June 5, 2016 Saffron Crop in rajasthan

शेखावाटी में हुआ कमाल, होने लगी केसर की खेती

अखबार में छपी खेती की सिर्फ एक ख़बर ने राजस्थान के युवा किसान रामकुमार कुम्हार की जिंदगी बदल दी। एक रोज अख़बार में केसर की खेती के बारे छपा लेख पढ़ने के बाद रामकुमार ने केसर को रेगिस्तान यानी राजस्थान में पैदा करने की ऐसी कसम खाई कि फिर इसको पूरा करके ही दम लिया।

ये कोई छोटी मोटी बात नहीं है। क्योंकि केसर आमतौर पर ठंडे इलाकों में ही पैदा होता है। जबकि रामकुमार ने इसे ना केवल राजस्थान में कर दिखाया बल्कि इसके लिए पानी का इंतजाम भी टैंकर से किया।

दरअसल, केसर की खेती का लेख पढ़ने के बाद रामकुमार ने जब इस बारे में अपने घर में बात की तो सभी लोग पीछे हट गए। कारण था इस पर आने वाला लाखों का खर्च। ऊपर परेशानी ये कि रामकुमार के परिवार के पास खुद का कोई खेत भी नहीं था। लेकिन रामकुमार ने कुछ और ही सोच रखा था।

उसने पहले तो गांव के एक किसान का खेत किराए पर लिया। 3 बीघा खेत में 2 किलो बीज लाकर बो दिया। लगातार वो फसल की देखभाल करता रहा और जो जानकारी उसने केसर की खेती के बारे में जुटाई थी, उसी पर अमल करता रहा। नतीजा, मेहनत रंग लाई और खेत में केसर खड़ा होने लगा। लेकिन तभी कुदरत ने दगा दे दिया और कुएं का पानी सूख गया।

लेकिन फिर से रामकुमार ने जुगाड़ का काम किया और टैंकर के पानी से ही केसर के खेत को पानी देता रहा। केसर की फसल को पहले हर 3-4 दिन में पानी देना होता है। फिर हर 6-7 दिन में और फइर 10 दिन में पानी देने की जरूरत पड़ती है।

मेहनत सफल हुई और फसल पूरी तरह से तैयार है।

रामकुमार ने केसर के बीज के लिए 2 साल पहले ढाई लाख रूपए जमा करवाए थे। अब जाकर उनको बीज मिला तो वो खेती कर पाए।

केसर की डिमांड के मुताबिक पैदावार नहीं है। इसलिए ये करीब 1 लाख रूपए किलो के हिसाब से बिकती है।

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