Flowers farming suggested by Indian Government

वकालत छोड़ फूलों से कर ली दोस्ती, हो गए सफल दौलतमंद किसानों में शुमार

ताजा ख़बर नई तकनीक नौकरी या खेती

पेशे से वकील एक शख्स ने वकालत छोड़ 35 साल की उम्र में ही खेती में सफलता के झंडे गाड़ दिए

कभी इंजीनियर तो कभी रॉकेट वैज्ञानिक, कभी मार्केटिंग के दिग्गज तो कभी आईटी के महारथी, एक के बाद एक बड़े औहदे पर बैठे लोग तनाव से भरी नौकरी को छोड़ वापस खेती की तरफ रुख कर रहे हैं। जहां पर सूकुन के साथ साथ नौकरी के मुकाबले ज्यादा पैसा कमाने का मौका मिलता है।

इसी विशेष ग्रुप में अब एक वकील साहब भी जुड़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के 35 साल के मुइनुद्दीन पेशे से वकील हैं। लेकिन वकालत से बोर होने के बाद अब वो फुल टाइम किसान बन गए हैं। वो सिर्फ किसान ही नहीं बने, बल्कि फूलों की खेती में जबरदस्त कमाई करके वो अब सफल किसानों के साथ शान से खड़े हुए हैं।

बाराबंकी जिले में मुइनुद्दीन के पास 25 एकड़ का खेत है, जिसके कुछ हिस्से में उन्होंने फूलों की खेती कर रखी है।

मुइनुद्दीन के मुताबिक साल 2000 में एलएलबी की ड्रिग्री तो ले ली, लेकिन वकालत रास नहीं आई। ऐसे में फूलों की खेती के बारे में पता चला।थोड़ी छानबीन करने के बाद समझ आया कि आज के जमाने की डिमांड इसी तरह की खेती है। इसलिए मुइनुद्दीन ने शुरुआत 1 बीघा खेत में ग्लाइडोलस फूलों की खेती की।

हालांकि पहले फसल में मुइनुद्दीन को कोई फायदा नहीं हुआ, लेकिन खेत में ग्लाइडोलस के साथ साथ रजनीगंधा और जरबेरा की खेती भी शुरु कर दी। आज मुइनुद्दीन का फूलों से कमाई सालाना 50 लाख रूपए है, जो कि लगातार बढ़ रही है।

मुइनुद्दीन के मुताबिक देश में ग्लाइडोलस के फूल की सबसे ज्यादा पैदावार उनके खेत में होती है। इस काम को करने के लिए खेत पर लगभग 100 लोग लगे हुए हैं।

 

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