September 2, 2016
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खेत उस जमीन को माना जाता हैं जहां खेती होती है। फैक्ट्री या बिल्डिंग में खेती होती। सभी लोग पिछले हजारों सालों से यही मानते और देखते आए हैं। लेकिन जापान की फैक्ट्री के अंदर बिना जमीन के खेती की बात जानकर आप अपनी सोच बदलने के लिए मजबूर हो जायेंगे।

ये कोई कल्पना नहीं बल्कि हकीकत है। जापान के मियागी में विश्व विख्यात सॉनी (Sony) कंपनी की एक फैक्ट्री सालों से बंद पड़ी थी। नए जमाने की हाइ-टैक खेती करने के लिए मशहूर जापान की मिराई कंपनी ने इस फैक्ट्री को अब इंडोर खेती (Indoor Farming) सफलतापूर्वक बदल दिया है। वीडियो देखने के लिए क्लिक करें

25,000 स्कावैयर फीट की विशाल जगह में बनी खेती की ये फैक्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी इंडौर खेती प्रॉजेक्ट है।




कौन करता है

जापान की मिराई कंपनी (Mirai Co., Ltd.) ने प्रयोग के तौर पर कुछ साल पहले इसे शुरु किया था, जो कि जबरदस्त सफलता वाला साबित हुआ। 2004 में शुरु हुई मिराई कंपनी हाइड्रोपोनिक्स खेती में एक्सपर्ट हैं और इसका हैड क्वार्टर जापान के Kashiwa-shi शहर में है।

मिराई कंपनी के अध्यक्ष और वैज्ञानिक शिघेहारू शिमामुरा के मुताबिक सिरएप 1 प्रतिशत पानी की सिंचाई से ही परंपरागत खेती के मुकाबले मिराई की टीम ने दोगुना उत्पादन हासिल किया है। इसी वजह से हमारी कंपनी सलाद के 10 हजार से भी ज्यादा बंडल फैक्ट्री यानी फॉर्म हाउस के बाहर भेज पाती हैं।




कैसे होता है।

  1. खेती के लिए हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। संक्षेप में बता दें कि मिट्टी के बजाय पानी में की जाने वाली खेती को हाइड्रोपोनिक्स तकनीक कहते हैं। क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक, विस्तार से जानने के लिए यहां पढ़ें।
  2. खेती की इस फैक्ट्री में खेती करते हुए आपको आम लोग नहीं मिलेंगे, बल्कि वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की तरह पहने जाने वाले सफेद कपड़े पहने लोग मिलेंगे। इनके मुंह पर मास्क भी लगा होगा। ताकि खेती वाली जगह पर किसी भी तरह की कोई बिमारी ना फैले और फसल के साथ साथ बाकी साथियों को कोई नुकसान ना हो।
  3. दरअसल, मिराई के वैज्ञानिकों ने पौधों को सूरज की सीधी रोशनी देने के बजाय LED Bulbs का इस्तेमाल किया है। करीब 17500 LED Bulbs लगाएं हैं, जिनसे सभी पौधों को जरूरत के मुताबिक पूरा प्रकाश मिलता है। इनको सीरीज यानी लाइन में इस तरह से लगाया गया है कि किसी भी पौधे को दिन हो या रात, प्रकाश की कमी ना रहे। साथ ही तकनीक की मदद से इस सिस्टम को ऐसा बनाया गया है कि पौधे दिन में ज्यादा प्रकाश ले सकें औऱ रात में जरूरत के हिसाब से ज्यादा सांस यानी ऑक्सीजन। मिराई कंपनी के वैज्ञानिकों के मुताबिक परंपरागत खेती की बजाय अगर हाइड्रोपोनिक तकनीक के जरिए पौधों को पानी और प्रकाश दिया जाता है, तो फसल से दोगुना तक उपज मिलती है।
  4. 15 मंजिल वाली इस इंडौर खेती की फैक्ट्री में फसलों के लिए कुल 18 रैक बनाए गए हैं, जिनपर 17 हजार से ज्यादा LED Bulbs लगे हुए हैं।

शिमामुरा का दावा है कि उनकी फैक्ट्री में इन तकनीक से पैदा होने वाली फसल स्वाद में ना केवल ज्यादा अच्छी होती है बल्कि इसमें 8 से 10 गुना ज्यादा तक बीटा कैरोटीन भी होता है। जबकि दोगुना तक कैल्सियम, मैग्जिन और विटामीन सी होता है।

भविष्य क्या है।

निकट भविष्य में मिराई कंपनी इस तरह की खेती भारत, मंगोलिया, हांगकांग, रूस और चीन जैसे देशों में करने पर काम कर रही है। फिलहाल कंपनी की इंडोर खेती की 25 फैक्ट्रिया चल रही है।

2050 तक दुनिया की जनसंख्या 9 अरब हो जाएगी। तब तक दुनिया में खाने की कमी अभी के मुकाबले बढ़ जाएगी। ऐसे में घटती खेती की जमीन और बढ़ती जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए इस तरह की खेती का भविष्य ज्यादा अच्छा माना जा रहा है।




अभी जापान में क्या स्थिति हैं

इस तकनीक को बढ़ावा देने में जापान इस समय सबसे आगे है। अकेले जापान में ही करीब 380 ऐसी छोटी-बड़ी इंडोर खेती की फैक्ट्रियां काम कर रही हैं।

जापानी सरकार इस खेती को खूब बढ़ावा दे रही है। ऐसे में तोशिबा, पैनासोनिक औऱ फुजित्सु जैसी बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां अपनी बंद पड़ी या पुरानी हो चुकी फैक्ट्रियों में इसी तरह की खेती शुरु करने पर गंभीरता से सोच रही हैं।

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Vandana Singh
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है