों भी आगे आए। संकल्प ने आम और अनार के 3-3 हजार पौधे लगाए। बीच-बीच में नींबू और अमरूदों से लदे पेड़ भी सफलता की कहानी बताते नजर आते हैं।




बनना चाहते थे पुलिसवाला

संकल्प सिंह ग्रेजएट हैं और उनका परिवार उनको पुलिस वर्दी में देखना चाहता था। संकल्प ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए सब इंस्पेक्टर बनने के लिए तैयारी भी की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
इस बीच जब उन्होंने देखा कि कैसे लोग अपनी नई तकनीक से खेती बाड़ी में अच्छी कमाई कर रहे हैं, तो उनकी रूचि खेती बाड़ी में बढ़ी। इसी बीच उनको गांव में 8.5 एकड़ बंजर जमीन मिल गई।

आम्रपाली और मलिका

संकल्प ने जमीन में आम्रपाली और मलिका आम की हाईब्रीड किस्म लगाई हैं। बड़ी खोजबीन के बाद इसके कलमी पौधे मलिहाबाद और पचमढ़ी वो लेकर आए। कृषि अधिकारी अशोक मिश्रा की सलाह के मुताबिक उन्होंने पथरीली जमीन पर उसकी रोपाई शुरू कर दी। कुछ ही महीनों में ही आम ने ग्रोथ पकड़ ली और बंजर जमीन भी हरी भरी होने लगी।
विभाग ने फल आने के 3 साल का समय बताया था। लेकिन 2 साल में ही इन पौधों ने फल देने शुरू कर दिए। अब तो अनार के पौधों में भी फल आने लगे हैं।




क्या खास है आम्रपाली और मलिका किस्म में

संकल्प के मुताबिक आम्रपाली और मलिका आम की हाइब्रीड किस्म में बहुत विशेषताएं हैं। इसमें गुठली छोटी और पतली होती है जबकि गूदा अधिक होता है।
इसमें रोग प्रतिरोधक की क्षमता गजब की होती है। यह पकने के बाद भी तेज हवा में अपने आप नीचे नहीं गिरता। इसका स्वाद और सुगंध बहुत अच्छी है। मलिका आम वजन में 600 ग्राम से 1 किलो तक होता है।
इसका सुनहरा रंग सभी को पसंद आता है। दोनों तरह के आमों की थोक बाजार में रूपए 50 से 80 प्रति किलो की कीमत मिल जाती है। मलिका तो एक्सपोर्ट Quality का आम होता है, जिसे मेट्रो सिटीज में रूपए 200 प्रति किलो तक फुटकर में बेचा जाता है।
किसान 3 साल बाद एक एकड़ में 1 से 1.5 लाख रुपए और 5 साल बाद रूपए 2 से 2.5 लाख प्रति एकड़ का लाभ कमा सकते हैं।




नोट – पथरीली और बंजर जमीन पर कैसे फसल पैदा की जाती है, इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अगर आपको किसान संकल्प सिंह का नंबर चाहिए, तो कृप्या अपना पूरा नाम, मोबाइल नंबर, शहर का नाम और गांव का नाम लिखकर हमको kisankhabar@gmail.com पर ईमेल कर दें।

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