June 27, 2016 sandalwood-variations

गुजरात में ये किसान करता है चंदन की खेती

देश में एक से बढ़कर एक किसान हैंं। इनकी सफलता की कहानियां ना केवल बाकी लोगों में जोश भरती हैं, बल्कि ये भी बताती हैं कि खेती से ज्यादा फायदे का काम कोई और नहीं है। खेती के बिना दुनिया जिंदा नहीं रह सकती। इसी कड़ी में एक और बड़ी सफलता की कहानी है गुजरात के किसान अल्पेश भाई पटेल की।

किसानों की आमदनी को केंद्र सरकार दोगुना करने के लिए कई अहम कदम उठा रही हैं, लेकिन कुछ किसान इन सभी के भरोसे ना रहकर खुद ही अपना कमाई को खेती से ही कई गुना कर रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं गुजरात के भरूच जिले के गांव अलवा के अल्पेश पटेल।

अल्पेश ने गुजरात में चंदन की खेती कर बाकी लोगों को भी कम लागत में करोड़ों की कमाई वाली खेती का रास्ता दिखाया है।

अल्पेश ने 10 लाख रुपये के निवेश के साथ चंदन की खेती शुरु की। चंदन के पौधे अभी धीरे धीरे बढ़े हो रहे हैं और करीब 15 साल बाद बिकने की स्थिति में होंगे। तब इनकी बाजार कीमत करीब 15 करोड़ रूपए होगी जो कि उनके निवेश के 10 लाख रूपए का 150 गुना है।

गुजरात सरकार ने साल 2003 में किसानों को चंदन की खेती करने की छूट दे दी थी। लेकिन ना तो लोगों को इस बारे में ज्यादा पता था और ना ही पहले कभी किसी ने राज्य में ऐसा रिस्क उठाया था।

अल्पेश पटले ने शुरु में करीब 5 एकड़ खेत पर चंदन के एक हजार पौधे लगाए थे, लेकिन शुरु में वो खराब हो गई। फिर अल्पेश को गुजरात के कृषि अनुसंधान संस्थान की मदद मिली। संस्थान के अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों ने आकर अल्पेश की फसल पर शोध करने का फैसला लिया।

15 से 20 साल में चंदन का पौधा बड़ा होकर पूरी बिकने लायक हो जाता है। ज्यादातर किसान इतना लंबा इंतजार नहीं कर पाते। लेकिन शायद किसानों को पता नहीं है कि चंदन की 1 किलो लकड़ी की कीमत 10 से 12 हजार रूपए है। इसलिए इसे दुनिया की सबसे महंगी फसलों में गिना जाता है।

किसानों को अब तो अपनी फसल बेचने के लिए परेशान होने की जरूरत भी नहीं है। चंदन को बेचने और एक्सपोर्ट करने तक की जिम्मेदारी गुजरात सरकार ने ले रखी है।

नोट – जिनको चंदन की खेती के लिए एक्सपर्ट की सलाह चाहिए और उनका नंबर भी, वो अपना पूरा नाम, शहर और गांव का नाम और मोबाइल नंबर लिखकर kisankhabar@gmail.com पर ईमेल कर दें।

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