June 11, 2016 Teak planting in Rajasthan

राजस्थान में कर दिखाया असंभव को संभव, सागौन के 185 पेड़ों को उगाया बने करोड़ों के मालिक

राजस्थान के किसान रेगिस्तान में भी फूल खिलाने में लगे हैं। पिछले दिनों हमने खबर पोस्ट की कि कैसे राजस्थान के युवा किसान ने राज्य में केसर की खेती कर डाली।

युवा के बाद अब बारी है राजस्थान के बुजुर्ग सफल किसान की कहानी। अब 78 साल के हो चुके बुजुर्ग किसान राधे श्याम तिवारी ने करीब 20 साल पहले रिटायरमेंट के बाद राजस्थान में सागौन के पेड़ लगाने के बारे में सोचा। इसके लिए उन्होंने जयुपर से 20 किलोमीटर दूर दौलतपुरा इलाके को चुना, जहां उनको 6 एकड़ का फॉर्म हाउस है। इस फॉर्म पर उनका परिवार पहले से ही नींबू, करौंदे और गेंहू की खेती करता आया है।

ये विचार आते ही वो इसके पौधे या बीज लेने के लिए जयपुर के कृषि विभाग में पहुंचे। लेकिन वहां उम्मीद के एकदम उल्टा देखने को मिला। अधिकारियों ने तिवारी जी की इस कोशिश को पागलपन कहते हुए मदद करने से मना कर दिया।

लेकिन कभी दार्जिलिंग के चाय बागानों काम करने वाले तिवारी जी ने हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने 1995 में 250 पौधे मंगवाए, जिनकी कीमत उस समय उन्होंने 10 रूपए प्रति पौधा दी थी। इनमें से 185 पौधे बच गए जबकि बाकी पौधे किसी ना किसी वजह से मर गए। लेकिन अब ये 185 पौधे 20 साल के हो चुके हैं और इनकी कीमत करोड़ों की हो चुकी है। मौजूदा बाजार में इनकी कीमत रूपए 3500 प्रति क्यूबीक फीट है। यानी इनकी कुल कीमत 1 करोड़ 85 लाख रूपए है।

हालांकि 78 साल के हो चुके तिवारी जी फिलहाल इनको बेचने के मूड में नहीं है। उन्होंने इस सफलता के बाद आसपास के किसानों को 500 से भी ज्यादा सागवान के पौधे दिए हैं। इसी वजह से आपको दौलतपुरा इलाके में ज्यादातर जगहों पर सागौन के पेड़ दिख जायेंगे।

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