Drone in Agriculture Farming

अमेरिका ने ड्रोन बनाया जासूसी के लिए लेकिन भारतीय किसानों ने इससे कर डाली खेती

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जासूसी करने वाला ड्रोन अब खेती में कर रहा है मदद

अफगान, ईराक और सीरीया युद्ध की ख़बरों के दौरान अक्सर आपने टीवी पर देखा और अख़बारों में पढ़ा होगा ड्रोन हमले या ड्रोन से जासूसी के बारे में। कहीं कहीं पर ड्रोन से पिजा डिलीवरी के बारे में भी पढ़ा होगा, लेकिन अब जो आपने पढ़ने वाले हैं, वो खेती में क्रांतिकारी बदलाव की शुरूआत की ओर इशारा कर रहा है।

भारत में भी अब कम पढ़े लिखे किसानों ने खुद ही ड्रोन मशीन बनाकर खेतों में इसका सफलता पूर्वक इस्तेमाल भी शुरु कर दिया।

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पिछले करीब 15 साल से राहुल छाबड़ा छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में खेती कर रहे हैं। लेकिन उनको खेती के लिए अक्सर मजदूरों की भारी कमी की समस्या का सामना करना पड़ता है।

अगर इंतजाम हो भी जाए तो उनको बाजार भाव से ज्यादा कीमत देनी पड़ती है, जिसकी वजह से फसल की लागत बढ़ जाती है और मुनाफा घट जाता है।

ऐसे में हर साल होने वाली इस समस्या से का स्थाई समाधान निकालने के लिए राहुल ने खुद ही ड्रोन बना डाला जिससे फसल पर दवा छिड़कने का कई दिनों को काम का कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है।

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ये वही ड्रोन है जिसे अमेरिका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कुछ अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर वाले इलाकों में तालिबानियों को खत्म करने में इस्तेमाल करता है। लेकिन राहुल ने इसका इस्तेमाल फसल पर दवा छिड़कने में किया।

दरअसल राहुल ने गूगल पर पहले तो ड्रोन से जुड़ी सभी जानकारी जुटाई और फिर यूट्यूब पर ड्रोन बनाने का तरीका सीखा। इसके बाद उन्होंने चीन, जापान और अमेरिका से इसके पार्ट्स मंगवाएं और कुछ पार्ट्स का भारत में ही इंतजाम कर लिया।

करीब 2 साल की मेहनत के बाद वो पहला ड्रोन बनाने में सफल रहे। अब उनके पास कुल 3 ड्रोन हैं, जिनसे वो अपने 25 एकड़ के फार्म हाउस में फसल पर दवा छिड़कते हैं।

एक एकड़ के खेत में दवा छिड़कने के लिए आमतौर पर पूरे दिन 2 मजदूरों की जरूरत पड़ती है, जबकि इस ड्रोन यही काम सिर्फ 30 मिनट में पूरा कर लिया जाता है।

पहला ड्रोन बनाने में करीब 2 लाख रूपए खर्च हो गए। भारत में इसे कोई नहीं बेचता, इसलिए अगर इसे विदेश से मंगवाते तो करीब 5 लाख रूपए में मिलता। लेकिन उससे ज्यादा समस्या ये कि अगर खराब हो जाए तो फिर भारत में इसे कोई ठीक नहीं कर पाता।

राहुल के बनाए ड्रोन को बैग या सूटकेस में रखकर कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।

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