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अगर मैदानी इलाके में आपका खेत है तो भी आप कर सकते हैं कॉफी की खेती, एक किसान ने किया सफल परीक्षण

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किसान बासु ने किया असंभव को संभव

जब भी कभी चाय और कॉफी की खेती की बात आती है तो आंखों के सामने पहाड़ी इलाके में चाय की पत्तियां तोड़ती महिलाएं दिखने लगती हैं। लेकिन ये तस्वीर अब बदलने लगी है।

द.भारत में मैसूर से बैचलर डिग्री लेने वाले एक किसान ने कॉफी को पहाड़ों के बजाय मैदानी इलाके में सफलतापूर्वक उगाकर नई नजीर पेश की है। द.भारत में एक जगह है चन्नारायपत्ना। चन्नारायपत्ना से करीब 8 किमी की दूरी पर कालेनाहल्ली नाम से एक जगह है, जो मैदानी इलाका है। इस इलाके में ए आर बसु नाम से एक किसान का घर और कॉफी का फॉर्म हाउस है।

बसु के मुताबिक उनकी पत्नी कोडागु जिले से हैं जहां पर बड़े स्तर पर कॉफी उगाई जाती है। बसु ने वहीं जाकर कॉफी उपजाने की अनौपचारिक तौर पर पूरी ट्रेनिंग ली।

ट्रेनिंग के बाद बसु ने तय किया कि वो इसे पहाड़ी इलाके के बजाय मैदानी इलाके में करने की कोशिश करते हैं। ऐसे में उन्होंने रोबुस्टा कॉफी लगाई। इसके जो नतीजे आए, उन्होंने देखकर बसु की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बसु ने कुल 600 पौधे लगाए थे, जिसने उन्हें अब सालाना 12 से 14 बोरे कॉफी का उत्पादन मिले लगा है।

बसु का कहना है कि वो बचपन से ही खेती से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। उनके दादा जी उनकी मेरी प्रेरणा थे, क्योंकि वे खेती को बाकी पेशों से ज्यादा तवज्जों दिया करते थे

2 एकड़ से थोड़े ज्यादा के खेत में बासु ने कॉफी के साथ साथ नारियल, मिर्च, सुपारी और कई तरह के फलों के पेड़-पौधे लगा रखे हैं। कॉफी के लिए वो पानी का इंतजाम, बोरबेल और स्प्रीन्कलर्स से करते हैं। अगर बारिश सही हो जाए, तो फिर बोरबेल और स्प्रीन्कलर्स की जरूरत कम पड़ती है।

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