Taiwani Pappaya in Rajasthan India

ताइवानी पपीते की राजस्थान में एंट्री, एक पौधे में लगते हैं 40 से 50 पपीते

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राजस्थान राज्य खेती में लगातार नए नए प्रयोग करके सफलता हासिल करता जा रहा है। जिस राज्य को रेगिस्तान की वजह से बेकार कहा जाता था अब वहां खेती ने रोज नए नए बड़े काम हो रहे हैं।

राजस्थान के राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने लगातार दूसरे साल ताइवानी किस्म के पपीतों की पौध तैयार की दी है। यानी अब ये पौधे किसानों को बेचने के लिए तैयार हैं।

Taiwani Pappaya in Rajasthan India
Taiwani Pappaya in Rajasthan India

फल लगने की गारंटी

अनार के बाद अब ताइवान के पपीते की नई पौध राजस्थान के कृषि विभाग के वैज्ञानिकों ने तैयार की है। रेडलेडी 786 नाम की इस किस्म का पौधा कम पानी में भी अच्छी पैदावार देता है।

विभाग अभी तक करीब 300 पौधे किसानों को बेच चुका है। जबकि 700 पौधे अब बिकने के लिए बचे हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक ताइवान के पपीते में शुरु में नर और मादा पौधे का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है।

3-4 महीने के बाद ही पता चल पाता है कि ये नर है या मादा।  ये जानना इसलिए जरूरी होता है क्योंकि मादा पौधे पर ही फल लगने की गारंटी होती है। 25 रुपए प्रति पौधे के रेट में दुर्गापुरा कृषि अनुसंधान संस्थान किसानों को पौधे बेच रहा है।

एक पौधे में लगते हैं 40 से 50 पपीते
रेडलेडी 786 नाम के ताइवानी पपीते का पौधा पहले ही साल से फल देने लगता है। पौधा पनपने के 4-5 महीने बाद ही फल आने लगते हैं। एक पौधा औसतन 40 से 50 पपीते की पैदावार देता है।

हालांकि इस किस्म के पौधे को शुरु में वायरस लगने का खतरा रहता है। लेकिन अगर समय समय पर कीटनाशक का इस्तेमाल होता रहे तो कोई खतरा नहीं रहता।

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