Rahul left job in australia for farming

ऑस्ट्रेलिया में बड़ी तनख्वाह वाली नौकरी छोड़ खड़ा किया फूलों की खेती का कारोबार

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राहुल मिश्रा ने साबित किया कि खेती में खतरा कम फायदा बहुत ज्यादा है

ढेरों तनावों से भरी नौकरी ज्यादा बेहतर है या फिर खेती – इस सवाल का जवाब अगर आप ढूंढ रहे हैं तो आपके जरूरत है नौकरी बनाम खेती सीरीज में आने वाली हमारी खास रिपोर्ट को पढ़ने की। हर बार की तरह इस बार भी इस सीरीज में ऐसे युवा और हिम्मत वाले लोगों की सफलता की कहानी लेकर आए हैं जिसने ऑस्ट्रेलिया में लाखों की नौकरी को एक झटके में लात मारकर खेती में वो कर दिखाया जिसके लोग सिर्फ सपने देखते हैं।

40 साल के राहुल मिश्रा ऑस्ट्रेलिया की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करते थे और लाखों रूपए महीने की सैलरी लेते थे। लेकिन 2008 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया और चले आए भारत वापस, ताकि खेती में करियर बना सकें और अपना बुढ़ावा ज्यादा सुरक्षित कर सकें।

राहुल ने 15 साल में 4 बड़ी कंपनियों में नौकरी करने के बाद खेती का काम करने वाकई में बड़ी बात थी। लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले गांव सरैंया के रहने वाले राहुल मिश्रा ने आते ही उत्तर प्रदेश का पहला कॉमर्शियल पॉलीहाउस बनाया।

राहुल ने पहले तो तालाब को भरवा दिया और साथ ही 2 एकड़ खेत में खेती शुरु कर दी। 1 पॉली हाउस भी बनाकर उसमें रजनीगंधा और जरबेरा के फूलों की खेती शुरु कर दी। जब कभी खेती से जुड़ी किसी जानकारी की जरूरत होती, तो वो तुरंत इंटरनेट पर गूगल बाबा की मदद ले लेते।

इस कड़ी मेहनत का फल ये मिला कि अब वो विदेशों में भी अपने उत्पाद सप्लाई करते है।

 

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