October 28, 2016
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नाम है रणदीप सिंह कंग। इस शख्स की दो अलग अलग देशों में 2 अलग अलग पहचान है। पहली – अमेरिका में एक बहुत ही सफल व्यापारी की जिसकी कमाई करोड़ों में थी। दूसरा – भारत में एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर पहचान बनी है जिसने अमेरिका में कड़ी मेहनत से 6 साल में खड़े किए करोड़ों रूपए की कमाई वाले बिजनस को बंद कर भारत में खेती में करिश्माई काम कर डाला।

ये काम इतना करिश्माई है कि ये ना केवल किसानों की जिंदगी बदल रहा है बल्कि लोगों की जान जाने से बचा भी रहा है।




क्या किया है रणदीप सिंह कंग ने

रणदीप सिंह कंग राजस्थान के रहने वाले हैं। उन्होंने भारत में पहले बीटेक किया और फिर इलैक्टिकल में एमटेक करने अमेरिका चले गए। 2006 में उन्होंने अमेरिका में ही अपना पहला डिपार्टमेंटल स्टोर खोला। जल्द ही उन्होंने 3 डिपार्टमेंटल स्टोर खोल डाले।

बहुत ही कम समय में कमाई 4 करोड़ रूपए सालाना होने लगी। परिवार से लेकर काम धंधे तक सबकुछ बढ़िया चल रहा था। लेकिन इस बीच वो राजस्थान में अपने गांव में फोन करके परिवार के बाकी लोगों से हाल चाल लेते रहते थे।

लेकिन अक्सर उनको गांव या उसके आसपास के लोगों के मरने की ख़बर मिलती तो एक बात जानकर वो हैरत के साथ साथ परेशानी में पड़ जाता है। वो बात ये थी कि ज्यादातर लोगों की मौत का कारण कैंसर ही था।

रणदीप से रहा नहीं गया, तो उन्होंने पता किया कि इलाके के लोगों को कैंसर क्यों हो रहा है। जांच-पड़ताल से पता चला कि यहां के किसान केमिकल वाले पेस्टिसाइड्स का जमकर इस्तेमाल करते हैं। नतीजा, इनकी सब्जियां और फसलों को खाने वालों को कैंसर जल्दी हो रहा है और अंत में मौत।

ऐसे में रणदीप ने अमेरिका में ही अपने दोस्त के फॉर्म हाउस पर जाकर इससे जुड़ी जानकारी लेना शुरु कर दिया। साथ ही वो केमिकल वाले पेस्टिसाइड्स के विकल्प की भी जानकारी जुटाने लगे।




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ऐसे में उनको पता चला कि अगर वनस्पति और गौमूत्र के मिश्रण से बने पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल किया जाए तो ना केवल कैंसर की परेशानी खत्म हो जाएगी बल्कि किसानों को ज्यादा उत्पादन के साथ साथ कई और फायदें भी होंगे।

बस फिर क्या था उन्होंने इसे अमेरिका में ही बना डाला और वहीं पर इसका सफल एक्सपेरीमेंट भी कर डाला। जब वनस्पति और गौमूत्र से बने मिश्रण से अच्छे परिणाम मिले, तो उन्होंने इसे भारत में शुरु करने का मन बना लिया। ऐसे में रणदीप ने 2012 ने अमेरिका में अपना करोड़ों को बिजनस समेट लिया और राजस्थान के श्रीगंगानगर के गांव 20एफ चले जाए।

20एफ गांव में रणदीप ने 100 बीघा यानी 20 एकड़ खेत में केमिकल फ्री पेस्टिसाइड्स से खेती करना शुरु कर दिया।




क्या हैं गौमूत्र और वनस्पति से बने केमिकल फ्री पेस्टिसाइड्स के 7 फायदें

  1. खेतों की खुश्की खत्म होने लगती है
  2. मिट्टी में केंचुओं की तादाद बढ़ जाती है। सिर्फ 1 अकेला केंचुआ एक साल में 36 मीट्रिक टन मिट्टी को पूरी तरह से पलट देता है। अगर इस काम को किसान करे, तो 1 ट्रैक्टर से करने में उसे 1 मजदूर की मजदूरी और 100 लीटर डीजल का खर्च उठाना पड़ेगा।
  3. इसके अलावा, केंचुओं से मिट्टी को मुफ्त में नाइट्रोजन भी मिल जाता है।
  4. गौमूत्र में 16 अलग अलग प्रकार के न्यूट्रियंट्स होते हैं। जबकि पौधे को 14 प्रकार के ही न्यूट्रियंट्स की जरूरत होती है।
  5. गौमूत्र से फंगस और दीमक भी खत्म होता है।
  6. अगर गौमूत्र से बने पेस्टिसाइड को इस्तेमाल किया जाए तो फिर किसी भी अन्य प्रकार के खाद की जरूरत नहीं रहती।
  7. केमिकल से बने पेस्टिसाइड्स इस्तेमाल करने पर खेत में 2 से 3 दिन में पानी देना पड़ता है जबकि गौमूत्र से बने केमिकल फ्री पेस्टिसाइड्स में 7 से 8 दिन में पानी देने की जरूरत होती है।

 

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Tag: Randeep Singh Kang

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Vandana Singh
वंदना सिंह को पत्रकारिता का 10 साल का अनुभव है